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सीयू स्टूडेंट अर्सलान की मौत… परिजन का आरोप हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या, पोस्टमार्टम–डायटम में खुलासा, पुलिस की लापरवाही — 45 दिन बाद भी हत्यारे बेनकाब

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर।
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) के बीएससी फाइनल ईयर के छात्र अर्सलान अंसारी (21) की मौत के मामले परिजनों का कहना है कि उनके बेटे की मौत हादसा नहीं बल्कि हत्या है। यह सब रिपोर्ट में साबित हो चुका है। इसके बाद भी पुलिस इस गंभीर मामले में हत्या का अपराध दर्ज नहीं कर रही है।

पर सवाल है—45 दिन बाद भी हत्या की धारा क्यों नहीं जुड़ी? आखिर किसे बचाया जा रहा है?
इस केस ने छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में उच्च शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा, पुलिस की शुरुआती जांच, और छात्रावास प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हॉस्टल से गायब, तालाब में मिला शव… पर मौत पहले ही हो चुकी थी
21 अक्टूबर की शाम, सीयू हॉस्टल “स्वामी विवेकानंद भवन” से फोन पर बात करते हुए निकला छात्र अर्सलान अचानक गायब हो गया। दो दिन बाद 23 अक्टूबर को हॉस्टल के पीछे स्थित तालाब में उसकी लाश मिली—टी-शर्ट और अंडरवियर में, लोअर गायब।
पुलिस ने तुरंत इसे फिसलकर तालाब में गिरने से मौत बता दिया।
परिवार चीख-चीख कर कहता रहा—“ये हत्या है!”
प्रशासन चुप रहा… और 45 दिन बीत गए।
चोट जो हादसे में नहीं आ सकती थी
चार डॉक्टरों की टीम द्वारा किए गए पोस्टमार्टम ने केस की जड़ हिला दी—
सिर के पिछले हिस्से में भारी ठोस वस्तु से जोरदार वार
अंदरूनी चोट और बाहरी चौकोर लालिमा
मौत का कारण–ब्रेन हेमरेज, न कि डूबना
डॉक्टरों की रिपोर्ट साफ लिखती है—
“मृतक तालाब में गिरने से नहीं मरा, मौत पहले ही हो चुकी थी।”
पुलिस ने रिपोर्ट मानने से इंकार कर दिया। क्वेरी भेजी।
लेकिन तीसरी रिपोर्ट—डायटम टेस्ट—ने डॉक्टरों के निष्कर्ष पर मुहर लगा दी।
डायटम रिपोर्ट: सबसे बड़ा सबूत
अगर कोई जीवित इंसान तालाब में डूबता है, तो तालाब का शैवाल (डायटम) फेफड़ों में जरूर जाता है।
अर्सलान के फेफड़ों में एक भी डायटम नहीं मिला
यानी—
अर्सलान को मारे जाने के बाद पानी में फेंका गया था।
सीन री-क्रिएशन से कहानी पलटने की कोशिश?
13 नवंबर को पुलिस ने फोरेंसिक टीम के साथ सीन री-क्रिएशन करवाया और दावा किया—
“अर्सलान फिसलकर तालाब में गिरा, नीचे पेड़ का मोटा तना था, सिर टकराया, मौत हो गई।”
लेकिन डॉक्टरों की फाइनल रिपोर्ट (28 नवंबर) ने इस थ्योरी को खत्म कर दिया।
चोट पानी में टकराने से नहीं लग सकती थी। ये वार था— हत्या का वार।
7 मिनट में 1.5 किमी? पिता बोले—ये संभव ही नहीं
अर्सलान के पिता, अयूब अंसारी, हजार किलोमीटर दूर बिहार से बिलासपुर पहुंचे और बार-बार एक ही सवाल पूछते रहे—
“मेरा बेटा कमरे का पंखा, लैपटॉप, नाश्ता सब छोड़कर अचानक क्यों गया?”
“सीसीटीवी में दिखाई दूरी वो इतनी जल्दी तय ही नहीं कर सकता।”
“अगर फोन पर बात करते निकला, तो कॉल डिटेल क्यों नहीं दिया जा रहा?”
पुलिस का जवाब—“मोबाइल पानी में खराब हो गया, डेटा रिकवर नहीं हो पाया।”
पर कॉल डिटेल खराब मोबाइल से नहीं, सर्वर से मिलती है।
फिर भी पुलिस के पास कोई जवाब नहीं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कई सवाल — पिता ने 10 अधिकारियों पर FIR की मांग की
अर्सलान के पिता ने लिखित शिकायत में यूनिवर्सिटी के कुलपति से लेकर सुरक्षा प्रभारी तक 10 अधिकारियों को जिम्मेदार बताया।
उनके आरोप—
वार्डन ने समय पर गुमशुदगी की सूचना नहीं दी
हॉस्टल प्रबंधन ने परिवार को कोई सहायता नहीं दी
बेटे के कपड़े अधूरे क्यों थे
मोबाइल की दो सिम में से एक क्यों बंद थी
घटनास्थल पर अब ‘दुर्घटना जन्य क्षेत्र’ क्यों लगाया गया?
“अगर मेरा बेटा सुरक्षित था तो उसे किसने बुलाया? किसने बाहर निकाला? किसने मारा?”
—अयूब अंसारी
45 दिन बाद भी हत्या की धारा गायब — जांच में देरी क्यों?
डॉक्टरों की रिपोर्ट साफ: हत्या
डायटम रिपोर्ट साफ: हत्या
फाइनल रिपोर्ट साफ: हत्या
फिर भी केस में हत्या की धारा नहीं जोड़ी गई।
टीआई का बयान—
“जांच में यदि हत्या पाया गया तो धारा जोड़ी जाएगी।”
एसएसपी का बयान—
“नेचर ऑफ डेथ में हत्या है, अब संबंधित धारा जोड़ी जाएगी।”
पर अभी तक धारा नहीं जुड़ी।
किसके दबाव में जांच अटकी है?
किसे बचाने की कोशिश है?
मां की चीख — “मैंने अपना भविष्य खो दिया”
अर्सलान की मां कौशल यास्मीन ने रोते हुए कहा—
“मेरा बेटा वैज्ञानिक बनना चाहता था। जेईई मेन पास किया था। इतना होनहार था… लेकिन वो घर वापस नहीं आया।”
हजारों छात्रों के सपनों के बीच एक मां की सिसकी गूंजती रही—
“हमें इंसाफ दो… बस इंसाफ दो।”
यह सिर्फ एक छात्र की हत्या नहीं… एक सिस्टम का आइना है
एक छात्र, जिसकी हत्या की पुष्टि तीन-दो रिपोर्टों में हो चुकी है।
एक पुलिस, जो 45 दिन में भी हत्या की धारा नहीं जोड़ सकी।
एक विश्वविद्यालय प्रशासन, जो अपनी जिम्मेदारी से बचता दिख रहा है।
एक परिवार, जो 1000 किलोमीटर दूर से न्याय मांगते हुए दर–दर भटक रहा है।

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