बिलासपुर ,रायपुर।
देश की शिक्षा व्यवस्था पहले ही बोर्ड, पैटर्न, सिलेबस और रिफॉर्म्स के बोझ में दबी थी, अब उसमें एक नया अध्याय जुड़ गया है—‘डॉग मैनेजमेंट सिस्टम’। छत्तीसगढ़ में अब स्कूलों में गणित, विज्ञान और भाषा के साथ–साथ एक नई जिम्मेदारी तय हुई है—आवारा कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा।
रायपुर से जारी ताजा व्यवस्था ने स्कूलों को पढ़ाई का मंदिर कम और संकट प्रबंधन केंद्र ज्यादा बना दिया है। अब हर स्कूल में ‘डॉग कंट्रोल नोडल अधिकारी’ भी होगा। यह वह पद है जिसकी कल्पना भारतीय शिक्षा प्रणाली के इतिहास में शायद ही कभी किसी ने की हो — न शिक्षक ट्रेनिंग में, न शिक्षा नीति में और न ही राष्ट्र निर्माण के सपनों में।

देश में जहां एक ओर शिक्षा गुणवत्ता, रिसोर्सेज, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचरों की कमी जैसे मुद्दे बहस में होते हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूल अब रोज सुबह यह भी जांचेंगे कि छात्रों के साथ क्लासरूम में पेंसिल, कॉपी और पानी की बोतल है या फिर कुत्ता।
स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि परिसर में घूमने वाले कुत्तों की रिपोर्ट स्थानीय पंचायतों और निगमों को दी जाए — मानो किसी आतंकवादी नेटवर्क का अलर्ट जारी हो। बीच-बीच में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि अगर कोई बच्चा घायल होता है तो तुरंत अस्पताल ले जाया जाए, क्योंकि यह अब प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
बच्चे, अभिभावक और शिक्षक अब इस नई व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाने में लगे हैं। देश की बाकी शिक्षा प्रणालियां शायद STEM और AI आधारित लर्निंग की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन यहां शिक्षण कैलेंडर में अब “Stray Dog Awareness & Reporting Schedule” भी फिट हो चुका है।
पुराने जमाने के स्कूलों में पीटी मास्टर छात्रों को खेल सिखाते थे, अब शायद अगली जनरेशन सीखेगी—
“अगर मैदान में कुत्ता हो, तो कैसे शांतिपूर्वक एग्ज़िट लें।”
शिक्षा के इस नए अध्याय में सीख सिर्फ किताबों से नहीं मिल रही—कभी-कभी कुत्तों से भी मिल रही है।
क्या है आदेश
सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने राज्य के सभी शिक्षा संभाग संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन, पशुधन विकास विभाग के संदर्भित पत्र के आधार पर तत्काल प्रभाव से लागू की जा रही है।
जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में प्राचार्य या संस्था प्रमुख को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे स्कूल परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विचरण करने वाले आवारा कुत्तों की सूचना संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग कैचर नोडल अधिकारी को समय पर उपलब्ध कराएँ। साथ ही विद्यालयों में कुत्तों के प्रवेश को रोकने हेतु आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षण व्यवस्था बाधित न हो।
किसी बच्चे को आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की स्थिति में निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित बच्चे को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में उपचार हेतु ले जाया जाए, जिससे समय पर प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध हो सके। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि उपरोक्त सभी बिंदुओं का शाला स्तर पर पूर्ण रूप से पालन हो, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं विद्यालय का वातावरण सुरक्षित और अनुकूल बना रहे।



