मो इसराइल बबलू
बिलासपुर। दिवाली की रात बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में खुशियों की चमक के बीच एक लापरवाही भरी घटना ने लोगों को सन्न कर दिया। रामसेतु पुल के पास सड़क पर पटाखे फोड़ रहे युवकों की मस्ती अचानक हादसे में बदल गई, जब एक रॉकेट पटाखा खड़ी स्कूटी पर गिरा और देखते ही देखते पूरी स्कूटी धू-धूकर जल गई। गनीमत रही कि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क पर रॉकेट फोड़ते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, दीपावली की रात सरकंडा क्षेत्र के करीब एक दर्जन युवक रामसेतु पुल के पास पहुंचे थे। खाली सड़क देखकर उन्होंने अपनी बाइकें खड़ी कर दीं और आतिशबाजी शुरू कर दी। रॉकेट, स्काई शॉट और बम जैसे पटाखों से इलाका गूंज उठा। इसी दौरान एक जलता हुआ रॉकेट ऊपर से उड़ता हुआ सीधे खड़ी स्कूटी पर आ गिरा। चिंगारियां उठीं और कुछ ही सेकंड में स्कूटी पूरी तरह आग की लपटों में घिर गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक देर रात तक सड़क पर मस्ती करते रहे। हादसे के बाद भी वहां तत्काल कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था, जो स्थिति को नियंत्रित कर सके या युवकों को रोक सके।
दमकल दल ने बुझाई आग, हनुमान सेवा समिति ने दी सूचना
घटना के दौरान हनुमान सेवा समिति के सदस्य और समाजसेवी मिक्की मिश्रा अपने साथियों के साथ गुजर रहे थे। उन्होंने स्कूटी को जलते देखा और तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम तथा नगर सेना को सूचना दी। सूचना पर आपदा प्रबंधन दल दमकल वाहन लेकर मौके पर पहुंचा और पानी की बौछारों से आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक स्कूटी पूरी तरह जलकर राख हो चुकी थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पुलिस ने दिवाली के पहले दो दिनों तक गश्त और चौक-चौराहों पर जवानों की तैनाती के दावे किए थे। लेकिन यह हादसा बताता है कि शहर की सड़कों पर नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था कितनी लचर रही। त्योहार की रात जब युवकों का समूह खुलेआम सड़क पर आतिशबाजी कर रहा था, तब आसपास कोई भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे हादसे हर साल दिवाली पर होते हैं, लेकिन न तो रोकथाम के उपाय किए जाते हैं और न ही सड़कों पर प्रभावी निगरानी।
सवाल जो अब उठ रहे हैं
- जब पुलिस गश्त पर थी, तो रातभर युवकों की भीड़ को किसने रोका?
- सड़क पर खुलेआम आतिशबाजी करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- हर साल ऐसे हादसे के बाद भी सुरक्षा प्रबंधन में सुधार क्यों नहीं दिखता?
मेरी भी सुनिए …
“त्योहार पर उत्सव का जोश जिम्मेदारी से ही सुरक्षित रह सकता है। बिलासपुर की यह घटना याद दिलाती है कि एक पल की लापरवाही किस तरह सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। पुलिस की सजगता और नागरिक अनुशासन — दोनों का संतुलन ही सुरक्षित दिवाली की गारंटी है।”
Mohammed israil



