


जांजगीर, बस्तर और एमसीबी में एक दिन में तीन कार्रवाई — रिश्वतखोरी की दलदल में फंसे सरकारी कर्मचारी, किसान और आपदा पीड़ितों से वसूली कर रहे थे पैसे
रायपुर/बिलासपुर | मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के गढ़ अब खुलकर सामने आने लगे हैं। गुरुवार, 30 अक्टूबर को एसीबी (Anti Corruption Bureau) और ईओडब्ल्यू (Economic Offence Wing) ने एक के बाद एक तीन जिलों में बड़ी कार्रवाई कर पूरे सिस्टम को झकझोर दिया।
जांजगीर-चांपा, बस्तर और मोंगरा-चांपा-भिलाई (एमसीबी) में सरकारी अफसरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
तीनों मामलों में रिश्वत की रकम — किसानों और आपदा पीड़ितों के हक के पैसे — थी, जिसे अमीन, पटवारी और विभागीय कर्मचारी मिलकर हड़पना चाहते थे।
“मुआवजा मिले या मौत का प्रमाण — अफसरों की मेज पर बिना ‘नकद पूजा’ के कोई फाइल नहीं चलती!”
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार अब किसी दफ्तर का अपवाद नहीं, बल्कि हर दफ्तर की पहचान बनता जा रहा है।
जांजगीर से लेकर बस्तर और एमसीबी तक, ईमान की ड्यूटी को रुपयों की बोली पर बेचने वाले सरकारी कारिंदे पकड़े गए हैं।
पहली बड़ी कार्रवाई — जांजगीर-चांपा में भू-अर्जन शाखा के अमीन-ऑपरेटर गिरफ्तार
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एसीबी बिलासपुर विंग ने जांजगीर-चांपा जिले में एसडीएम कार्यालय के भू अर्जन विभाग में तैनात अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजुकार देवांगन को 1.80 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
शिकायत:
ग्राम रायपुरा (सक्ति) निवासी किसान बुधराम धीवर ने 16 अक्टूबर को शिकायत की थी कि
“हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा हमारे खाते में आया, लेकिन भुगतान निकलवाने के लिए अफसरों ने 2 लाख रुपये रिश्वत मांगी।”
एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई — बुधराम को रिश्वत की रकम के साथ भेजा गया।
जैसे ही पटवारी ने रकम हाथ में ली, डीएसपी अजीतेश सिंह की टीम ने मौके पर दबिश दी और दोनों को रिश्वत के पैसों के साथ गिरफ्तार कर लिया।
दोनों आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 के तहत केस दर्ज हुआ है।
यह कार्रवाई बताती है कि कैसे किसान का मुआवजा, जो उसके हक का पैसा था, सरकारी अफसरों की जेब में जाने वाला था।
दूसरी कार्रवाई — बस्तर में आपदा पीड़ित से वसूली करते पकड़ा गया कर्मचारी
बस्तर जिले के दरभा में एसीबी जगदलपुर ने सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी हेम कुमार पानीग्राही को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
यह कर्मचारी प्राकृतिक आपदा सहायता राशि दिलाने के एवज में पीड़ित परिवार से पैसे मांग रहा था।
पीड़ित की कहानी:
ग्रामवासी सामनाथ बघेल की पत्नी रामबती बघेल की सर्पदंश से मौत हो गई थी।
सरकारी नियमों के तहत परिवार को ₹4 लाख मुआवजा मिलना था, लेकिन तहसील कर्मचारी पानीग्राही ने 50,000 रुपये की मांग कर दी।
थके-हारे परिवार ने आखिरकार एसीबी में शिकायत की, और गुरुवार को एसीबी उप पुलिस अधीक्षक रमेश मरकाम के नेतृत्व में टीम ने 25 हजार रुपये लेते हुए कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ लिया।
“सांप ने जान ली, और सिस्टम ने बाकी बची सांसों को भी बेचने की कोशिश की।”

तीसरी कार्रवाई — एमसीबी में PWD सब इंजीनियर गिरफ्तार
मोंगरा-चांपा-भिलाई (एमसीबी) जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सब इंजीनियर को एसीबी ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
सूत्रों के अनुसार, वह ठेकेदार से फाइल पास करने और भुगतान रिलीज़ कराने के बदले में कमीशन मांग रहा था।
टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को कैश के साथ गिरफ्तार किया।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि भ्रष्टाचार अब फाइल से लेकर साइन तक, हर प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है।
“भ्रष्टाचार की बेलगाम रफ्तार” — एक दिन में तीन जिले, तीन केस
जिलाआरोपीरिश्वत की राशिविभागकार्रवाईजांजगीर-चांपाअमीन बिहारी सिंह, ऑपरेटर राजुकार देवांगन₹1.80 लाखभू अर्जन शाखा, SDM कार्यालयरंगे हाथों गिरफ्तारबस्तरहेम कुमार पानीग्राही₹25,000तहसील कार्यालयरिश्वत लेते पकड़ा गयाएमसीबीPWD सब इंजीनियर₹50,000 (अनुमानित)लोक निर्माण विभागट्रैप कार्रवाई, गिरफ्तारी
राज्यभर में गूंज: ‘हर दफ्तर में दलाली का दरबार!’
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से एसीबी और ईओडब्ल्यू लगातार सरकारी कर्मचारियों पर शिकंजा कस रही है, लेकिन
“हर गिरफ्तारी के बाद अगली रिश्वत की डील तय हो जाती है।”
यह जमीनी सच्चाई है जो सूबे के हर ब्लॉक ऑफिस, तहसील और विभाग में खुलेआम देखी जा सकती है।
फैक्ट फाइल: छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की मौजूदा स्थिति
2025 में अब तक 40 से अधिक सरकारी अधिकारी रिश्वत में पकड़े गए।
एसीबी के पास हर महीने औसतन 50 नई शिकायतें पहुंचती हैं।
अधिकतर केस राजस्व, निर्माण और शिक्षा विभागों से संबंधित।
सबसे आम पैटर्न: मुआवजा, फाइल पासिंग, पेंशन और ठेका बिल।



