मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर — एक ऐसा स्थान जो ज्ञान देने का दावा करता है, वहीं उसकी उदासीनता और व्यवस्था की बेरुखी ने एक जवान की जान छीनी। अर्सलान अंसारी की रहस्यमयी मौत केवल दुर्घटना नहीं; यह विश्वविद्यालय प्रबंधन की गोरखधंधी, अनदेखी और संभावित अपराध छिपाने की कोशिशों का सीधा आइना है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें शव तक नहीं देखने दिया गया, उन्हें जबरन अलग कमरे में बंद रखा गया और एफआईआर दर्ज कराने से ताड़ना की गई — क्या ये सब सिर्फ मामले को दफनाने के प्रयास हैं? छात्रों का क्रोध उबल रहा है, सवाल खड़े हैं कि क्या प्रशासन ने सुरक्षा से समझौता किया या चोरी-छिपे किसी गलत हरकत में आँखें मूँदी रहीं? सरकारी तंत्र की यह सख्त नाकामी, अब न केवल जवाब मांगती है बल्कि न्याय की आह्वान भी है।




गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (जीजीयू), बिलासपुर में तालाब से मिले लापता छात्र अर्सलान अंसारी का शव।
छात्र की मौत ने पूरे कैंपस में हड़कंप मचा दिया; छात्रों में गुस्सा और प्रशासन पर आक्रोश।
परिजनों का आरोप: यूनिवर्सिटी और पुलिस ने मामले को छुपाया, एफआईआर दर्ज नहीं की।
प्रशासन की चुप्पी और सुरक्षा में चूक पर गंभीर सवाल।
छत्तीसगढ़ के एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी, बिलासपुर से दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। चार दिन पहले विश्वविद्यालय परिसर के तालाब में तैरते हुए पाए गए अज्ञात युवक के शव की अब पहचान हो गई है।
पहचान और पोस्टमार्टम:
मृतक छात्र अर्सलान अंसारी था, जो कुछ दिन पहले विश्वविद्यालय से लापता हो गया था। शव मिलने के बाद पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए मॉर्च्युरी में सुरक्षित रखा। पहचान होने के बाद आज शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया।
परिजनों की आपत्ति:
मृतक के भाई अयूब अंसारी ने विश्वविद्यालय और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि जब वे बिलासपुर पहुंचे, तो उन्हें केवल फोटो दिखाई गई और शव नहीं दिखाया गया। साथ ही उनका दावा है कि उन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक कमरे में बंद करके बाहरी लोगों और मीडिया से मिलने नहीं दिया। अयूब के अनुसार, कोनी पुलिस थाने ने भी एफआईआर दर्ज करने से इंकार किया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
छात्रों का आक्रोश:
छात्रों ने प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अर्सलान तीन दिन तक गायब रहा, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। शव मिलने के बाद ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन सुरक्षा और निगरानी में गंभीर रूप से नाकाम रहा।
पुलिस का बयान:
सीएसपी कोतवाली गगन कुमार का कहना है कि छात्र तालाब में गिरकर फिसला और हादसे का कारण यही माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि शव के पास मोबाइल भी मिला है और जांच जारी है।
सुरक्षा और प्रशासन पर सवाल:
इस घटना ने प्रदेश के एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरियों को उजागर किया है। केवल यह एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि पुलिस जांच निष्पक्ष तरीके से होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
सुरक्षा में चूक
गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी का यह मामला अब सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं है, बल्कि एक चेतावनी भी है। जब शिक्षा संस्थान सुरक्षा में चूक करते हैं, तो इसकी कीमत किसी मासूम की जिंदगी चुकाती है।
अयूब गौहर अंसारी (मृतक का भाई): “यूनिवर्सिटी ने हमें शव नहीं दिखाया, फोटो के आधार पर पहचान करने को मजबूर किया।”
अविनाश तिवारी (छात्र): “यह प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है, तीन दिन तक कोई ध्यान नहीं दिया।”
गगन कुमार (सीएसपी कोतवाली): “प्रारंभिक जांच में छात्र तालाब में गिरा, आगे की कार्रवाई जारी है।”



