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मरम्मत में ‘भ्रष्टाचार’ का खेल! — आदिवासी विकास विभाग की 82 लाख की निविदा निरस्त

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मो इसराइल बबलू

छात्रावासों की जीर्णोद्धार योजना में अनियमितता के आरोप, लिपिक पर रिश्तेदारों को ठेका दिलाने का आरोप; सहायक आयुक्त ने कहा– पुराने कार्यों की शिकायतों के बाद कार्रवाई

बिलासपुर

बिलासपुर।
आदिवासी विकास विभाग बिलासपुर द्वारा छात्रों के लिए संचालित छात्रावासों और आश्रमों की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्यों के लिए जारी 82.99 लाख रुपए की निविदा को निरस्त कर दिया गया है। विभाग के सहायक आयुक्त कार्यालय से 4 अगस्त 2025 को जारी यह निविदा अब रद्द कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, विभाग में पिछले कुछ वर्षों से मरम्मत के नाम पर भारी वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। उच्च अधिकारियों को भेजी गई जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, मापदंड और प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता की गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया।


🔸 सहायक आयुक्त बोले – मेरे आने से पहले की अनियमितताएं सामने आईं

सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) पीसी लहरें ने कहा कि

“विभाग में मेरे पदभार ग्रहण करने से पूर्व कुछ निर्माण कार्यों में शिकायतें मिली थीं। इसकी जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगामी कार्यवाही तक निविदा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।”


🔸 लिपिक पर रिश्तेदारों को ठेका देने का आरोप

विभागीय सूत्रों के अनुसार, कार्यालय में पदस्थ एक वरिष्ठ लिपिक संदीप (उपनाम सुरक्षित) का नाम इस पूरे प्रकरण में सामने आ रहा है। आरोप है कि पिछले वर्षों में जारी कार्यों में उसने अपने रिश्तेदारों और परिचित ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया, जिसके कारण कई कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगे।
बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से निर्माण और मरम्मत कार्यों की फाइलें देख रहा था।


जिला प्रशासन सख्त, जांच टीम गठित करने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों — जैसे भवनों में सीलन, पानी रिसाव, अधूरे बाउंड्री वॉल और घटिया मरम्मत — को देखते हुए अंतरिक ऑडिट रिपोर्ट मंगाई जा सकती है।
यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए, तो विभागीय स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।


🔸 निविदा विवरण एक नज़र में

क्रमांक कार्य का नाम विकासखण्ड स्वीकृत राशि (लाख ₹) अमानत राशि (₹) 1 से 16 तक विभिन्न छात्रावास/आश्रम भवनों का जीर्णोद्धार कार्य बिलासपुर, कोटा, मस्तुरी, तखतपुर कुल 82.99 लाख कुल 83,000


1: निविदा रद्द होने की आधिकारिक तिथि

  • जारी हुई थी: 04 अगस्त 2025
  • प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि: 25 अगस्त 2025
  • निरस्तीकरण आदेश जारी: 09 सितम्बर 2025

2: विभागीय सूत्रों का कहना

“पिछले वर्षों में छात्रावास मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कई भवनों की हालत जस की तस है।”


3: आगे क्या होगा?

  • विभागीय जांच समिति गठित की जाएगी
  • लिपिक सहित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी
  • नई निविदा प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से जारी होगी

क्या लिपिक पर होगी कार्रवाई

आदिवासी छात्रों के लिए बनाए गए छात्रावासों की मरम्मत योजनाओं में धांधली का सिलसिला अब जांच के घेरे में है। निविदा निरस्त होने के बाद अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिक गई हैं।

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