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अपने शरीर का दान : बिलासपुर के वीरेंद्र अग्रवाल ने दिखाया मानवीय संवेदना का अद्भुत उदाहरण

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, 27 अक्टूबर 2025।
मानवता की सेवा और चिकित्सा शिक्षा के उत्थान के लिए जीवन में लिया गया निर्णय, मृत्यु के बाद भी किसी को प्रेरित कर सकता है — इसका जीवंत उदाहरण बने हैं बिलासपुर के शेष कॉलोनी, विनोबा नगर निवासी श्री वीरेंद्र अग्रवाल। 26 अक्टूबर की सुबह 9 बजे उनका  निधन हुआ, किंतु जाने से पहले उन्होंने समाज के लिए एक अनमोल उपहार छोड़ दिया — अपने शरीर का देहदान
उनकी इस प्रेरणादायक इच्छा की जानकारी उनके परिजनों — श्री आशीष अग्रवाल, श्रीमती अलका अग्रवाल, श्रीमती आभा अग्रवाल एवं श्रीमती पिंकी अग्रवाल — ने छत्तीसगढ़ आयु विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति को दी। डॉ. मूर्ति ने इस पुनीत कार्य के विधिवत संपादन हेतु शरीर रचना विज्ञान (एनाटॉमी) विभागाध्यक्ष डॉ. शिक्षा जांगड़े को आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए।
विभाग द्वारा सभी दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी कर देहदान को विधिवत स्वीकार किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, डॉ. वीणा मोटवानी, डॉ. प्रेमलता येंडे, डॉ. अमित कुमार, डॉ. कमलजीत बाशन सहित सिम्स परिवार के सदस्य और दिवंगत के परिजन उपस्थित रहे।
देहदान से नई पीढ़ी को मिलेगा ज्ञान का आधार
एनाटॉमी विभाग के अनुसार, श्री वीरेंद्र अग्रवाल का यह योगदान एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के अध्ययन, प्रयोग और शोध के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। चिकित्सा शिक्षा में कैडैवरिक अध्ययन (Cadaveric Study) के लिए देहदान सबसे मूल्यवान संसाधन होता है, जिससे भावी चिकित्सक मानव शरीर की संरचना की वास्तविक समझ विकसित कर पाते हैं।
सिम्स में विद्यार्थियों की परंपरा है कि वे अपने पहले अध्ययन सत्र — कैडैवरिक ओथ (Cadaveric Oath) — में यह शपथ लेते हैं :
“यह हमारे चिकित्सा जीवन के प्रथम गुरु हैं। हम इनके शरीर का पूरे सम्मान, श्रद्धा और मर्यादा के साथ अध्ययन कर एक कुशल एवं संवेदनशील चिकित्सक बनने का प्रयास करेंगे।”
यह परंपरा न केवल विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनशीलता का संचार करती है, बल्कि देहदाता के प्रति गहन श्रद्धा और आभार की भावना भी विकसित करती है।
सिम्स परिवार ने दी श्रद्धांजलि
सिम्स परिवार ने श्री वीरेंद्र अग्रवाल जी के इस श्रेष्ठ, प्रेरणादायी एवं समाजोपयोगी योगदान के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा —
“ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनका यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों को न केवल ज्ञान देगा, बल्कि मानवता की असली सीख भी सिखाएगा।”
सिम्स परिवार एवं संपूर्ण चिकित्सा समुदाय ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए श्री वीरेंद्र अग्रवाल को नमन किया है।

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