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छत्तीसगढ़ के साइकोपैथ प्रेमी का खूनी खेल — 19 फर्जी अकाउंट्स, और जलती हुई प्रेमिका की लाश

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
9 Min Read

मोहम्मद इसराइल बबलू, बिलासपुर,बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़


कहानी की शुरुआत – प्यार में पागल, दिमाग से खतरनाक!
  

बलौदा बाजार की शांत गलियों में 25 अक्टूबर की सुबह वो मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। चरोटी गांव के बाहरी हिस्से में जब पैरावट (फूस) के ढेर से धुआं उठता दिखा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वहां एक जली हुई युवती की लाश पड़ेगी। जब पुलिस ने राख हटाई, तो भीतर से झुलसा हुआ चेहरा, अधजला शरीर और आसपास बिखरे खून के निशान मिले — यह कोई हादसा नहीं, एक सोच-समझकर की गई हत्या थी।

कातिल कौन? और क्यों?
थोड़ी ही देर में सामने आया नाम — सालिक राम पैकरा (25 वर्ष)
गांव का ही रहने वाला, मजदूरी करने वाला एक साधारण युवक, लेकिन अंदर से बेहद खतरनाक।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सालिक महिलाओं की तरह कपड़े पहनता था, और Instagram पर 19 फर्जी अकाउंट्स चलाता था। सब अकाउंट्स पर वह महिलाओं के नाम और फोटो लगाकर अलग-अलग लड़कियों से संपर्क करता, चैट करता, और उनके जीवन में घुसने की कोशिश करता।
यानी उसकी दुनिया दोहरी थी — बाहर से मासूम, अंदर से एक साइकोपैथिक शख्सियत
प्रेम, शक और जलती हुई मौत
तेजस्विनी पटेल नाम की युवती उसके साथ कुछ समय से रिश्ते में थी। दोनों बलौदा बाजार में काम करते थे।
लेकिन हाल के दिनों में तेजस्विनी ने उससे दूरी बना ली थी।
इसी बात ने सालिक के अंदर का पागलपन जगा दिया।
24-25 अक्टूबर की रात लगभग 1:30 बजे उसने युवती को मिलने के लिए बुलाया।
रात के अंधेरे में पैरावट के पास दोनों के बीच झगड़ा हुआ — युवती ने साफ कहा कि वह अब रिश्ता खत्म कर रही है।
बस! सालिक के सिर पर खून सवार हो गया।
उसने जेब से चाकू निकाला, वार किए, फिर लकड़ी से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी।
फिर शव को वहीं पैरावट में डालकर आग लगा दी — ताकि सबूत भी जल जाए और शक भी न हो।
घर पहुंचकर ऐसे सो गया, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पुलिस की तफ्तीश – सिहराने वाले राज खुले
सुबह जब गांव वालों ने धुआं देखा और पुलिस पहुंची, तो फॉरेंसिक टीम को शरीर पर कई धारदार वारों के निशान मिले।
एसपी भावना गुप्ता ने तुरंत सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त टीम बनाई।
गांव में कैंप लगाकर हर गवाह से बयान लिए गए।
संदेह की सुई सालिक पर गई — और फिर जब उसे थाने लाया गया, तो उसने पहले झूठ बोला, फिर टूट गया।
उसके फोन और कमरे की तलाशी में महिलाओं की तरह कपड़े, विग, मेकअप का सामान और महिलाओं की सेल्फियां मिलीं।
साइबर टीम ने जब उसके मोबाइल डेटा की जांच की तो खुलासा हुआ —
वह इंस्टाग्राम पर 19 अलग-अलग फेक प्रोफाइल्स चला रहा था, जिनसे वह लड़कियों से संपर्क करता और उन्हें झूठे रिश्तों में फंसाता था।
पुलिस रिपोर्ट में पहली बार आया शब्द – “साइकोपैथिक प्रवृत्ति”
एसपी भावना गुप्ता ने मीडिया से कहा कि आरोपी का व्यवहार सामान्य नहीं है।
वह समाज से कटा हुआ, भावनात्मक रूप से अस्थिर और “साइकोपैथिक प्रवृत्ति” वाला है।
यानी — उसे दूसरों की भावनाओं या दर्द का एहसास नहीं होता।
वह सिर्फ अपने जुनून और गुस्से में जीता है।
सोशल मीडिया के पीछे छिपी दरिंदगी
जांच में पुलिस को पता चला कि सालिक ने महिलाओं के नाम से बने अकाउंट्स में कुछ खुद की फोटो भी अपलोड की थीं, जिनमें वह महिलाओं की तरह सजे-धजे कपड़ों में था।
वह इन अकाउंट्स से अन्य पुरुषों और महिलाओं से चैट करता था, जैसे कोई “वर्चुअल जिंदगी” जी रहा हो।
साइबर सेल अब यह जांच कर रही है कि इन प्रोफाइल्स से किसी और अपराध या ठगी से उसका संबंध तो नहीं है।
पुलिस ने उसके लैपटॉप, मोबाइल और कई दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।
अभी जांच जारी है…
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने और साइबर अपराध से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट आने का इंतजार है।
पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या तेजस्विनी से पहले भी किसी महिला को उसने निशाना बनाया था।

