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धान खरीदी में अधिकारियों की भर्राशाही, टोकन ठप, समितियों में ताले—बिलासपुर में फूटा किसानों का गुस्सा, जिला व सहकारी बैंक की लापरवाही ने संकट को विस्फोटक बनाया, भड़का रहे आंदोलन की चिंगारी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर/रायपुर।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होते ही हालत काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। प्रशासन की तैयारियों और ज़मीनी सच्चाई के बीच की खाई अब इतनी चौड़ी हो चुकी है कि किसानों का धैर्य टूटने के कगार पर पहुंच गया है।
बिलासपुर में ऑनलाइन टोकन कटने में फेल सिस्टम, समितियों की हड़ताल, केंद्रों में ताले, और जिला एवं सहकारी केंद्रीय बैंक अधिकारियों की भारी लापरवाही ने हालात को ऐसा मोड़ दे दिया है, जिसे किसान संगठन “आंदोलन की पूर्व भूमिका” बता रहे हैं।
भारतीय किसान संघ ने कलेक्टर से शिकायत कर साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन छिड़ सकता है। संघ अध्यक्ष माधो सिंह ने स्थिति को “जमीनी अव्यवस्था का चरम” बताया है।


टोकन नहीं कट रहे—समितियों में ताले, किसान सुबह से भटक रहे
समितियों के कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने धान खरीदी की रीढ़ ही तोड़ दी है।
किसान सुबह से समितियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन—
ऑनलाइन टोकन नहीं कट रहा, सिस्टम बार-बार फेल।
कर्मचारी अनुपस्थित, सूचना शून्य।
पंजीयन लंबित, किसान असमंजस में।
खरीदी की तारीख को लेकर संशय।
पिछले साल की अव्यवस्था के बाद किसान इस बार सतर्क थे, लेकिन हड़ताल और व्यवस्थाओं की दुर्गति ने हालात को फिर पटरी से उतार दिया।
“तैयारी पूरी” का सरकारी दावा, लेकिन जमीनी तस्वीर उलटी—संगठन ने सभी जिलों में ज्ञापन सौंपा
भारतीय किसान संघ ने चार बड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए—
1. टोकन वितरण फॉर्मूला
भूमि आकार के आधार पर टोकन—2 एकड़ तक 2 टोकन, 10 एकड़ तक 3 टोकन और बड़ी जमीन वाले किसानों को 4 टोकन।
2. प्री-स्टैक तकनीकी समस्या
बार-बार सिस्टम फेल होने से कई किसानों का पंजीयन अटका हुआ है। संगठन ने मांग की है कि पंजीयन को 31 जनवरी तक बढ़ाया जाए
3. तौल नियम
40 किलो 700 ग्राम से अधिक वजन न रखा जाए और नियम समितियों में स्पष्ट रूप से चस्पा हों।
4. भुगतान प्रणाली
किसानों ने मांग की है कि बैंक मनमानी राशि न कटे और भुगतान सीमा तय न की जाए।
संघ ने कहा है कि इन समस्याओं के समाधान न होने पर नुकसान भारी होगा और हालात किसी बड़े उभार की ओर बढ़ सकते हैं।
खरीदी का पहला दिन ‘सूना’, दूसरा दिन भी अधूरा—140 में से सिर्फ 7 केंद्रों में खरीदी
बिलासपुर में खरीदी की स्थिति बेहद सीमित रही—
पहले दिन समितियों में ताले, किसान नदारद, सिर्फ सेंदरी में 90 क्विंटल की औपचारिक खरीदी।
दूसरे दिन 140 केंद्रों में से 28 खोले गए, लेकिन वास्तविक खरीदी सिर्फ 7 केंद्रों में
कुल खरीदी — 1333 क्विंटल
कड़ार, गनियारी, जैतपुर, जयरामनगर, मल्हार, मानिकचौरी और सेंदरी में ही खरीद हो सकी।
प्रभारी सचिव पिंगुआ का निरीक्षण—चेतना, कड़ार और बोदरी केंद्रों पर मिली सुस्ती
मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने दौरा कर हालात देखे और तेजी लाने को कहा।
परंतु मौके पर मिली स्थिति ने संकेत दिया कि प्रशासनिक मशीनरी पर हड़ताल का असर सीधे-सीधे खरीदी पर पड़ रहा है।
धमाके की जड़—जिला एवं सहकारी केंद्रीय बैंक अधिकारियों की लापरवाही ने किसानों का भरोसा तोड़ा
बिलासपुर में इस बार संकट की असली चिंगारी जिला एवं सहकारी केंद्रीय बैंक से निकली बताई जा रही है।
कई समितियों में—
टोकन न कटने के पीछे सर्वर–कम्युनिकेशन का गंभीर संकट
भुगतान को लेकर उलझन
ऑपरेटर–कर्मचारियों की हड़ताल
रिकॉर्ड, पंजीयन और प्री-स्टैकिंग का डाटा अटका
किसानों का आरोप है कि यह सब जिला एवं सहकारी केंद्रीय बैंक के अफसरों की भारी लापरवाही का परिणाम है।
किसानों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार इतनी “व्यवस्थागत गिरावट” देखने मिली है।
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि संघ पदाधिकारियों ने इशारा दिया—
“छत्तीसगढ़ में भी हरियाणा–पंजाब की तरह बड़ा किसान आंदोलन खड़ा हो सकता है।”
अव्यवस्था, हड़ताल और प्रशासनिक सुस्ती ने राज्य की धान खरीदी को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुद्दा बना दिया है।

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