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शहर संगठन को नई ऊर्जा की तलाश, राजकुमार तिवारी बन सकते हैं पहली पसंद, अध्यक्ष पद की दौड़ में चल रहे हैं आगे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मो इसराइल बबलू


बिलासपुर | विशेष रिपोर्ट

शहर कांग्रेस संगठन Bilaspur में इन दिनों एक बार फिर से नई सोच और नये नेतृत्व की तलाश जारी है।
पार्टी के “संगठन सृजन अभियान” के बीच बिलासपुर शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं — राजकुमार तिवारी, जिनका राजनीतिक जीवन कांग्रेस के मूल मूल्यों, प्रतिबद्धता और संघर्षशीलता का जीवंत उदाहरण है।


छात्र राजनीति से कांग्रेस की मुख्यधारा तक

राजकुमार तिवारी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर संगठन के ऊँचे पदों तक पहुंचा है।
वर्ष 1994-95 में शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के निर्वाचित सचिव और 1995-96 में अध्यक्ष (NSUI) के रूप में उन्होंने नेतृत्व की पहली सीढ़ी रखी।
जल्द ही वे प्रदेश सचिव (NSUI) 1997 बने और उसके बाद संगठन के कई दायित्वों का निर्वहन करते हुए लगातार आगे बढ़ते गए।
2001-02 में कांग्रेस सचिव, 2005-10 में जिला महासचिव, 2010-14 और 2018-21 में उपाध्यक्ष और वर्तमान में महामंत्री, शहर कांग्रेस कमेटी बिलासपुर के रूप में सक्रिय हैं।

हर पद पर उनकी पहचान एक कार्यकर्ता-नेता की रही है — जो केवल पद पर नहीं, मैदान में सक्रिय रहकर संगठन को जीवंत बनाए रखते हैं।


नेतृत्व का अनुभव, संगठन की समझ

राजकुमार तिवारी का अनुभव केवल राजनीतिक पदों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने परिवर्तन यात्रा में प्रदेश की 30 से अधिक विधानसभाओं में जाकर संगठनात्मक एकता और जनसंवाद की मिसाल कायम की।
वे 1998, 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के लिए खुडिया जोन प्रभारी रहे।
2019 लोकसभा चुनाव में गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र प्रभारी के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
2024 कोटा विधानसभा ब्लॉक कांग्रेस चुनाव में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी रणनीतिक समझ, संगठनात्मक पकड़ और नेतृत्व कौशल उन्हें पार्टी के विश्वसनीय चेहरों की पंक्ति में खड़ा करती है।


जनसंपर्क और सामाजिक सरोकार का समन्वय

राजकुमार तिवारी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि समाज से गहरे जुड़े हुए व्यक्ति हैं।
वे छत्तीसगढ़ ब्राह्मण समाज के सक्रिय सदस्य हैं और भजन-पुराण आयोजन समिति के संयोजक के रूप में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन, रेल विभाजन आंदोलन, अरपा विकास संघर्ष समिति और हाईकोर्ट बिलासपुर आंदोलन जैसे जनआंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
नगर निगम बिलासपुर के निर्वाचित पार्षद (2013-19) के रूप में उन्होंने जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी और जनता से सीधा संवाद बनाए रखा।


जनपक्षधरता और संगठन निष्ठा की मिसाल

उनकी राजनीति व्यक्ति से अधिक विचार और संगठन के प्रति समर्पण पर आधारित है।
वे न केवल कांग्रेस के हर संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में रहे हैं, बल्कि पार्टी के हर कार्यकर्ता से व्यक्तिगत जुड़ाव बनाए रखते हैं।
उनकी कार्यशैली “सुनो, समझो और साथ चलो” के सिद्धांत पर आधारित है — यही वजह है कि कार्यकर्ताओं में वे पहली पसंद के रूप में उभर रहे हैं।


युवा सोच और वरिष्ठ अनुभव का संगम

राजकुमार तिवारी उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो परंपरा और परिवर्तन के बीच सेतु का कार्य करती है।
उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जो पार्टी की वैचारिक गहराई को समझते हुए, आधुनिक राजनीतिक रणनीति में भी दक्ष हैं।
शहर कांग्रेस को जिस ऊर्जा, पारदर्शिता और संवादशील नेतृत्व की आवश्यकता है —
राजकुमार तिवारी उस आवश्यकता के सर्वाधिक सशक्त प्रतीक हैं।


संगठन के लिए उपयुक्त और समय की मांग

कांग्रेस संगठन में समय-समय पर ऐसे नेताओं की जरूरत होती है जो संघर्ष की राह से निकलकर नेतृत्व की ऊँचाई तक पहुंचे हों।
राजकुमार तिवारी का नाम इस परिप्रेक्ष्य में एक स्वाभाविक और सशक्त विकल्प के रूप में सामने आता है।
उनका अनुभव, कार्यकर्ताओं से गहरा जुड़ाव, संगठनात्मक दृष्टि और समाजसेवी छवि —
उन्हें न केवल शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार बनाती है,
बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस की नई ऊर्जा और नई दिशा के प्रतीक के रूप में भी स्थापित करती है।

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