स्पॉट

जिला: बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़)
थाना क्षेत्र: सिटी कोतवाली
आरोपी: सालिक राम पैकरा, उम्र 25
पीड़िता: तेजस्विनी पटेल, उम्र 26
हत्या का तरीका: चाकू और लकड़ी से वार, फिर शव जलाया
मानसिक स्थिति: “साइकोपैथिक”, महिलाओं की तरह वेशभूषा धारण करता था
सोशल मीडिया कनेक्शन: 19 फर्जी Instagram अकाउंट्स
जांच अधिकारी: एसपी भावना गुप्ता, साइबर सेल व फॉरेंसिक टीम शामिल

एक साइकोपैथ प्रेमी, 19 नकली चेहरे, और एक जलती लाश —
कितना आसान है सोशल मीडिया के नकाब के पीछे छिपी दरिंदगी को पहचानना?
पुलिस की जांच जारी है… लेकिन इस केस ने पूरे प्रदेश में एक सवाल छोड़ दिया है —
प्यार के नाम पर कितनी बार कोई मौत लिखी जाएगी?

क्या है साइकोपैथिक
आरोपी का स्वभाव: आत्ममुग्ध (Narcissistic), नियंत्रणप्रिय (Controlling), और अत्यधिक स्वामित्व की भावना से ग्रस्त।
सामाजिक व्यवहार: दिखावे में सामान्य, लेकिन भीतर से असुरक्षित।
मानसिक प्रवृत्ति: “अगर मेरी नहीं बनी, तो किसी की नहीं” — यह साइकोपैथिक सोच का मूल पैटर्न है, जिसमें प्रेम भावना नहीं बल्कि “पॉज़ेशन” (Ownership) की प्रवृत्ति होती है।
डिजिटल पैटर्न: 19 फेक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाना, हर पोस्ट पर नजर रखना — यह Obsessive Digital Surveillance Disorder की प्रवृत्ति को दिखाता है।
2. संबंध का मनोवैज्ञानिक स्वरूप
इस तरह के रिश्ते में प्रेम नहीं, बल्कि नियंत्रण और स्वामित्व की भावना केंद्र में होती है।
ऐसे व्यक्ति अपने पार्टनर को एक इंसान की तरह नहीं, बल्कि “अपनी संपत्ति” की तरह देखते हैं।
प्रेमिका का किसी और से बात करना, उसके लिए विश्वासघात नहीं बल्कि अपमान बन जाता है — जो हिंसक प्रतिक्रिया को जन्म देता है।
3. हत्या का मानसिक तर्क (Psychological Motive)
ट्रिगर: अस्वीकृति और “छूटने का डर” (Fear of Abandonment)
मोटिव: बदला नहीं, बल्कि “कंट्रोल वापस पाने” की कोशिश
प्री-मेडिटेशन: मुलाकात तय करना, घटना की तैयारी करना — यह बताता है कि आरोपी मानसिक रूप से घटना की रूपरेखा पहले से बना चुका था।
4. डिजिटल जुनून: नया साइकोपैथी पैटर्न
सोशल मीडिया ने इन अपराधियों के लिए निगरानी और नियंत्रण का हथियार बनकर काम किया है।
19 फेक अकाउंट बनाना केवल जासूसी नहीं, बल्कि डिजिटल ऑब्सेशन (Digital Obsession) है — जो आधुनिक साइकोपैथिक व्यवहार की खास पहचान बन चुका है।
ऐसे लोग “लाइक, कमेंट, ऑनलाइन टाइम” तक को भावनात्मक संकेत की तरह पढ़ते हैं।
5. व्यवहारिक लक्षण (Symptoms of Psychopathy)
संकेतव्याख्याअत्यधिक शकहर दोस्त, कॉल या चैट पर शक करनानियंत्रण की लालसाक्या पहनना है, किससे बात करनी है – सब तय करनाझूठे अकाउंट से पीछा करनाडिजिटल स्टॉकिंगअहंकारी व्यवहार“मैं सही हूं, बाकी सब गलत”भावनात्मक ठंडापनगुस्से में हिंसा, बाद में कोई पश्चाताप नहीं
6. विशेषज्ञ टिप्पणी
“इस तरह के अपराधियों में सहानुभूति की क्षमता बहुत कम होती है। वे अपने पार्टनर को भावनात्मक वस्तु के रूप में देखते हैं, इंसान के रूप में नहीं। यह साइकोपैथी और ऑब्सेसिव पर्सनालिटी डिसऑर्डर का मिश्रित रूप है।”
— डॉ. आर तिवारी, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट
7. सामाजिक पहलू
यह केस सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि “डिजिटल युग में प्रेम” अब मानसिक रोगियों के लिए नियंत्रण का माध्यम बन चुका है।
ऐसे रिश्ते जो रोमांस की आड़ में जासूसी, नियंत्रण और हिंसा पर टिका होते हैं, वे भविष्य में अपराध बनकर फूटते हैं।
सीख — रिश्तों में कंट्रोल नहीं, संवाद ज़रूरी
प्यार कभी “पकड़ने” की चीज़ नहीं, “समझने” की प्रक्रिया है।
जब रिश्ते में स्वतंत्रता खत्म होती है, तो वहीं से साइकोपैथिक सोच जन्म लेती है।

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