Mohammed israil
विश्व में लाख में एक केस, भारत में अब तक गिने-चुने मामले सामने आए
बिलासपुर, रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल में जन्मे एक नवजात ने पूरे चिकित्सा जगत को चौंका दिया। 28 वर्षीय प्रसूता ने 1 अक्टूबर को जिस बच्चे को जन्म दिया, वह दुर्लभ जन्मजात विकृति “मरमेड सिंड्रोम” (सिरेनोमेलिया) के साथ पैदा हुआ। शिशु का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह विकसित था, लेकिन कमर से नीचे का शरीर नहीं बन पाया। दोनों पैर आपस में जुड़कर एक पूंछ जैसी आकृति बना चुके थे, जो समुद्री मरमेड (जलपरी) की तरह दिखाई दे रहा था। जन्म के बाद नवजात को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और वह करीब तीन घंटे तक जीवित रहा।
केस का पूरा विवरण

- स्थान: जिला अस्पताल, धमतरी
- मां की उम्र: 28 वर्ष
- डिलीवरी: 1 अक्टूबर को सिजेरियन से हुई
- शिशु का वजन: लगभग 800 ग्राम
- जन्म के समय स्थिति: जिंदा, ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया
- जीवित समय: लगभग 3 घंटे
डॉक्टर की जानकारी
- स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि शिशु के आंख, नाक और हृदय सामान्य थे, लेकिन रीढ़ की हड्डी से नीचे का हिस्सा विकसित नहीं हुआ।
- जननांग नहीं बने थे, और पैर आपस में जुड़कर एक पूंछनुमा संरचना बना चुके थे।
- डॉ. रागिनी के अनुसार, उन्होंने अपने करियर में अब तक सिर्फ दो ऐसे केस देखे हैं।
मरमेड सिंड्रोम क्या है?
- वैज्ञानिक नाम: सिरेनोमेलिया (Sirenomelia)
- यह एक दुर्लभ जन्मजात विकार है, जिसमें बच्चे के निचले अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते।
- पैरों के जुड़ जाने से वह मरमेड टेल (जलपरी की पूंछ) जैसी संरचना बन जाती है।
- जननांगों का अभाव, आंतरिक अंगों का अधूरा विकास भी देखने को मिलता है।
मरमेड सिंड्रोम के तथ्य
दुनिया में स्थिति:
- अनुमानतः 1 लाख जन्मों में 1 केस मिलता है।
- 1542 से लेकर अब तक सिर्फ करीब 300 केस दर्ज हुए हैं।
- चिकित्सा साहित्य के अनुसार यह दुनिया की सबसे दुर्लभ जन्मजात स्थितियों में से एक है।
भारत में केस:
- वर्ष 2016, उत्तर प्रदेश: देश का पहला मरमेड सिंड्रोम केस सामने आया था।
- वह बच्चा मात्र 10 मिनट तक जीवित रहा।
- धमतरी का यह केस देश में गिने-चुने मामलों में शामिल हुआ है।
कारण क्या हो सकता है?
- अब तक कोई निश्चित कारण तय नहीं हुआ है।
- माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान कुछ दवाइयों का असर,
मेटाबोलिक डिसऑर्डर या गर्भाशय में रक्त आपूर्ति की समस्या
इस तरह की विकृति का कारण बन सकती है।
डॉक्टरों की राय
“मरमेड सिंड्रोम एक बेहद रेयर बर्थ डिफेक्ट है। दुनिया में लाखों बच्चों में से सिर्फ एक बच्चा इसके साथ जन्म लेता है। चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से यह केस बेहद महत्वपूर्ण है।”
— डॉ. रागिनी सिंह ठाकुर, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल धमतरी
चिकित्सा विज्ञान के लिए बड़ी चुनौती
धमतरी का यह मामला एक बार फिर बता गया है कि जन्मजात दुर्लभ विकृतियां अब भी चिकित्सा विज्ञान के लिए बड़ी चुनौती हैं। मरमेड सिंड्रोम जैसे मामलों की जांच और शोध आने वाले समय में गर्भावस्था प्रबंधन और भ्रूण स्वास्थ्य पर नई जानकारी दे सकते हैं।



