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शेख हसीना को फांसी की सजा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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राजनीतिक भूकंप: शेख हसीना को मानवता अपराधों में दोषी कर फांसी की सजा

बांग्लादेश ट्रिब्यूनल ने उन्हें छात्र-आंदोलन दमन में “मास्टरमाइंड” करार दिया; भारत में उनकी स्थिति और प्रत्यर्पण की गहन बहस शुरू


ढाका। बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल-1 ने 17 नवंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराया है और फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें “मास्टरमाइंड” करार देते हुए कहा कि उन्होंने छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने, गोलीबारी और दमन के आदेश दिए थे।


ट्रिब्यूनल की तीन-न्यायाधीशों वाली बेंच ने विस्तृत फैसलें में यह पाया कि हसीना और अन्य शीर्ष नेताओं ने आवाज उठाने वालों को रोकने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और घातक हथियारों के उपयोग का समर्थन किया। अदालत के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की हत्या “व्यवस्थित और सुनियोजित” थी और उन्हें राजनीति के उद्देश्य से दबाने की योजना बनाई गई थी।


अभियोगी पक्ष के अनुसार, इस दमन में लगभग 1,400 लोगों की जान गई। ट्रिब्यूनल में पेश किए गए सबूतों में फोन कॉल रिकॉर्डिंग, गवाहों की कथन, वीडियो क्लिप और अन्य दस्तावेज़ शामिल थे, जो यह दर्शाते हैं कि हसीना ने सक्रिय रूप से हिंसा को निर्देशित किया था।


हसीना के अलावा, ट्रिब्यूनल ने पूर्व गृह मंत्री असदुझ्जमान खान कमाल को भी फांसी की सजा सुनाई है। वहीं, पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन को पाँच साल की जेल दी गई है। उन्हें ट्रायल में गवाह का दर्जा मिला था।


शेख हसीना ने फैसले को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और “अनैतिक न्याय प्रक्रिया” करार दिया है। वे वर्तमान में भारत में हैं और उन्होंने कहा है कि उन्हें देश लौटने या प्रत्यर्पित करने का मामला अब भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय मसला बन गया है।


फैसले की घोषणा से पहले ढाका की सड़कों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। राजधानी में सेना और पुलिस तैनात किए गए, और कई इलाकों में आवाजाही पर पाबंदियाँ थीं। हसीना समर्थकों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध कहा, जबकि सरकार ने इसे “न्याय की ताजगी” का संकेत बताया है।


यह मुकदमा 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र-आंदोलन (जुलाई विद्रोह) से जुड़ा है, जिसने हसीना की सत्ता को हिला दिया था। उस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसा फैली, और बाद में ट्रिब्यूनल ने इसे गंभीर अधिकार उल्लंघन और मानवाधिकार अपराधों में तब्दील कर दिया।

  • शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराया गया।
  • ट्रिब्यूनल ने उन्हें “मास्टरमाइंड” कहा।
  • फांसी की सजा सुनाई गई।
  • लगभग 1,400 लोगों की मौत का आरोप।
  • अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी सजा मिली है।
  • हसीना ने फैसला राजनीति-प्रेरित करार दिया।
  • भारत में उनकी स्थिति प्रत्यर्पण बहस को जन्म दे रही है।

“ट्रिब्यूनल के सबूत”

  • फोन कॉल और वॉइस रिकॉर्डिंग
  • वीडियो फुटेज
  • गवाहों का बयान
  • सरकारी आदेशों और रिपोर्टों का विश्लेषण

“जो आगे हो सकता है”

  • हसीना की अपील या रहम की दलीलें
  • भारत-बांग्लादेश में प्रत्यर्पण पर कूटनीतिक गतिरोध
  • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
  • भविष्य में ट्रिब्यूनल की साख और अन्य राजनेताओं पर पड़ने वाला

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