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हड़ताल से हिली धान खरीदी, बिलासपुर में सरकार की वैकल्पिक तैयारियां सवालों के घेरे में बिना अनुभव वाले नए ऑपरेटर ऑनलाइन खरीदी कैसे संभालेंगे? जिला सहकारी बैंक के सीईओ और विपणन अधिकारी की विफलताओं पर उठा तूफ़ान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर में धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सरकारी सिस्टम बुरी तरह लड़खड़ा गया है। 11 दिन से हड़ताली सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों की गैरहाज़िरी ने खरीदी प्रक्रिया को अधर में लटका दिया है। इसी बीच सरकार ने बिना अनुभव वाले विभागीय कर्मचारियों को अचानक उपार्जन केंद्रों पर बैठाकर वैकल्पिक व्यवस्था का ढोल पीटना शुरू कर दिया है—पर बड़ा सवाल यह है कि क्या ये नए कर्मचारी ऑनलाइन धान खरीदी जैसे जटिल और हाई-टेक सिस्टम को संभाल भी पाएंगे? जिला सहकारी बैंक के सीईओ से लेकर विपणन अधिकारी तक—पूरी तैयारी की पोल खुल रही है और किसानों का धैर्य टूटने लगा है।

बिलासपुर, 13 नवंबर 2025।
धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन बिलासपुर में सिस्टम की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। 11 दिनों से सहकारी समिति कर्मचारी और खरीदी ऑपरेटर हड़ताल पर हैं, जिनके बिना धान खरीदी की प्रक्रिया चल पाना लगभग असंभव है। इसके बावजूद सरकार वैकल्पिक कर्मचारियों के भरोसे खरीदी शुरू कराने की जिद पर अड़ी है—और इसी फैसले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था या औपचारिक दिखावा?
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने राजस्व, कृषि, खाद्य और सहकारिता विभाग के कर्मचारियों को धान खरीदी प्रभारी बनाकर ट्रेनिंग दी है।
प्रशासन का दावा—
“140 केंद्र तैयार हैं, नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है।”
लेकिन ज़मीनी सवाल इससे कहीं बड़े हैं—
क्या कुछ घंटों में प्रशिक्षित कर्मचारी यह समझ पाएंगे कि ऑनलाइन पोर्टल, किसान पंजीयन, तौल-पर्ची, गुणवत्ता ग्रेडिंग और भुगतान मैपिंग कैसे चलती है?
यह काम अनुभव मांगता है, न कि केवल निर्देश।
ऑनलाइन धान खरीदी—नए कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल है।
इसीलिए विशेषज्ञों के अनुसार—
सिस्टम लॉगिन
किसान कोड मिलान
QR आधारित टोकन
वजन-अनुमोदन
ऑनलाइन पेमेंट फ़ॉरवर्डिंग
एक दिन में सीखी जाने वाली प्रक्रियाएं नहीं हैं।
अगर नए कर्मचारी तकनीकी प्रक्रिया में उलझे तो इसका सीधा नुकसान किसानों को होगा।
कांग्रेस का आरोप है:
“सरकार जल्दबाजी में किसानों के सिर ऑनलाइन अव्यवस्था का पहाड़ डाल रही है।”


विधायक अटल श्रीवास्तव का सीधा वार: सरकार खरीदी को फेल करना चाहती है
धरना स्थल पर पहुंचे कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव का बयान सरकार पर सीधे निशाना साधता है—
“ऑपरेटर और प्रबंधक धान खरीदी की रीढ़ हैं। इन्हें नज़रअंदाज़ कर सरकार वैकल्पिक व्यवस्था की धमकी दे रही है। असलियत यह है कि सरकार धान खरीदी को फेल करना चाहती है ताकि किसान परेशान हों और आंदोलन कमजोर पड़े।”
उन्होंने यह भी कहा—
“कर्मचारियों की मांगें जायज हैं। समय रहते न माना गया तो कांग्रेस सड़कों पर संघर्ष करेगी।”
जिला सहकारी बैंक के सीईओ और विपणन अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल
धरना स्थल पर कर्मचारियों ने स्पष्ट आरोप लगाए—
जिला सहकारी बैंक भुगतान प्रक्रिया समय पर नहीं कर पा रहा
विपणन (मार्केटिंग) अधिकारी की निगरानी बेहद कमजोर
बारदाना उपलब्धता और लॉजिस्टिक में भारी खामियां
केंद्रों की भौतिक तैयारियों में लापरवाही
इन कमियों ने स्पष्ट कर दिया है कि समस्या केवल हड़ताल नहीं, बल्कि प्रशासनिक असमर्थता भी है।
भूपेश बघेल सरकार बनाम वर्तमान सरकार—कर्मचारियों की तुलना
पूर्व जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष प्रमोद नायक ने कहा—
“पूर्व सरकार ने ऑपरेटरों को 12 महीने वेतन दिया। मौजूदा सरकार ने इसे घटाकर 6 कर दिया। यह सीधा हमला है किसानों और समितियों पर।”
उन्होंने यह भी कहा—
“सुखद (स्टोरेज शॉर्टेज) की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती है। इसे कर्मचारियों पर डालना अन्याय है।”
15 नवंबर से खरीदी का दावा, पर क्या सिस्टम तैयार है?
कागजों में तैयारियां पूरी बताई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है—
तकनीकी रूप से अप्रशिक्षित नए कर्मचारी
हड़ताल पर अनुभवी स्टाफ
विपणन अधिकारी की ढीली मॉनिटरिंग
जिला सहकारी बैंक की भुगतान प्रक्रिया पर सवाल
बारदाना और लिफ्टिंग व्यवस्था अधूरी
इन स्थितियों में खरीदी सुचारू चलेगी—इस पर किसानों ने खुद भी संदेह जताना शुरू कर दिया है।
चिंतित है किसान
बिलासपुर में सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था धान खरीदी नहीं बचा रही—बल्कि किसानों को असुरक्षा और अव्यवस्था की ओर धकेल रही है। ऑनलाइन खरीदी बिना अनुभवी ऑपरेटरों के चलना लगभग असंभव है, और जिला सहकारी बैंक व विपणन अधिकारी की लापरवाही ने संकट को और गहरा कर दिया है।

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