हॉस्टल में तीन दिन तक कोई नहीं ढूंढ पाया छात्र को — अब जांच के घेरे में पूरा सिस्टम
| मोहम्मद इसराइल बबलू बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ की गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के छात्र अर्सलान अंसारी की मौत अब रहस्य नहीं, एक सवाल बन चुकी है — और यह सवाल विश्वविद्यालय के हर दरवाजे से टकरा रहा है।
तीन दिन तक गायब रहने के बाद 23 अक्टूबर को अर्सलान का सड़ा-गला शव विश्वविद्यालय के ही तालाब से मिला। सिर पर गहरी चोटें थीं, मोबाइल और पैंट तालाब के भीतर पड़ी मिली, जबकि शव सिर्फ अंडरवियर में मिला।
अब मामला हत्या और हादसे के बीच झूल रहा है — और पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन जांच के घेरे में है।




“मौत या हत्या?” – पुलिस भी उलझी, सबूत भी संदिग्ध
शव की हालत और घटनास्थल से मिले सुराग विरोधाभासी हैं।
सीएसपी गगन कुमार (आईपीएस) के मुताबिक,
“प्रारंभिक जांच में डूबने से मौत होना पाया गया है। सिर पर चोट के निशान की जानकारी नहीं है। अगर कुछ मिला तो एफआईआर दर्ज होगी।”
लेकिन पोस्टमार्टम टीम का कहना है कि सिर पर स्पष्ट चोटें हैं। सवाल यह भी है कि अगर डूबने से मौत हुई, तो छात्र अंडरवियर में कैसे मिला, और उसकी पैंट व मोबाइल तालाब के अंदर कैसे गए?
यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर आरोपों की बौछार
मृतक के पिता अरशद अयूब अंसारी का आरोप है कि
“21 अक्टूबर को बेटे के लापता होने की जानकारी यूनिवर्सिटी को दी गई थी, लेकिन किसी ने उसे खोजने की कोशिश तक नहीं की। न वार्डन ने पुलिस में रिपोर्ट की, न किसी अधिकारी ने फोन किया। अगर समय पर खोजबीन होती, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता।”
उनका यह बयान विश्वविद्यालय की पूरी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
मौत पर भी “समारोह” — संवेदनहीन यूनिवर्सिटी प्रशासन
छात्र संगठनों और परिजनों का आरोप है कि जिस दिन शव की पहचान हो रही थी, उसी दिन यूनिवर्सिटी कैंपस में सम्मान समारोह चल रहा था।
एबीवीपी समेत अन्य छात्र संगठनों ने कहा कि यह “संवेदनहीनता की हद” है।
छात्रों का आरोप है कि कुलपति से लेकर वार्डन तक, किसी ने भी परिवार से मिलने या घटना पर संवेदना जताने की जरूरत नहीं समझी।
कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग, एसएसपी से की मुलाकात
जिला कांग्रेस कमेटी (शहर व ग्रामीण) ने इस मौत को “प्रबंधन की लापरवाही से हुई त्रासदी” बताया है।
सोमवार को विजय केशरवानी और विजय पांडेय के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया —
“अर्सलान की मौत विश्वविद्यालय की अव्यवस्था का परिणाम है। छात्र 21 अक्टूबर से गायब था, फिर भी न खोजबीन हुई, न सूचना दी गई। हॉस्टल प्रबंधन की यह चुप्पी अपराध के बराबर है। कुलपति और वार्डन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।”
कांग्रेस ने इस मामले को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति तक भेजने का निर्णय लिया है।
जांच के घेरे में: सुरक्षा और सिस्टम दोनों
हॉस्टल एंट्री रजिस्टर: छात्र का तीन दिन तक कोई रिकॉर्ड नहीं।
सीसीटीवी फुटेज: अब तक सार्वजनिक नहीं की गई।
कमरा नंबर 45: परिजनों को देखने तक नहीं दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट: तैयार, लेकिन पुलिस ने सार्वजनिक नहीं की।
हर बिंदु यह संकेत देता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ छिपाने की कोशिश में है, या फिर उसकी अव्यवस्था इतनी गहरी है कि सच्चाई खुद दबती जा रही है।
ग्राउंड रिपोर्ट: “लाश ने पढ़ाई से ज्यादा सिखा दिया सिस्टम का गणित”
फिजिक्स पढ़ने आए अर्सलान की मौत ने यूनिवर्सिटी की “सुरक्षा की समीकरण” को पूरी तरह बदल दिया है।
छात्र सवाल कर रहे हैं कि
“अगर कोई तीन दिन तक हॉस्टल से गायब है, तो क्या प्रशासन को उसकी भनक तक नहीं लगती?”
“सीसीटीवी फुटेज क्यों नहीं दिखाई जा रही?”
“कुलपति मौन क्यों हैं?”
इन सवालों की गूंज अब यूनिवर्सिटी की दीवारों से निकलकर दिल्ली तक पहुंचने लगी है।
“जांच समिति बनाकर क्या छिपाया जाएगा?”
यूनिवर्सिटी के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है, लेकिन छात्रों का कहना है —
“यह सिर्फ औपचारिकता है। पहले भी कई मामलों में जांच हुई, पर किसी का अंजाम नहीं निकला।”
सेंट्रल यूनिवर्सिटी या सेंटर ऑफ साइलेंस?
अर्सलान की मौत ने देशभर के विश्वविद्यालयों में सुरक्षा और जिम्मेदारी के सवाल फिर जगा दिए हैं।
यह सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं — बल्कि शिक्षा संस्थानों की मौन संस्कृति की सबसे खतरनाक मिसाल है,
जहाँ शिकायतें दीवारों में गुम हो जाती हैं, और सच्चाई पोस्टमार्टम टेबल पर आकर ठहर जाती है।
फील्ड नोट:
मौके पर पहुंचे आईपीएस गगन कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, तालाब की परिधि नापी गई, और गोताखोरों से पैंट व मोबाइल बरामद किए गए। सूत्रों के मुताबिक, फोन का डेटा फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है — जहाँ से इस केस की अगली परतें खुलने की उम्मीद है।
अनसुलझे सवाल अभी भी बाकी
क्या छात्र खुद तालाब तक गया या किसी ने धक्का दिया?
तालाब में पैंट और मोबाइल कैसे पहुंचे?
हॉस्टल प्रबंधन ने तीन दिन तक रिपोर्ट क्यों नहीं दी?
क्या यूनिवर्सिटी ने घटना को दबाने की कोशिश की?
और सबसे बड़ा सवाल — क्या अर्सलान की मौत वाकई हादसा थी?



