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फूड प्वाइजनिंग से तीन मासूम समेत पांच  की मौत, कई की हालत नाजुक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सामूहिक भोज के बाद बिगड़ी तबीयत, बीजापुर और नारायणपुर से मेडिकल टीमें मौके के लिए रवाना
नारायणपुर | मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गोट गांव में आयोजित पारिवारिक  भोज के बाद दूषित भोजन (फूड प्वॉइज़निंग) से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई ग्रामीणों की हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना के बाद पूरा गांव सदमे में है — जहां कुछ घंटे पहले हंसी-खुशी का माहौल था, अब हर घर में सन्नाटा पसरा हुआ है।
भोजन करने के कुछ घंटे बाद ही गिरे बीमार


गांव के ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर में परोसे गए भोजन को खाने के कुछ ही समय बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उल्टी, चक्कर और बेहोशी जैसे लक्षण दिखने लगे। पहले ग्रामीणों ने घरेलू इलाज का सहारा लिया, लेकिन स्थिति गंभीर होते देख प्रशासन को खबर दी गई।
नारायणपुर और बीजापुर जिलों से स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत रवाना की गईं। दुर्गम जंगल और कमजोर मोबाइल नेटवर्क के कारण राहत टीमों को मौके तक पहुंचने में कठिनाई हुई।
तीन मासूमों ने तोड़ा दम, कई ग्रामीणों की हालत गंभीर
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, तीनों मृतक बच्चे एक ही परिवार के आसपास के थे और सभी ने एक ही भोज में हिस्सा लिया था। फिलहाल कई बीमार ग्रामीणों का इलाज भैरमगढ़ उप-स्वास्थ्य केंद्र और नजदीकी कैंपों में जारी है।
स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जांच में फूड प्वॉइज़निंग की पुष्टि हुई है, हालांकि भोजन में क्या ज़हरीला तत्व था — इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
कलेक्टर ने की घटना की पुष्टि
नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि —
“प्रभावित गांव अबूझमाड़ के घने इलाकों में स्थित है। स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और हर बीमार व्यक्ति को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। भोजन के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।”
दुर्गम अबूझमाड़ में राहत कार्य चुनौती बना
अबूझमाड़ के अधिकांश गांवों में मोबाइल नेटवर्क और सड़क संपर्क न के बराबर हैं। प्रशासनिक टीमों को कई किलोमीटर तक पैदल या मोटरसाइकिल से यात्रा करनी पड़ी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जब तक पूरी रिपोर्ट नहीं आती, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फूड प्वॉइज़निंग के बाद गोट गांव में मातम
गांव में अब हर ओर मातम का माहौल है। कई परिवार अस्पतालों की ओर भागे हैं, जबकि कुछ परिजन अब भी अपनों की तलाश में हैं। ग्रामीण बताते हैं कि छठी जैसे पारंपरिक आयोजन में कभी ऐसा हादसा नहीं हुआ था।
फैक्ट फाइल: अबूझमाड़ – जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचती हैं मुश्किल से
पैरामीटरस्थितिप्रमुख गांवगोट, अबूझमाड़, धुरगांवस्वास्थ्य सुविधासीमित, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 60 किमी दूरएंबुलेंस पहुंचकई इलाकों में असंभवनेटवर्क स्थितिकमजोर या नहीं के बराबरताजा हादसाफूड प्वॉइज़निंग से 3 बच्चों की मौत
गांव की खामोशी में गूंज रहे सवाल
गोट गांव के ग्रामीणों के चेहरे पर अब सिर्फ सवाल हैं — क्या ये मौतें टल सकती थीं, अगर स्वास्थ्य सेवा समय पर पहुंचती? या अगर भोजन की जांच पहले होती? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल पाएंगे।

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