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सिम्स बिलासपुर में बाहरी दलालों की घिनौनी हरकत बेनकाब – सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ा,  आरोपी को जेल भेजा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ आयु विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में मरीजों के भरोसे और स्वास्थ्य सेवा की गंभीरता के बीच कुछ लोग अपनी गंदी साजिश रच रहे थे। निजी अस्पतालों से जुड़े दलाल, जिन्हें मरीजों को बहला-फुसलाकर दूसरे अस्पतालों में भेजने का पैसों का लालच था, बुधवार सुबह सिम्स परिसर में पकड़े गए।


घटना का खुलासा: मरीजों को गुमराह करने का मामला
सुबह लगभग 6 बजे, टाइज वार्ड में अभिषेक निर्मलकर नामक व्यक्ति संदिग्ध रूप से मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत करता पाया गया। वह मरीजों को भ्रमित कर उन्हें यह कह रहा था कि “यहाँ डॉक्टर नहीं हैं” या “इलाज़ महंगा है, बाहर सस्ता मिलेगा।”
सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता और तत्परता से उसके हर चाल को पकड़ लिया गया। सूचना तुरंत सुरक्षा सुपरवाइजर लघु शर्मा तक पहुंची, जिन्होंने मौके पर पहुँचकर आरोपी से पूछताछ की।
सभी तथ्य पुष्टि होने के बाद आरोपी को सिम्स चौकी के माध्यम से सिटी कोतवाली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया, ताकि कानूनी कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी हरकतों को रोका जा सके।
सिम्स प्रशासन की सख्ती और चेतावनी


सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने साफ कहा —
“संस्थान में मरीजों के हित सर्वोपरि हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा मरीजों को गुमराह करने या उपचार में बाधा डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी सुरक्षा टीम की तत्परता सराहनीय है, और भविष्य में भी ऐसे तत्वों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।”
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा —
“प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा भ्रम फैलाना गंभीर अपराध है। प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाया है और भविष्य में ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता ने रोकी गंभीर साजिश


सुरक्षा सुपरवाइजर लघु शर्मा ने बताया कि सभी वार्डों में नियमित गश्त जारी है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना प्रशासन को दी जा रही है। उनका कहना है कि सुरक्षा की नजरें चौकस हैं और कोई भी बाहरी व्यक्ति मरीजों को गुमराह करने की सोच भी नहीं सकता।
सिम्स प्रशासन की अपील
सिम्स ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत सुरक्षा विभाग या अस्पताल प्रशासन को दें। यह कदम न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि अस्पताल की सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि कुछ लोग मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य को व्यवसाय के लिए दांव पर लगा रहे हैं। लेकिन सिम्स प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों की तत्परता ने इसे नाकाम कर दिया। अब सवाल यह है — कितनी जल्दी हम ऐसी हरकतों को पकड़ेंगे और कितनी जल्दी प्रशासन का डर इन दलालों के दिमाग में बैठ जाएगा।

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