मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर रायपुर।
छत्तीसगढ़ इस समय धान खरीदी के सबसे संवेदनशील और निर्णायक दौर से गुजर रहा है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही राज्य का पूरा प्रशासनिक ढांचा शून्य–त्रुटि नीति पर काम कर रहा है। टोकन प्रणाली, अवैध धान की रोकथाम, किसानों को सुविधा और केंद्रों की लगातार मॉनिटरिंग — इन सभी मोर्चों पर सरकार फुल एक्शन मोड में दिखाई दे रही है।
लेकिन इस बीच बिलासपुर जिले में आंदोलनकारियों के पंडाल हटाए जाने की घटना ने राजनीतिक तापमान भी अचानक बढ़ा दिया है। किसानों की निगरानी, खरीदी की पारदर्शिता और आंदोलन के बीच बनते दबाव की यह जमीनी तस्वीर अब नेशनल लेवल पर भी चर्चा का केंद्र बन गई है।






धान खरीदी पर प्रशासन की ‘मैक्रो मॉनिटरिंग’ — सचिव अवनीश शरण का धान केंद्रों में मैराथन निरीक्षण
छत्तीसगढ़ सरकार के लिए इस साल की धान खरीदी सिर्फ एक नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। प्रभारी सचिव अवनीश शरण ने बलरामपुर, रामानुजगंज और वाड्रफनगर क्षेत्र में कई उपार्जन केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर खरीदी की पूरी जमीनी तस्वीर खुद परखी।
उन्होंने नमी मापक यंत्र, स्टैंसिल, तौल मशीन, सुरक्षा, शेड, बारदाना, स्टैकिंग, बिजली, पानी जैसी व्यवस्थाओं को विस्तार से जांचा और किसानों से सीधी बातचीत कर वास्तविक स्थिति जानी।
किसानों ने बताया कि इस वर्ष टोकन प्रणाली और व्यवस्थाओं में पहले की तुलना में काफी सुधार है।
‘टोकन तुहर हाथ ऐप’ बना किसानों का संकटमोचक — भीड़ खत्म, धान खरीदी तेज
घर बैठे मोबाइल से टोकन — इस डिजिटल सिस्टम ने धान खरीदी के समीकरण बदल दिए हैं।
किसानों ने माना कि अब उन्हें न लाइन में लगना पड़ रहा है, न भीड़ में धान ढोना।
यह तकनीक इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरी है। जिले के 129 केंद्रों पर खरीदी शांतिपूर्वक चल रही है और किसान 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य को ऐतिहासिक लाभकारी फैसला बता रहे हैं।
सीमा पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस मोड’ — जशपुर में अवैध धान को रोकने रातभर चलती रहीं चेकिंग टीमें
अवैध धान की आवाजाही पर रोक के लिए प्रशासन रात में चेकपोस्टों पर तैनात रहा।
झारखंड सीमा से लगे क्षेत्रों में तहसीलदार से लेकर फूड इंस्पेक्टर तक की टीमों ने वाहनों, रिकॉर्ड और मूवमेंट की लगातार जांच की।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान का अवैध परिवहन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कृषि उत्पादन आयुक्त सहला निगार का ‘ग्राउंड ऑडिट’ — कंप्यूटर पर बैठकर खुद काटा टोकन
किसान हितों की सबसे व्यापक मॉनिटरिंग तब देखने मिली जब कृषि उत्पादन आयुक्त सहला निगार स्वयं बेमेतराकेंद्रों के निरीक्षण में निकल गईं।
उन्होंने सिर्फ व्यवस्थाएँ नहीं देखीं—
बल्कि कार्यालय में जाकर कंप्यूटर पर लॉगिन कर स्वयं टोकन कटिंग प्रॉसेस की जांच की।
तौल, स्टैकिंग से लेकर बारदानों की संख्या तक हर बिंदु पर उन्होंने कठोर समीक्षा की।
उनका संदेश साफ था—
“किसान सालभर मेहनत करता है, खरीदी में उसकी इज्जत और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
बिलासपुर में आंदोलनकारी पंडाल हटाए जाने का मामला बना दिन का सबसे बड़ा मुद्दा
धान खरीदी के बीच बिलासपुर जिले में आंदोलनकारियों के पंडाल हटाए जाने से हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए।
स्थानीय प्रशासन ने इसे सड़क अवरोध और खरीदी व्यवस्था प्रभावित होने के खतरे से जोड़कर हटाया, जबकि आंदोलनकारियों ने इसे अपनी आवाज दबाने की कार्रवाई बताया।
घटना ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या धान खरीदी के peak सीजन में प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता से काम कर रहा है या फिर विरोध की आवाजें दबाई जा रही हैं?
यह सवाल अब राज्य की राजनीति में नया तनाव पैदा कर रहा है।
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था — इस बार सिर्फ खरीदी नहीं, प्रशासन की ‘फील्ड परीक्षा’
राज्यभर में निरीक्षणों, ऐप आधारित प्रबंधन, कड़ी सीमा चौकसी और बिलासपुर में उखड़े आंदोलन पंडाल — ये सभी घटनाएं संकेत देती हैं कि इस वर्ष धान खरीदी सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सिस्टम वाइड स्ट्रेस टेस्ट बन चुकी है।
किसानों के भरोसे, सरकार की प्रतिबद्धता और जमीनी चुनौतियों के बीच छत्तीसगढ़ की धान खरीदी अब तक की सबसे हाई-विजिबिलिटी प्रक्रिया बन चुकी है।



