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Railway Exclusive: दो दशक से लटकी मांगें —80,000 से अधिक ट्रेन मैनेजरों की दुर्दशा पर फूटा गुस्सा, ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से की कड़ी अपील

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर। भारतीय रेलवे के ट्रेन मैनेजरों (गार्ड्स) का धैर्य अब जवाब दे चुका है। देशभर के गार्ड्स की शीर्ष संस्था ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल (AIGC) ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के समक्ष लंबित मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए चेताया है कि दो दशक से अनदेखी झेल रहे ये कर्मचारी अब हताशा की कगार पर हैं। काउंसिल ने अपनी “प्रेस विज्ञप्ति” में कहा है कि बार-बार की गई अपीलों और प्रतिनिधियों के बावजूद, उनकी समस्याएं जस की तस हैं, जिससे न केवल मनोबल टूट रहा है, बल्कि ट्रेन संचालन की सुरक्षा और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
AIGC का बड़ा आरोप — 20 साल से फाइलों में दबे हैं फैसले
काउंसिल ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से ट्रेन मैनेजरों से जुड़े कई मुद्दे मंत्रालयों में अटके हुए हैं। बार-बार की याद दिलाने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए। इससे हजारों गार्ड्स को आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। काउंसिल ने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार इस वर्ग की आवाज सुने और उनकी मांगों पर न्यायपूर्ण निर्णय दे।
मुख्य मांगें और मुद्दे जिन पर तुरंत निर्णय की अपील
8वें वेतन आयोग (8th CPC) का तत्काल क्रियान्वयन
AIGC ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग की कार्यसीमा घोषित की थी, लेकिन इसके लिए आवश्यक स्टाफ, ऑफिस और प्रारंभिक प्रक्रिया की कोई ठोस रूपरेखा नहीं बनी। काउंसिल ने मांग की कि 8वें सीपीसी के कार्य को शीघ्र प्रारंभ किया जाए ताकि कर्मचारी वर्ग को समय पर लाभ मिल सके।
“असिस्टेंट गार्ड” के निष्क्रिय पद को रिकॉर्ड से हटाया जाए
काउंसिल ने बताया कि 2006 से पार्सल स्पेस लीजिंग योजना लागू होने के बाद सहायक गार्ड का पद अप्रासंगिक हो चुका है। 2012 में रेलवे बोर्ड ने इस पद को समाप्त करने के आदेश दिए थे, फिर भी यह अभी तक रिकॉर्ड में दर्ज है। काउंसिल ने कहा, “शीर्ष अधिकारी इस काल्पनिक पद के अस्तित्व से भी अनभिज्ञ हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है।”
ट्रेन मैनेजरों के वेतन स्तर में समानता की मांग
काउंसिल ने कहा कि 4वें और 5वें वेतन आयोग के दौरान ऑपरेटिंग विभाग की समान श्रेणियों के साथ जो समानता थी, उसे फिर से लागू किया जाए।
🔸 गुड्स गार्ड के लिए ₹4600 GP
🔸 सीनियर गुड्स गार्ड के लिए ₹4800 GP
🔸 पैसेंजर ग्रेड ₹5400 GP
🔸 मेल/एक्सप्रेस ग्रेड के लिए आनुपातिक वृद्धि
यह भी कहा गया कि इन संशोधित स्तरों को 8वें सीपीसी के लिए सिफारिशों में शामिल किया जाए।
ट्रेन मैनेजरों के लिए MACP लागू किया जाए
AIGC ने कहा कि आरबीई 101/2009 और 25/2011 के आदेशों को अदालत ने असंवैधानिक पाया था। बावजूद इसके, ट्रेन मैनेजरों को MACP (Modified Assured Career Progression) का लाभ नहीं दिया गया। काउंसिल ने तत्काल इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की।
रनिंग अलाउंस में 25% वृद्धि की मांग
काउंसिल ने 7वें सीपीसी और डीओपीटी के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी भत्तों में 25% वृद्धि की गई, लेकिन रनिंग अलाउंस में यह बढ़ोतरी नहीं की गई — यह “स्पष्ट भेदभाव” है।
AIGC ने कहा कि रनिंग अलाउंस में वृद्धि न होना रेलवे रनिंग स्टाफ के साथ अन्याय है और इसे तुरंत संशोधित किया जाना चाहिए।
जेपीओ (24.01.2025) को रद्द करने की मांग
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नया Joint Procedure Order (JPO), काउंसिल के अनुसार, “सुरक्षा मानकों और स्थापित नियमों का उल्लंघन” है। उन्होंने इसे “पूर्णतः अव्यवहारिक और असुरक्षित” बताते हुए निरस्त करने की मांग की है और कहा कि 13.11.2024 को जारी पुराना जेपीओ ही लागू रहे।
रिक्तियों की भरपाई की मांग
AIGC ने खुलासा किया कि भारतीय रेलवे में ट्रेन मैनेजरों की 28% पद खाली हैं, जिससे स्टाफ को लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है, छुट्टियाँ नहीं मिल पा रहीं, और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। काउंसिल ने “युद्धस्तर पर भर्ती अभियान” चलाने की मांग की।
पेंशन नियमों की पुनर्समीक्षा
AIGC ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक डी.एस. नकरा बनाम भारत संघ (1983) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पेंशन में भेदभाव असंवैधानिक है। काउंसिल ने आग्रह किया कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के प्रावधानों और पेंशन दायित्वों से संबंधित सिद्धांतों को रद्द किया जाए।
रनिंग अलाउंस पर आयकर छूट सीमा बढ़ाई जाए
काउंसिल ने कहा कि गार्ड्स लगातार 26 दिन ड्यूटी करते हैं, लेकिन रनिंग अलाउंस पर TDS कटने से घर ले जाने वाला वेतन घट जाता है।
उन्होंने मांग की कि आयकर छूट सीमा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 की जाए, ताकि यह महंगाई और कार्यभार के अनुरूप हो सके।
काउंसिल का अंतिम संदेश — “अब और इंतजार नहीं”
AIGC ने कहा —
“हमारी समस्याएं अब केवल वित्तीय नहीं रहीं, बल्कि यह हमारे सम्मान और अस्तित्व का प्रश्न बन गई हैं। यदि इन लंबित मुद्दों का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो देशभर के ट्रेन मैनेजरों का मनोबल और गिर जाएगा, जिससे रेलवे संचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।”
8वां वेतन आयोग लागू करने की मांग
असिस्टेंट गार्ड का पद हटाने की मांग
वेतन स्तर में समानता
MACP का लाभ
रनिंग अलाउंस में 25% वृद्धि
जेपीओ 2025 को निरस्त करने की मांग
28% रिक्तियों की भरपाई
पेंशन नियमों की पुनर्समीक्षा
आयकर छूट सीमा ₹50,000 करने की अपील
नेशनल इंपैक्ट:
रेलवे के लगभग 80,000 से अधिक ट्रेन मैनेजरों से जुड़ी यह मांग यदि लागू होती है तो इसका असर न केवल मंत्रालय के वित्तीय प्रबंधन पर पड़ेगा बल्कि रेलवे संचालन के मानकों और कर्मचारियों के मनोबल पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

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