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“सड़क पर जन्मदिन की पार्टी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ‘प्रहार’ — कहा, अब राज्य सरकार असफल साबित हो चुकी है”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मो इसराइल बबलू

स्वास्थ्य मंत्री के निज सचिव द्वारा पत्नी का जन्मदिन सड़क पर मनाने पर कोर्ट का कड़ा रुख, कहा — अब उल्लंघनकर्ताओं पर सीधे मुकदमा चलेगा, सरकार केवल एफआईआर दर्ज कराकर नहीं बच सकती।


बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक बार फिर प्रदेश में सड़क पर जन्मदिन मनाने, केक काटने, और पटाखे फोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र प्रसाद की खंडपीठ ने सोमवार को हुई जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से दो टूक कहा —

“अब शायद आप लोग असफल हो गए हैं। अदालत के आदेशों के बावजूद अगर यह स्थिति बनी हुई है, तो अब हम सीधे ऐसे व्यक्तियों को पक्षकार बनाकर अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाएंगे।”


स्वास्थ्य मंत्री के सचिव के जन्मदिन समारोह ने बढ़ाई अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एक वायरल वीडियो पर संज्ञान लिया जिसमें स्वास्थ्य मंत्री के निज सचिव राजेंद्र दास ने अपनी पत्नी का जन्मदिन सड़क पर आतिशबाजी और केक काटकर मनाया। यह वीडियो चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र के डोमनहिल स्थित सोनावनी नाका (दादू लाहिड़ी चौक) का बताया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा —

“अगर स्वास्थ्य मंत्री का नाम इस प्रकरण से जुड़ रहा है, तो उन्हें खुद इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। यह न केवल कानून व्यवस्था का, बल्कि शासन की छवि का भी सवाल है।”


‘सड़क संस्कृति’ पर हाईकोर्ट का रुख और सख्त हुआ

कोर्ट ने कहा कि सड़क पर कारों की कतार लगाकर, बोनट पर केक काटकर और पटाखे फोड़कर सार्वजनिक उपद्रव करना अब एक “खतरनाक फैशन” बन गया है। अदालत ने साफ चेतावनी दी —

“यह सिर्फ ट्रैफिक उल्लंघन नहीं, बल्कि अदालत के अधिकार को चुनौती है। अगर सरकार कार्रवाई करने में असहाय है, तो अदालत अपने स्तर पर दंडात्मक कदम उठाएगी।”


कोर्ट की तीखी टिप्पणी राज्य शासन पर

जनहित याचिका की सुनवाई में महाधिवक्ता से मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया —

“क्या अब सरकार स्थिति पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है? आप केवल एफआईआर दर्ज कराते हैं, फिर वे लोग पाँच या दस हजार का जुर्माना भरते हैं और छूट जाते हैं। अदालत के आदेशों को बार-बार ठेंगा दिखाया जा रहा है।”


🔹 प्रदेश में सड़क पर जन्मदिन मनाने की घटनाएं लगातार जारी

प्रदेश में बीते कुछ वर्षों से सड़क पर लक्जरी कारों के बोनट पर केक काटना, डीजे बजाना, पटाखे फोड़ना और सोशल मीडिया पर वायरल करना एक ट्रेंड बन चुका है।

  • बलरामपुर: डीएसपी तस्लीम आरिफ की पत्नी को कार के बोनट पर जन्मदिन मनाते देख हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।
  • रायपुर: एक कांग्रेस नेता, एक माल ओनर के बेटे और महापौर के पुत्र पर भी सड़क पर आयोजन करने पर कार्रवाई हुई।
  • बिलासपुर: रतनपुर बाईपास पर युवकों ने तलवार से केक काटा, वीडियो वायरल हुआ, कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 9 नाबालिग थे।

हाईकोर्ट ने कहा – अब व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब केवल पुलिसिया एफआईआर से काम नहीं चलेगा। यदि आदेशों की अवहेलना जारी रही, तो व्यक्तिगत स्तर पर दोषियों पर अदालत की अवमानना का मामला चलेगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा —

“अगर कोई व्यक्ति अदालत के अधिकार को चुनौती देना चाहता है, तो उसे बताएँगे कि अदालत का अधिकार कैसे स्थापित किया जाता है।”


छत्तीसगढ़ में ‘सड़क पर सेलिब्रेशन’ की स्थिति

  • हर जिले से वायरल वीडियो: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, चिरमिरी, जांजगीर, बलरामपुर तक दर्जनों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
  • एफआईआर दर्ज होने के बावजूद दोहराव: 5 से 10 हजार का चालान भरकर आयोजक बच निकलते हैं।
  • कानूनी प्रावधान: भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), 191(2) और शस्त्र अधिनियम की धारा 25, 27 के तहत प्रकरण दर्ज किए जाते हैं।
  • पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती: रात्रिकालीन निगरानी के अभाव और सोशल मीडिया पर ‘वायरल संस्कृति’ ने प्रशासन को कठिन स्थिति में डाल दिया है।

अदालत का धैर्य अब समाप्ति पर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि सार्वजनिक स्थलों पर निजी उत्सवों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
अदालत अब “व्यवस्था की असफलता” को सीधे “व्यक्तिगत जवाबदेही” में बदलने की तैयारी में है — जो प्रशासन और सत्ता दोनों के लिए एक सशक्त संदेश है।

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