


अखिल भारतीय अग्रवाल महासम्मेलन के रक्तदान शिविर में समाज की सीमाएं टूटीं, जरूरतमंदों के लिए आगे आए युवा; ‘रक्तदान-महादान-जीवनदान’ का संकल्प
बिलासपुर।
जब किसी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीज के लिए रक्त की जरूरत होती है, तब खून का कोई धर्म, जाति या समाज नहीं होता। वहां सिर्फ एक पहचान मायने रखती है—इंसानियत। इसी भावना को जमीन पर उतारते हुए बिलासपुर में सर्व समाज के युवाओं ने रक्तदान कर मानव सेवा की ऐसी मिसाल पेश की, जो सामाजिक एकता का मजबूत संदेश देती है।
अखिल भारतीय अग्रवाल महासम्मेलन की छत्तीसगढ़ इकाई, बिलासपुर की ओर से बुधवार को गुजराती समाज भवन, टिकरापारा में ‘सर्व समाज रक्तदान शिविर’ आयोजित किया गया। शिविर में अलग-अलग समाजों के युवाओं और नागरिकों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। रक्तदान को लेकर युवाओं में खासा उत्साह नजर आया।
इस पहल का संदेश स्पष्ट था—एक व्यक्ति का रक्तदान किसी अनजान इंसान के जीवन की उम्मीद बन सकता है।
जहां पहचान सिर्फ ‘रक्तदाता’ की थी
शिविर की सबसे खास बात यह रही कि यहां सामाजिक पहचान पीछे छूट गई और मानवता सबसे आगे रही। अलग-अलग समाजों से जुड़े युवा और नागरिक एक ही उद्देश्य के साथ रक्तदान केंद्र तक पहुंचे—किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में अपना योगदान देना।
आयोजकों ने कहा कि रक्तदान किसी एक समाज की सेवा नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता की सेवा है। जरूरत के समय रक्त की आवश्यकता किसी को भी पड़ सकती है। ऐसे में सर्व समाज की भागीदारी वाला यह अभियान सामाजिक एकजुटता का सकारात्मक उदाहरण है।
अतिथियों ने बढ़ाया रक्तदाताओं का हौसला
शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि समाजसेविका पूजा विधानी और अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राम अवतार अग्रवाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
अतिथियों ने रक्तदाताओं से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया और सर्व समाज को साथ लेकर किए जा रहे इस सेवा कार्य की सराहना की। उन्होंने रक्तदान को मानव जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों को ऐसे सेवा अभियानों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं ने संभाली मानव सेवा की कमान
शिविर में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में युवा स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आगे आए। आयोजकों का मानना है कि युवा शक्ति को सामाजिक सेवा से जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
रक्तदान करने वाले युवाओं ने यह संदेश दिया कि सोशल मीडिया और व्यक्तिगत व्यस्तताओं के दौर में भी नई पीढ़ी जरूरतमंदों के लिए समय और अपना रक्त देने को तैयार है।
‘एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी बचा सकता है’
अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन छत्तीसगढ़ इकाई यूथ के सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। किसी व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान जरूरतमंद के लिए जीवन की उम्मीद बन सकता है।
उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य सिर्फ रक्त एकत्र करना नहीं, बल्कि सर्व समाज को मानव सेवा के लिए एक मंच पर लाना और युवाओं में नियमित रक्तदान की संस्कृति विकसित करना है।
दीपक अग्रवाल ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी यह बताती है कि नई पीढ़ी सामाजिक जिम्मेदारी को समझती है और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने का जज्बा रखती है।
रक्त की एक बोतल नहीं, रिश्तों की एक डोर जुड़ी
आयोजकों के मुताबिक रक्तदान का महत्व केवल चिकित्सा जरूरत तक सीमित नहीं है। यह समाज में संवेदना, सहयोग और परस्पर विश्वास की भावना को भी मजबूत करता है।
किसी अनजान व्यक्ति के लिए रक्तदान करने वाला व्यक्ति उसे जानता तक नहीं होता, फिर भी अपनी जिंदगी का एक हिस्सा उसके जीवन के लिए दे देता है। यही रक्तदान को मानवता का सबसे सहज और प्रभावी रूप बनाता है।
बिलासपुर से निकला बड़ा सामाजिक संदेश
सर्व समाज रक्तदान शिविर ने यह संदेश दिया कि सामाजिक सेवा की कोई सीमा नहीं होती। न जाति की, न वर्ग की और न ही किसी संगठन की।
जब समाज के अलग-अलग वर्ग किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए एक साथ खड़े होते हैं, तब सिर्फ रक्त का संचार नहीं होता, बल्कि मानवता का रिश्ता भी मजबूत होता है।
अखिल भारतीय अग्रवाल महासम्मेलन छत्तीसगढ़ इकाई ने शिविर को सफल बनाने वाले सभी रक्तदाताओं, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा स्वस्थ लोगों से नियमित रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की।
इन रक्तदाताओं ने बढ़ाया सेवा का कारवां
शिविर में रक्तदान करने वालों में रिशभ शर्मा, संचालक कैलाश मिल एंड हार्डवेयर स्टोर, गांधी चौक तथा बाला ठाकुर, चिंगराजपारा, सरकंडा सहित अन्य युवाओं और नागरिकों ने सहभागिता की।



