
बिलासपुर, रायपुर।
बच्चों और कमजोर मरीजों को दी जाने वाली आम दवा कैल्सिड सस्पेंशन (200 ml) की एक बोतल में मांस जैसा संदिग्ध पदार्थ मिलने ने देशभर में दवा–सुरक्षा की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के देवपुरी स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहाँ 6 दिसंबर 2025 को यह चौंकाने वाला पदार्थ चिकित्सा कर्मियों की नजर में आया।
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य महकमे में हलचल मच गई और छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इस प्रकरण को “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में रखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।
पूरे बैच पर नजर—Actinova Pvt. Ltd. (Himachal) की दवा का नमूना सील कर लैब भेजा गया
FDA की संयुक्त टीम ने 7 दिसंबर को मौके पर पहुँचकर जिस दवा को सील किया, उसके विवरण इस प्रकार हैं—
दवा: कैल्सिड सस्पेंशन 200 ML
बैच नंबर: ALGE 4061
Mfg: 05/2024
Exp: 04/2026
निर्माता: Actinova Pvt. Ltd., बद्दी (हिमाचल प्रदेश)
नमूने को विधिवत प्रक्रिया से पैक कर राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद कानून में वर्णित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दवा के “प्राथमिक उपभोग स्तर” पर ऐसी सामग्री मिलना राष्ट्रीय स्तर पर दवा निर्माण, पैकेजिंग और गुणवत्ता परीक्षण की खामियों पर गंभीर सवाल छोड़ गया है।
प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता पर सतत निगरानी—स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी जिलों को कड़े दिशा-निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध दवा बाजार में न जाने पाए। औषधि निरीक्षकों को पूरे प्रदेश में नियमित सघन जांच का आदेश दिया गया है—
सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी मेडिकल स्टोर्स तक, दवाओं के बैच नंबर और सप्लाई चेन की निगरानी की जा रही है।
प्रदेश में दवा की गुणवत्ता को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई बार चिंताएं उठी हैं, लेकिन इस बार मामला उतना ही संवेदनशील है जितना असामान्य—क्योंकि सीरप की बोतल में मांस जैसा पदार्थ मिलना सिर्फ गुणवत्ता की त्रुटि नहीं, संभावित गंभीर मिलावट या कंटामिनेशन का संकेत माना जा रहा है।
“ऐसी किसी भी सूचना पर तुरंत बताएं”—FDA ने जनता से की अपील
छत्तीसगढ़ FDA ने आम नागरिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और मेडिकल स्टोर्स से अपील की है कि अगर उन्हें किसी दवा में—
रंग, गंध, या स्वाद में असामान्यता,
पैकिंग में गड़बड़ी,
या किसी भी प्रकार का संदिग्ध पदार्थ
मिलता है, तो बिना देर किए विभाग को सूचित करें।
हेल्पलाइन नंबर: +91-9340597097
राज्य सरकार का दावा है कि दवा सुरक्षा से जुड़े हर मामले को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी भी स्तर पर जोखिम पैदा न हो और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई तत्काल रोकी जा सके।
दवा सुरक्षा पर देशव्यापी बहस तेज
एक सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है—
“अगर रिपोर्ट में मिलावट या गंभीर प्रदूषण की पुष्टि होती है, तो मामला केवल एक राज्य का नहीं रहेगा। यह राष्ट्रीय स्तर पर दवा-निर्माण प्रक्रियाओं पर सवाल खड़ा करेगा।”
उद्योग जगत भी इस घटना पर कड़ी निगरानी रखे हुए है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश का बद्दी इलाका भारत का प्रमुख दवा निर्माण केंद्र है और यहां के उत्पाद देशभर में सप्लाई होते हैं।
जांच रिपोर्ट आने तक पूरे बैच के नमूनों की निगरानी जारी है।



