“सृजन या संघर्ष?” — दिल्ली में कांग्रेस का निर्णायक मंथन, छत्तीसगढ़ में संगठन को लेकर बढ़ी सियासी हलचल
भूपेश-सिंहदेव-महंत-बैज एक टेबल पर, हाईकमान के सामने संगठन की नई तस्वीर; रायपुर-बिलासपुर-दुर्ग पर टिकी नजरें
नई दिल्ली/बिलासपुर, रायपुर |मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के “संगठन सृजन अभियान” का सबसे बड़ा और निर्णायक पड़ाव अब दिल्ली में मंथन के रूप में सामने आने वाला है।
कांग्रेस आलाकमान ने 23 अक्टूबर को नई दिल्ली में हाईलेवल बैठक बुलाई थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज एक साथ बैठकर शहर व जिला कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्तियों पर की।
यह बैठक सिर्फ नामों पर मुहर लगाने भर की नहीं, बल्कि पोस्ट-इलेक्शन कांग्रेस स्ट्रक्चर का खाका तय करने वाली मीटिंग मानी जा रही है।
दिल्ली में रणनीति, छत्तीसगढ़ में टेंशन
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट भी मौजूद थे।
संगठन सृजन के तहत प्रदेश के सभी जिलों से रायशुमारी रिपोर्ट दिल्ली पहुंच चुकी है। अब सवाल यह है कि —
“किसकी चलेगी राय और किसकी दब जाएगी दावेदारी?”
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अंदर फिलहाल तीन ध्रुवों की लॉबी सक्रिय है —
भूपेश बघेल गुट जो संगठन पर पुराना प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
टी.एस. सिंहदेव गुट जो पार्टी के भीतर नई और साफ छवि वाले नेतृत्व की वकालत कर रहा है।
चरणदास महंत और दीपक बैज गुट, जो संगठन में संतुलन और क्षेत्रीय समीकरण को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं।
बिलासपुर पर फोकस — तिकड़ी की खींचतान
संगठनात्मक पुनर्गठन में बिलासपुर जिला कांग्रेस का सबसे अहम रोल माना जा रहा है।
यहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सिंहदेव — तीनों ही अपने समर्थकों को ग्रामीण और शहर अध्यक्ष पद पर देखना चाहते हैं।
दिल्ली बैठक से पहले ही इन नेताओं ने अपने-अपने चैनलों के ज़रिए लॉबिंग तेज कर दी है, लेकिन केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने साफ कर दिया है —
“पद उसी को मिलेगा, जो कांग्रेस का सच्चा सिपाही है।”
संगठनात्मक समीकरण: किसकी चमकेगी किस्मत?
पदसंभावित पैनलप्रमुख नामशहर कांग्रेस अध्यक्ष, बिलासपुर6 नामों का पैनलमहेश दुबे, सीमा पांडेय, स्वर्णा शुक्ला, सिद्धांशु मिश्रा, दीपांशु श्रीवास्तव, राजकुमार तिवारीग्रामीण जिलाध्यक्ष, बिलासपुर6 नामों का पैनल रविंद्र सिंह, लक्ष्मीनाथ साहू, आदित्य दीक्षित, प्रमोद नायक, गीतांजलि कौशिक आदि
क्या है सृजन अभियान’
कांग्रेस ने सत्ता से बाहर आने के बाद संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए ‘सृजन अभियान’ की शुरुआत की थी।
यह अभियान उदयपुर नवसंकल्प सम्मेलन के बाद लागू की गई उस नीति का हिस्सा है, जिसमें कहा गया था —
“पदाधिकारी वही बनेगा, जिसने पार्टी के लिए संघर्ष किया हो, न कि सिर्फ टिकट की राजनीति की हो।”
दिल्ली बैठक के एजेंडे पर 5 बड़े सवाल
सवाल 1. क्या राहुल और प्रियंका गांधी ने छत्तीसगढ़ में नियुक्तियों पर फ्री हैंड दे दिया है?दोनों नेता इस समय बिहार चुनाव अभियान में व्यस्त हैं। ऐसे में, क्या पूरा अधिकार के.सी. वेणुगोपाल और सचिन पायलट को मिला है?2. क्या उदयपुर संकल्प के सिद्धांतों के अनुसार नियुक्तियां होंगी?सीनियर नेताओं की लॉबिंग के बीच क्या मेरिट-आधारित चयन संभव है?3. क्या दीपक बैज का संगठनात्मक प्रभाव बरकरार रहेगा?वे प्रदेशाध्यक्ष हैं, लेकिन हाईकमान की प्राथमिकता अब “जमीनी चेहरे” हैं।4. क्या भूपेश बघेल की पकड़ फिर दिखेगी?संगठनात्मक ढांचे में उनका नेटवर्क सबसे मजबूत है, लेकिन हाईकमान ‘नई टीम’ पर जोर दे रहा है।5. क्या सिंहदेव-महंत की राय संतुलन बनाए रख पाएगी?दोनों नेता संतुलन की राजनीति के पक्षधर हैं, लेकिन अंतिम निर्णय दिल्ली में होगा।
राजनीतिक विश्लेषण: 2028 की तैयारी का खाका
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह नियुक्ति प्रक्रिया 2028 विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा रणनीति की नींव है।
कांग्रेस अब उन चेहरों को आगे लाना चाहती है, जो गांव, बूथ और सोशल कनेक्ट स्तर पर सक्रिय हों।
इसलिए दिल्ली की बैठक में केवल पद नहीं, बल्कि भविष्य की नेतृत्व संरचना तय होगी।
‘सृजन’ से निकलेगा नया संगठनात्मक चेहरा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की यह कवायद सिर्फ पुनर्गठन नहीं, बल्कि एक नई दिशा का निर्माण है।
भूपेश-सिंहदेव-महंत-बैज — चारों नेताओं की मौजूदगी में होने वाली यह बैठक यह तय करेगी कि
“संगठन का सृजन होगा या फिर अंतहीन संघर्ष।”



