मो इसराइल बबलू
पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और सीपीआर प्रशिक्षण के जरिए जनजागरूकता — डॉक्टरों ने बताया निश्चेतना विशेषज्ञों की ‘अनदेखी लेकिन अहम’ भूमिका
बिलासपुर, 17 अक्टूबर 2025 |
छत्तीसगढ़ आयु विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में शुक्रवार को विश्व निश्चेतना दिवस के अवसर पर निश्चेतना विभाग द्वारा एक दिवसीय संवेदीकरण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और आपातकालीन चिकित्सा की जानकारी सत्र शामिल रहे, जिसमें बड़ी संख्या में मेडिकल विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ और आम नागरिकों ने भाग लिया।


नुक्कड़ नाटक और पोस्टर प्रतियोगिता से जनजागरूकता

निश्चेतना विभाग की ओर से आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता का विषय था —
“आपातकालीन परिस्थितियों में निश्चेतना विशेषज्ञ का योगदान”,
जिसमें एमबीबीएस विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और चिकित्सकीय समझ का प्रदर्शन किया।
विजेताओं में मयंक कुमार और पंकज (प्रथम), कृति (द्वितीय) तथा जयेश एवं दीपक (तृतीय) रहे।
निर्णायक मंडल में डॉ. आरती पांडे, डॉ. संगीता रमन जोगी और डॉ. आर.के. बेन शामिल रहे।
वहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्रों ने आमजन को यह संदेश दिया कि निश्चेतना विशेषज्ञ न केवल ऑपरेशन थिएटर में बल्कि आईसीयू, दर्द नियंत्रण और कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थितियों में भी जीवन रक्षक भूमिका निभाते हैं।
“निश्चेतना विशेषज्ञ हर पल जीवन की सुरक्षा में तत्पर” — डॉ. मधुमिता मूर्ति

कार्यक्रम का संचालन निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में हुआ।
उन्होंने कहा —
“लोग आमतौर पर सोचते हैं कि निश्चेतना विशेषज्ञ केवल सर्जरी के समय ही जरूरी होते हैं,
लेकिन सच्चाई यह है कि वे हर आपात स्थिति में जीवन रक्षा की अग्रिम पंक्ति में रहते हैं।
उनकी जिम्मेदारी मरीज की सुरक्षा और दर्दमुक्त उपचार सुनिश्चित करना है।”
इस अवसर पर सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.आर. बेन और नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप ने विजेताओं को सम्मानित किया और छात्रों का उत्साहवर्धन किया।
सीपीआर जागरूकता सप्ताह भी संपन्न — छात्रों को दिया जीवनरक्षक प्रशिक्षण
विश्व निश्चेतना दिवस के साथ ही सिम्स में 13 से 17 अक्टूबर तक ‘सीपीआर जागरूकता सप्ताह’ भी मनाया गया।
इस दौरान छात्रों, जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को हार्ट अरेस्ट या सांस रुकने जैसी स्थिति में तत्काल सहायता के लिए आवश्यक सीपीआर तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
16 अक्टूबर को क्विज़ प्रतियोगिता और 17 अक्टूबर को पोस्टर प्रतियोगिता व नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में डीएमई डॉ. यू.एस. पैकरा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
साथ ही डॉ. भावना रॉयज़ादा, डॉ. श्वेता कुजूर, डॉ. मिल्टन देब्बेर्मा, डॉ. सुरभि बंजारे, डॉ. यश तिवारी, डॉ. प्रशांत पैकरा और डॉ. अर्पणा मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।
विभागीय घोषणा — नियमित रूप से होंगे कौशल विकास प्रशिक्षण
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने घोषणा की कि निश्चेतना विभाग जल्द ही आपातकालीन चिकित्सा, दर्द प्रबंधन और सीपीआर से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम नियमित रूप से शुरू करेगा।
उन्होंने कहा —
“व्यावहारिक प्रशिक्षण से ही चिकित्सक वास्तविक परिस्थितियों में अधिक सक्षम बनते हैं।
सिम्स का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से दक्ष चिकित्सक बनाना है।”
विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने कहा कि
“विश्व निश्चेतना दिवस को अब सिम्स की वार्षिक संस्थागत गतिविधियों में स्थायी रूप से शामिल किया जाएगा।”
क्यों महत्वपूर्ण है निश्चेतना विशेषज्ञ की भूमिका
- मरीज को दर्द व भय से मुक्त रखने का कार्य
- सर्जरी के दौरान वाइटल पैरामीटर्स (हार्टबीट, ऑक्सीजन, ब्लड प्रेशर) की सतत निगरानी
- आपात स्थिति में कार्डियक अरेस्ट, ट्रॉमा, और आईसीयू सपोर्ट में मुख्य भूमिका
- दर्द प्रबंधन और पुनर्वास चिकित्सा में भी सहायक



