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“जब समाज में लड़की होना ‘गुनाह’ बने… पर वही समाज उसकी सांसों का रक्षक भी बने”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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छत्तीसगढ़ में झोले में मिली नवजात बच्ची… इंसानियत की तत्परता से बचा जीवन, पुलिस जांच में जुटी — बेटी होने पर छोड़ने की बढ़ती घटनाओं ने फिर सवाल खड़े किए


मनेंद्रगढ़ | छत्तीसगढ़
सुबह की शांति, गांव की सामान्य दिनचर्या और सड़क किनारे पड़े एक झोले से आती कमजोर सिसकियां… और फिर उस आवाज़ ने पूरी बस्ती को अपने कदमों पर रोक दिया। जब लोगों ने सावधानी से थैला खोला, तो उसमें लिपटी हुई एक नवजात बच्ची मिली — ठंड से कांपती, आंखें बंद किए, जैसे दुनिया में आने के पहले ही उसका स्वागत नहीं बल्कि त्याग लिखा गया हो।
लेकिन किस्मत केवल त्याग की कहानी नहीं लिख रही थी — बल्कि इंसानियत की भी।
उसी वक्त ग्राम पंचायत चनवारीडांड के सरपंच सोनू किन्नर सहित ग्रामीणों ने बच्ची को उठाया, गर्म कपड़ों में लपेटा और बिना कोई सवाल, बिना कोई सोच अस्पताल की ओर भाग पड़े। बच्चे की धड़कनें धीमी थीं, शरीर नाजुक और सांसें कमजोर। डॉक्टरों ने समय रहते उपचार किया और अब बच्ची सुरक्षित है।
वीडियो वायरल के बाद प्रशासन सक्रिय — पुलिस ने की जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही मनेंद्रगढ़ पुलिस अस्पताल पहुँची और आसपास के क्षेत्र में जांच शुरू की। पुलिस उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने बच्ची को सड़क किनारे छोड़ दिया।
यह पहली घटना नहीं — समाज की सोच पर बड़ा सवाल
पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में इसी तरह नवजात बच्चियों को त्यागने की तीन घटनाएँ सामने आईं —
भिलाई में खंडहर की सीढ़ियों पर बच्ची मिली
जामुल क्षेत्र में ठंड से कांपती बच्ची बरामद हुई
अब मनेंद्रगढ़ में झोले में मिलती जिंदगी
इन घटनाओं ने सोचने पर मजबूर किया — क्या आज भी बेटी होना अपराध माना जा रहा है?
1: बेटी और सामाजिक मानसिकता
तथ्यस्थितिदेश में अभी भी बेटियों को जन्म के बाद छोड़ने की घटनाएं सामने आती हैं✔आर्थिक बोझ, सामाजिक दबाव और लिंगभेद इसके प्रमुख कारण✔जागरूकता और सरकारी योजनाओं के बावजूद मानसिकता में बदलाव धीमा✔
2: छत्तीसगढ़ में पिछले 2 वर्षों में मिले परित्यक्त नवजात
वर्षबरामद नवजातउनमें से लड़किया 2025 (अब तक)96
(स्थानीय रिपोर्ट्स के आधार पर संकलित)
3: गोद लेने की प्रक्रिया
पात्र दंपत्ति जिला प्रशासन को आवेदन दे सकते हैं
बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और बाल कल्याण समिति की मंजूरी आवश्यक
पहचान गुप्त रखी जाती है
न्यायालय अंतिम स्वीकृति देता है
घटना के बाद उम्मीदें — कई लोगों ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्ची की खबर वायरल होने के बाद कई लोग अस्पताल पहुँचे और उसे गोद लेने की इच्छा जताई।
सोशल मीडिया में बहस — “किसी की गलती का दंड यह मासूम क्यों?”
लोग लगातार यह सवाल उठा रहे हैं—
“क्यों लड़की होने पर उसे ठुकरा दिया जाता है?”
“क्यों बेटी जन्मते ही बोझ कहलाती है?”
जांच जारी — पुलिस टीम माता-पिता की तलाश में
पुलिस CCTV फुटेज, अस्पताल रिकॉर्ड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पूछताछ कर रही है।

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