मो इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ की पुलिस पर फिर कलंक — पचपेड़ी थाने के सरकारी क्वार्टर में डील का वीडियो वायरल, पत्नी ने जेवर-ज़मीन गिरवी रख दी रिश्वत की रकम
रायपुर/बिलासपुर, 17 अक्टूबर 2025।
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पुलिस की साख पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पचपेड़ी थाना परिसर में पदस्थ एक कॉन्स्टेबल गजपाल जांगड़े का रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह नोटों के बंडल गिनते दिखाई दे रहा है। वीडियो में पास में बैठी महिला कह रही है — “बस इतने ही पैसे हैं, मेरे पति को छोड़ दीजिए।” यह दृश्य सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि आम नागरिक की विवशता का प्रतीक बन गया है।
घटना: केस में फंसाने की धमकी, फिर हुई पैसों की डील
जानकारी के अनुसार, मानिकचौरी निवासी जोगी नायक को पुलिसकर्मियों ने आबकारी एक्ट के केस में फंसाने की धमकी दी थी।
6 अक्टूबर की शाम उन्हें हेड कॉन्स्टेबल हरवेंद्र खुंटे ने पचपेड़ी थाना स्थित सरकारी क्वार्टर बुलाया। वहां पहले से कॉन्स्टेबल गजपाल जांगड़े, अजय मधुकर और मुरीत बघेल मौजूद थे।
चारों ने मिलकर जोगी नायक से ₹2 लाख की रिश्वत मांगी — मामला दर्ज न करने और “50 लीटर शराब की फर्जी जब्ती” से बचाने के एवज में।
डर के मारे पीड़ित की पत्नी कामिनी नायक ने अपने जेवर और जमीन गिरवी रखकर ₹1,05,000 नकद जुटाए और क्वार्टर में पहुंचकर रकम सौंपी।
इसी दौरान किसी ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया — जो अब वायरल है।
वीडियो में क्या दिखा
वायरल फुटेज में कॉन्स्टेबल गजपाल जांगड़े 500-500 रुपये की गड्डियां गिनते नजर आता है।
पास में महिला विनती कर रही है —
“बस इतने ही पैसे हैं, मेरे पति को छोड़ दीजिए।”
कमरे में तीन अन्य पुलिसकर्मी मौजूद हैं, लेकिन कोई रोकने की कोशिश नहीं करता।
सोशल मीडिया पर वीडियो फैलते ही बिलासपुर पुलिस की कार्यशैली पर भारी सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित की शिकायत मुख्यमंत्री तक

जोगी नायक ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा को पत्र भेजकर चारों पुलिसकर्मियों —
गजपाल जांगड़े, अजय मधुकर, मुरीत बघेल और हरवेंद्र खुंटे — के खिलाफ तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।
शिकायत में लिखा गया है कि “वीडियो वायरल होने के बाद भी आरोपी पुलिसकर्मी हमें धमका रहे हैं।”
फिलहाल पुलिस मुख्यालय ने प्राथमिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
बिलासपुर पुलिस पर बार-बार उठते सवाल
यह पहला मामला नहीं जब बिलासपुर पुलिस पर रिश्वत या दबाव में काम करने के आरोप लगे हों।
- सीपत थाना मामला (सितंबर 2025) — एक कॉन्स्टेबल पर FIR दर्ज करने के एवज में ₹25,000 लेने का आरोप।
- तखतपुर थाना (अगस्त 2025) — आरोपी से ‘रिहाई’ के नाम पर ₹40,000 की मांग का वीडियो सामने आया।
- सिविल लाइन क्षेत्र (जून 2025) — ट्रक ड्राइवर से ₹10,000 वसूलने पर ASI लाइन अटैच हुआ।
इन घटनाओं की श्रृंखला ने आमजन के विश्वास पर गहरी चोट की है।
“छत्तीसगढ़ पुलिस में बढ़ती रिश्वत की परतें”
जिला हालिया प्रकरण विभागीय स्थिति बिलासपुर (पचपेड़ी) कॉन्स्टेबल गजपाल जांगड़े का रिश्वत वीडियो वायरल HQ जांच जारी सीपत FIR दर्ज न करने के एवज में ₹25,000 मांग ASI सस्पेंड तखतपुर जमानत के लिए रिश्वत मांगने का आरोप SHO लाइन अटैच रायपुर (पंडरी) वाहन चालकों से उगाही का वीडियो वायरल ट्रैफिक विभाग जांच में कोरबा ठेकेदार से सुरक्षा क्लियरेंस के नाम पर रकम वसूली विभागीय कार्रवाई लंबित
पुलिस विभाग की छवि पर गहराता दाग
छत्तीसगढ़ पुलिस, जो “जनता का मित्र” बनने की बात करती है, अब जनता के डर का कारण बन रही है।
राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विभाग ने “ज़ीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” नीति अपनाई है, लेकिन
“थानों के स्तर पर नियंत्रण कमजोर है, और छोटे रैंक के कर्मचारियों में जवाबदेही का अभाव।”
पुलिस सुधार विशेषज्ञों का मानना है कि “इंटर्नल विजिलेंस यूनिट्स” को सक्रिय कर नियमित स्टिंग ऑडिट किए जाने चाहिए।
इनकी भी सुनिए
“जब कानून के रक्षक ही डर का स्रोत बन जाएँ, तो समाज में न्याय की उम्मीद धूमिल होती है। यह वीडियो छत्तीसगढ़ पुलिस की जवाबदेही प्रणाली की विफलता का प्रमाण है।”
— आर मिश्रा, पूर्व पुलिस अधीक्षक एवं प्रशासन विश्लेषक
मेरी भी सुनिए…..
सिस्टमिक फेल्योर या व्यक्तिगत लालच?
जांच सूत्रों के अनुसार, यह मामला व्यक्तिगत लाभ का नहीं, बल्कि थाने स्तर पर “सिस्टमेटिक वसूली संस्कृति” का हिस्सा है।
कई मामलों में वर्दी की आड़ में पुलिसकर्मी स्थानीय शराब कारोबारियों और अपराधियों से रकम वसूलने का नेटवर्क चला रहे हैं।
हालांकि विभागीय अधिकारी इसे “कुछ बुरे तत्वों की करतूत” बताते हैं।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा —
“वीडियो की जांच कराई जा रही है। दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस जनता की सेवा के लिए है, उत्पीड़न के लिए नहीं।”
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- रिश्वत मांगने की शिकायत 181 हेल्पलाइन, FIR पोर्टल, या सीधे DGP कार्यालय ईमेल पर की जा सकती है।
- शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
- रिश्वत देने वाला भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गवाह बन सकता है।
और आखिर में….
यह वीडियो सिर्फ एक रिश्वतखोर कॉन्स्टेबल का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जो कमजोरों को कुचलती और शक्तिशालियों के आगे झुकती है। बिलासपुर की यह घटना पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर करती है — “क्या हमारे थाने न्याय के मंदिर हैं या डर के अड्डे?”



