“अब फाइलों में नहीं, फील्ड में सुबह 7:00 से काम दिखना चाहिए”—वार्डों में जाकर मॉनिटरिंग भी करेंगे
मो इसराइल बबलू
बिलासपुर,रायपुर, 12 अक्टूबर 2025 |
यह एक लाइन रविवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में 9 घंटे चली कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 की आत्मा थी, जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सधे शब्दों में प्रशासन को झकझोर दिया।
बैठक शुरू होने से पहले ही संकेत साफ थे — यह सिर्फ समीक्षा नहीं, सिस्टम को रीसेट करने की कवायद थी।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा, “जनहित के कार्यों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। रिपोर्टों से नहीं, ज़मीन पर परिणाम चाहिए।”
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, सभी विभागीय सचिव, संभागायुक्त और कलेक्टर मौजूद थे। लेकिन माहौल कॉन्फ्रेंस रूम से ज़्यादा कमांड रूम जैसा रहा — जहाँ हर निर्देश एक अल्टीमेटम की तरह गूंजा।

मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी
“धान खरीदी में गड़बड़ी या रेत खनन में मिलीभगत — कोई भी अधिकारी बच नहीं पाएगा। जीरो टॉलरेंस नीति सिर्फ घोषणा नहीं, कार्रवाई की चेतावनी है।”
मुख्यमंत्री ने धान खरीदी की तैयारियों पर सबसे ज्यादा जोर दिया।
कहा —
- “हर खरीदी केंद्र की मॉनिटरिंग हो।”
- “अनियमितता पाई गई तो कलेक्टर सीधे जिम्मेदार होंगे।”
- “सीमावर्ती जिलों में अवैध धान आवाजाही रोकने विशेष चौकसी हो।”
उन्होंने घोषणा की कि अब खरीदी प्रक्रिया इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मॉनिटर होगी — ताकि “गड़बड़ी दिखे तो कार्रवाई रियल टाइम में हो।”
1 : फील्ड में उतरने का अल्टीमेटम
“कलेक्टर सुबह 7 बजे से पहले वार्डों में निकलें।
रिपोर्ट नहीं, वास्तविक निरीक्षण चाहिए।”
— मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि “सफाई, पेयजल, और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता का आंकलन अब फाइलों से नहीं, सुबह-सुबह फील्ड विजिट से होगा।”
उन्होंने आदेश दिया कि नगरीय निकायों में हर सुबह निरीक्षण अनिवार्य हो और स्वच्छ भारत मिशन के भुगतान में देरी करने वाले अफसरों की जवाबदेही तय की जाए।
2 : शिक्षा पर ‘क्लास इन क्लास’
“शिक्षण सामग्री अलमारियों में नहीं, कक्षाओं में दिखनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा विभाग की समीक्षा में कहा —
- “हर बच्चे की APAR ID दिसंबर तक बने।”
- “ड्रॉपआउट शून्य और नामांकन 100% का लक्ष्य हर हालत में पूरा करें।”
- “अच्छे शिक्षक सम्मानित होंगे, लापरवाहों पर कार्रवाई तय।”
उन्होंने ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ शुरू करने की घोषणा की, जिसमें स्कूलों की सामाजिक ग्रेडिंग और परीक्षा परिणाम सुधार योजना लागू होगी।
3 : स्वास्थ्य में ‘फील्ड-ऑडिट कल्चर’
“हर मातृत्व मृत्यु पर अनिवार्य ऑडिट — ताकि गलती दोहराई न जाए।”
मुख्यमंत्री ने कहा —
- “प्रसव सेवाएं 100% संस्थागत हों।”
- “टीकाकरण की फील्ड वेरिफिकेशन की जाए।”
- “एनआरसी और वेलनेस सेंटर सक्रिय किए जाएं।”
- “मलेरिया हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए।”
लक्ष्य — “मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़”।
4 : युवाओं के लिए ‘स्किल-रीलोड’
“प्रशिक्षण सिर्फ प्रमाणपत्र नहीं, रोजगार का माध्यम बने।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में
- स्किल गैप एनालिसिस किया जाएगा,
- रोजगार मेले हर तिमाही होंगे,
- और प्रशिक्षित युवाओं को लोन और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि लाइवलीहुड कॉलेजों के लिए भूमि शीघ्र चिन्हांकित हो और कौशल विकास योजनाएं स्थानीय उद्योगों की जरूरतों से जुड़ें।
5 : जनजातीय अंचलों पर ‘धरती आबा ड्राइव’
“आदिवासी गाँव आत्मनिर्भर बनें — यही धरती आबा अभियान का लक्ष्य है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 विभागों के तालमेल से
हॉस्टल, पेयजल, आजीविका, डेयरी, मछलीपालन और पर्यटन योजनाएं एकीकृत रूप से लागू हों।
उन्होंने बताया कि
“आदि कर्मयोगी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है — 1.33 लाख वालेंटियर 6650 गांवों में सक्रिय हैं।”
डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही का नया चार्टर
- ई-सेवाएं: अब तक 86 सेवाएं ऑनलाइन — लक्ष्य: 100% डिजिटाइजेशन।
- लोक सेवा गारंटी: सभी आवेदन तय समय सीमा में निपटाए जाएं।
- बायोमेट्रिक उपस्थिति: राज्य व जिला स्तर पर शीघ्र लागू।
- फील्ड इंस्पेक्शन कल्चर: अधिकारियों को आकस्मिक निरीक्षण के आदेश।
मुख्यमंत्री ने कहा — “पारदर्शिता और जवाबदेही कागज पर नहीं, आचरण में दिखनी चाहिए।”
प्रशासन के लिए अंतिम संदेश
“रैंकिंग सिर्फ आंकड़ा नहीं, जनता के भरोसे की कसौटी है।
जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें, जनता से संवाद बढ़ाएं — यही सुशासन की पहचान है।”
✍️ Mohammed israil
राज्य प्रशासनिक तंत्र के भीतर सुशासन, जवाबदेही और फील्ड विज़न पर केंद्रित यह रिपोर्ट मंत्रालय की “सबसे अनुशासित कॉन्फ्रेंस” के दस्तावेज़ के रूप में सामने आई है — जहाँ मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि शासन अब “फाइल-आधारित नहीं, फील्ड-आधारित” होगा।



