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करेंट से मरा गौर! छत्तीसगढ़ के जंगलों में ‘शिकार सिंडिकेट’ का खेल — वन विभाग की नींद टूटी, रेंजर निलंबित

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू| रायपुर
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार वनमंडल के अर्जुनी परिक्षेत्र में वन्यप्राणी गौर (बायसन) की करेंट लगाकर हत्या ने राज्य के वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
राज्य के “संरक्षित” कहे जाने वाले जंगलों में यह कोई पहली वारदात नहीं — बल्कि लगातार बढ़ते शिकार सिंडिकेट और लचर निगरानी तंत्र की एक और कड़ी है।
जंगल में बिछा मौत का जाल
25 अक्टूबर की सुबह अर्जुनी परिक्षेत्र के बिलाड़ी परिसर के कक्ष क्रमांक 324 में वन्यप्राणी गौर का शव मिला। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जानवर की मौत करेंट लगने से हुई है।
जंगल में बिछाए गए बिजली के तार शिकारियों की योजना का हिस्सा थे, जिन्हें अक्सर रात के अंधेरे में जंगली जानवरों के गुजरने वाले रास्तों पर फैलाया जाता है।
इस जघन्य कृत्य की जानकारी मिलते ही विभागीय जांच शुरू की गई।
वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और घटना में वनरक्षक प्रेमचंद धृतलहरे को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निगरानी में बड़ी चूक
यह स्पष्ट है कि जिस क्षेत्र में गौर जैसे भारी-भरकम वन्यप्राणी का करेंट से शिकार हुआ, वहाँ नियमित गश्त या तो कागज़ों में सीमित थी, या फिर स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की बू आती है।
ग्रामीण सूत्रों का कहना है कि “करेंट जाल” कोई नई बात नहीं — मगर वन विभाग की गश्ती टीमें अक्सर रिपोर्ट दर्ज किए बिना लौट जाती हैं।
“कानून सख्त, अमल ढीला”
वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 की धारा 9 के तहत किसी भी वन्यप्राणी का शिकार गंभीर गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 7 वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माना तय है।
लेकिन सवाल यह है कि जब हर साल दर्जनों मामलों में करेंट, जाल या गोली से शिकार होते हैं — तो सजा पाने वाले गिने-चुने ही क्यों हैं
हाल के वन्यप्राणी शिकार के प्रमुख मामले (छत्तीसगढ़)
तिथिजिला / क्षेत्रशिकार हुआ प्राणीतरीकाविभागीय कार्रवाई25 अक्टूबर 2025बलौदाबाजार (अर्जुनी)गौर (बायसन)करेंट लगाकरवनरक्षक निलंबित, जांच जारी17 सितंबर 2025कवर्धा (भोरमदेव)हिरणफंदा जालकोई गिरफ्तारी नहीं12 अगस्त 2025सूरजपुर (ओड़गी)तेंदुआजहर से मौतसंदिग्ध फरार21 जुलाई 2025कांकेरसांभरकरेंट से मौतदो ग्रामीण गिरफ्तार5 जून 2025रायगढ़जंगली सुअरशिकारियों ने गोली मारीविभाग मौन।
‘संरक्षण’ सिर्फ कागजों पर, जंगलों में मौत की सरसराहट
छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण अब एक रिपोर्टिंग रिचुअल बनकर रह गया है।
हर घटना के बाद वही बयान — “जांच जारी है, दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी” — लेकिन नतीजा? मौन।
स्थानीय स्तर पर शिकार माफिया, लकड़ी तस्कर और वन विभाग के बीच सांठगांठ की चर्चा कोई नई नहीं।
प्रश्न यह नहीं कि एक गौर मरा — प्रश्न यह है कि जंगलों में हर गश्त, हर गार्ड और हर अधिकारी की जिम्मेदारी कब तय होगी?

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