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बिलासपुर से उमंग सिंघार का दावा: ‘दिलों का रिश्ता अब भी कायम है पर कार्यकर्ताओं की पसंद का वफादार अध्यक्ष बनेगा
मो इसराइल बबलू
संगठन सृजन अभियान की छत्तीसगढ़ एंट्री
कांग्रेस पार्टी का ‘संगठन सृजन अभियान’ अब छत्तीसगढ़ में अपनी निर्णायक अवस्था में प्रवेश कर चुका है।
केंद्रीय पर्यवेक्षक और मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश पर्यवेक्षक पूर्व मंत्री धनेश पाटिला और वरिष्ठ नेता नरेश ठाकुर ने बिलासपुर में कांग्रेस के शहरी और ग्रामीण ब्लॉकों के नेताओं से वन-टू-वन चर्चा कर संगठन की नई रचना की रूपरेखा तय की।
बैठकें कांग्रेस भवन, तुलसी भवन (बहतराई स्टेडियम परिसर) और ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल में क्रमशः आयोजित हुईं। इसमें शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी 01 से 04, रतनपुर ग्रामीण, बेलतरा ग्रामीण, और नगर निगम क्षेत्र के 17 वार्डों के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
“दिलों का रिश्ता अब भी कायम है” — सिंघार का भावनात्मक संदेश
मध्यप्रदेश से आए केंद्रीय पर्यवेक्षक उमंग सिंघार ने अपने संबोधन में कहा कि संगठन सृजन अभियान केवल नियुक्ति नहीं बल्कि कांग्रेस के पुनरुत्थान की प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा —
“भले ही मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दो अलग राज्य बन गए हों, मगर दिलों का रिश्ता अब भी कायम है। जब मुझे छत्तीसगढ़ का पर्यवेक्षक बनाया गया, तो ऐसा लगा जैसे वर्षों बाद अपने बिछड़े परिवार से मिलने का सौभाग्य मिला हो।”
सिंघार ने स्पष्ट किया कि अब संगठन को “नए नेतृत्व, नई सोच और नए कार्य-संस्कृति” की जरूरत है।
‘प्रतीकात्मक अध्यक्ष’ नहीं, ‘मैदान में सक्रिय चेहरा’ चाहिए
सिंघार ने यह भी कहा कि संगठन में पद अब महज सम्मानसूचक नहीं रहेंगे।
“जो भी अध्यक्ष बनेंगे, उन्हें लगातार क्षेत्र में रहना होगा। कांग्रेस भवन में जनता से मिलना, छोटे-छोटे जनमुद्दों जैसे राशन कार्ड, मेडिकल, प्रमाणपत्र आदि का निराकरण कराना होगा। जनता से जुड़ाव और निरंतर सक्रियता ही अब नेतृत्व की कसौटी होगी।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज “लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई” लड़ रही है —
“आज़ादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी थी, जबकि तब भाजपा के पूर्ववर्ती संगठन अंग्रेज़ों की बी-टीम की भूमिका में थे। इसलिए लोकतंत्र के मूल्य वे समझ ही नहीं सकते। आज स्थिति यह है कि संस्थानों में मनमाने ढंग से अपने लोगों को बैठाया जा रहा है — अंग्रेज़ चले गए, लेकिन अब नए अंग्रेज़ आ गए हैं।”
5000 आवेदन, लेकिन ‘फूल छाप कांग्रेसियों’ की चुनौती बरकरार
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया बेहद व्यापक है।
राज्य के 41 संगठनात्मक जिलों में अब तक 5000 से अधिक आवेदन जिला अध्यक्षों और शहरी इकाइयों के लिए आए हैं।
हर जिले से 6 नामों का पैनल बनाकर उसे राज्य नेतृत्व और फिर हाईकमान को भेजा जाना है।
परंतु, चुनौती केवल चयन की नहीं है — बल्कि ‘फूल छाप कांग्रेसियों’ की पहचान की है।
ये वे कार्यकर्ता हैं जो चुनाव के समय टिकट न मिलने या उपेक्षा होने पर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को नुकसान पहुंचाने में संकोच नहीं करते।
राज्य संगठन मानता है कि ऐसे “अवसरवादी कांग्रेसियों” की संख्या कम नहीं है।
यही वजह है कि यह अभियान “संगठन सृजन बनाम संगठन संकट” की दिशा में जा सकता है।
कांग्रेस की दो लड़ाइयाँ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ कांग्रेस इस समय दो समानांतर लड़ाइयाँ लड़ रही है —
- भीतर की लड़ाई: संगठन को पुनर्संगठित कर निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना।
- बाहर की लड़ाई: भाजपा की बढ़ती जमीनी पैठ का सामना करना।
“संगठन सृजन अभियान” को फिल्टरिंग प्रोसेस के रूप में देखा जा रहा है — जो यह तय करेगा कि
2028 के विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस मैदान के कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी होगी या केवल चेहरे बदलने की औपचारिकता में उलझी रहेगी।
उपस्थित नेताओं की ताकत का संकेत



बैठक में पूर्व सांसद इंग्रिड मैकलाउड, विधायक अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक रश्मि आशीष सिंह, सियाराम कौशिक,
पूर्व महापौर रामशरण यादव, पूर्व महामंत्री अर्जुन तिवारी, प्रदेश सचिव प्रशांत मिश्रा,
आशीष सिंह, शेख नजीरुद्दीन, राजेन्द्र शुक्ला, प्रमोद नायक,
पंकज सिंह, महेंद्र गंगोत्री, सीमा घृतेश, हमीदा बेगम सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यह उपस्थिति संकेत देती है कि बिलासपुर संगठन के भीतर नए चेहरे और पुराने अनुभवों का संतुलन अभी भी कायम है।
“सृजन बनाम अनुशासन” की अग्निपरीक्षा
कांग्रेस का यह अभियान केवल संगठनात्मक सुधार नहीं बल्कि राजनीतिक आत्मशुद्धि की प्रक्रिया है।
उमंग सिंघार की छत्तीसगढ़ एंट्री ने यह संदेश दे दिया है कि पार्टी अब निष्ठा और फील्ड वर्क को ही असली पहचान मानेगी।
परंतु सवाल यह है —
क्या कांग्रेस “सृजन” के साथ “अनुशासन” को भी साध पाएगी?
क्योंकि “फूल छाप कांग्रेस” का संकट वही पुराना घाव है,
जिसे संगठन ने कई बार धोने की कोशिश की —
पर हर बार राजनीति ने उसे फिर से गहरा कर दिया।



