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NEET-PG काउंसलिंग में बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ सरकार ने किए अहम संशोधन, ऑनलाइन प्रक्रिया और डोमिसाइल प्रायोरिटी से मेडिकल एडमिशन सिस्टम में बड़ा सुधार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता बढ़ाने और NEET-PG प्रक्रियाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मेडिकल PG प्रवेश नियमों में बड़ा सुधार किया है। नए “MD/MS Admission Rules–2025” के तहत काउंसलिंग पूरी तरह ऑनलाइन, मल्टी-राउंड सिस्टम पर आधारित होगी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से पास हुए छात्रों को डोमिसाइल प्राथमिकता दी जाएगी। ये कदम देशभर में मेडिकल एडमिशन सुधारों की श्रृंखला में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मेडिकल स्नातकोत्तर (MD/MS) प्रवेश प्रक्रिया में व्यापक संशोधन करते हुए “Admission Rules–2025” लागू कर दिए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य राज्य में NEET-PG के तहत होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, कुशल और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप बनाना है।
अब काउंसलिंग होगी 100% ऑनलाइन, चार चरणों में
नई नियमावली के तहत काउंसलिंग प्रक्रिया चार चरणों—
प्रथम राउंड
द्वितीय राउंड
मॉप-अप राउंड
स्ट्रे वैकेंसी राउंड
—में होगी।
जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि से पहले अतिरिक्त राउंड भी संचालित किए जा सकेंगे।
सभी चरणों में अभ्यर्थियों को पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिससे मिस्ड-ऑपर्च्युनिटी की समस्या खत्म होगी।
राज्य विश्वविद्यालय से पास छात्रों को “Institutional Domicile Priority”
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप अब छत्तीसगढ़ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों को प्राथमिकता मिलेगी।
इस कदम को स्थानीय मेडिकल इकोसिस्टम को मजबूती देने और डॉक्टर रिटेंशन रेट बढ़ाने की पहल माना जा रहा है।
सेवा अवधि की गिनती अब NEET-PG परीक्षा तिथि तक
सेवारत अभ्यर्थियों के लिए सेवा अवधि की गणना पहले 31 जनवरी तक होती थी, जिसे अब बढ़ाकर सीधे NEET-PG परीक्षा तिथि तक कर दिया गया है।
इससे हजारों इन-सर्विस डॉक्टर्स को सीधा लाभ मिलेगा।
EWS सीटें अब खाली नहीं रहेंगी
EWS कैटेगरी में यदि योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध न हों, तो सीटें सीधे अनारक्षित कैटेगरी में ट्रांसफर कर दी जाएंगी।
इस नियम से सीटें रिक्त रहने की समस्या समाप्त होगी।
“डबल अलॉटमेंट” पर रोक—सीटें ब्लॉक करने की प्रवृत्ति खत्म
नए नियमों के अनुसार—
किसी अभ्यर्थी को एक बार किसी कॉलेज में तय विषय अलॉट हो जाने के बाद
उसी कॉलेज में पुनः वही विषय अलॉट नहीं किया जाएगा।
यह संशोधन सीट ब्लॉकिंग की समस्या को खत्म करेगा और वास्तविक छात्रों को अवसर देगा।
सीट छोड़ने पर सिक्योरिटी डिपॉज़िट जब्त
द्वितीय व आगे के राउंड में सीट लेने के बाद यदि अभ्यर्थी प्रवेश नहीं लेते हैं, तो उनकी सुरक्षा राशि सीधे जब्त कर ली जाएगी।
यह प्रावधान काउंसलिंग की शुचिता और सीट उपयोगिता को बढ़ाने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।
सरकार का दावा: प्रक्रिया होगी ज्यादा न्यायसंगत और पारदर्शी
चिकित्सा शिक्षा विभाग का कहना है कि इन व्यापक सुधारों से—
काउंसलिंग सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा
सीटें खाली कम रहेंगी
स्थानीय छात्रों को उचित अवसर मिलेगा
राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रक्रियाएँ सुव्यवस्थित होंगी
विशेष सचिव, डायरेक्टरेट अधिकारी और विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह नियम औपचारिक रूप से लागू किए गए।

मेडिकल PG प्रवेश प्रक्रियाओं में सुधार की लगातार जरूरत महसूस की जाती रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के ये संशोधन उन राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकते हैं, जहां काउंसलिंग में पारदर्शिता, सीट ब्लॉकिंग और रिक्त सीटों की चुनौती बनी रहती है।
ये बदलाव राष्ट्रीय मेडिकल शिक्षा ढांचे में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखे जा रहे हैं।

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