मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ के होनहार पैरालंपिक खिलाड़ी हरिहर सिंह राजपूत ने अपनी मेहनत और जज्बे से इतिहास रच दिया है। उन्होंने भारतीय पारा फेंसिंग टीम में जगह बनाकर न केवल प्रदेश का बल्कि देश का भी मान बढ़ाया है। वे अब थाईलैंड में होने वाले वर्ल्ड कप पारा फेंसिंग गेम्स 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
लेकिन यह गौरवशाली पल एक कड़वी सच्चाई भी समेटे हुए है — छत्तीसगढ़ का यह इकलौता चयनित खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने के लिए आर्थिक मदद की राह देख रहा है।
बिलासपुर, रायपुर।
17 नवंबर को थाईलैंड रवाना हो रहे हरिहर सिंह राजपूत छत्तीसगढ़ की उस नई खेल पीढ़ी का चेहरा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा रही है।
राजपूत ने भारतीय पारा फेंसिंग टीम में जगह बनाकर यह साबित कर दिया है कि दिव्यांगता कभी भी प्रतिभा की सीमा नहीं होती। वे इस विश्व कप में देश का झंडा थामकर थाईलैंड की धरती पर उतरेंगे — लेकिन उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती “तलवार नहीं, खर्च” की है।
फंड के अभाव में जूझ रहा है चैंपियन:
हरिहर सिंह के पास थाईलैंड जाने और वहां ठहरने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं। प्रशिक्षण, यात्रा और उपकरणों के खर्च की जिम्मेदारी फिलहाल वे खुद उठा रहे हैं। खेल विभाग और राज्य सरकार की ओर से अब तक किसी विशेष सहायता की घोषणा नहीं हुई है।
राजपूत कहते हैं —
“देश के लिए खेलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है, लेकिन अफसोस है कि आर्थिक तंगी अब सबसे बड़ी बाधा बन गई है। अगर सरकार या समाज का साथ मिले, तो मैं भारत को पदक दिला सकता हूँ।”
छत्तीसगढ़ से एकमात्र चयनित खिलाड़ी:
इस बार वर्ल्ड कप पारा फेंसिंग गेम्स में भारत की ओर से जिन खिलाड़ियों का चयन हुआ है, उनमें छत्तीसगढ़ से सिर्फ हरिहर सिंह का नाम शामिल है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की है और अब अंतरराष्ट्रीय पदक की उम्मीदें उन्हीं से जुड़ी हैं।
प्रेरणा का प्रतीक बन रहे हरिहर:
राजपूत की यह कहानी उन हजारों दिव्यांग युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद संघर्ष और मेहनत से सपनों को साकार करना चाहते हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि हरिहर जैसे खिलाड़ियों को सरकार से तत्काल प्रोत्साहन और आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।
हरिहर की उपलब्धियां:
राष्ट्रीय पारा फेंसिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता
भारतीय पारा फेंसिंग टीम में स्थान प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले खिलाड़ी
थाईलैंड वर्ल्ड कप 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे (17 नवंबर से शुरू)
दिव्यांग वर्ग में लगातार तीन वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ के इस बेटे की मेहनत ने विश्व मंच तक पहुंचने की राह तो बना दी है, लेकिन अब जरूरत है — उसके हौसले को आर्थिक पंख देने की। क्योंकि जब राजपूत की तलवार थाईलैंड में चमकेगी, तब पूरा देश गर्व से कहेगा — यह भारत की ताकत है, जो किसी कमी से नहीं रुकती।



