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पति को “पालतू चूहा” कहना और माता-पिता से अलग करने का दबाव — मानसिक क्रूरता, हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज की

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील को खारिज कर दिया। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी उसे “पालतू चूहा” कहती थी और लगातार दबाव डालती थी कि वह अपने माता-पिता को छोड़कर केवल उसके साथ रहे। अदालत ने माना कि यह आचरण मानसिक क्रूरता और परित्याग की श्रेणी में आता है।

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिविजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भारतीय संयुक्त परिवार की परंपरा में पति को उसके माता-पिता से अलग करने का दबाव क्रूरता माना जाएगा।


मामला क्या है?

  • विवाह: वर्ष 2009 में दंपती का विवाह हुआ।
  • संतान: दोनों का एक 12 वर्षीय पुत्र है।
  • आरोप: पत्नी पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए दबाव डालती रही, पति को “पालतू चूहा” कहकर अपमानित किया।
  • परित्याग: बच्चे के जन्म के बाद पत्नी अपने मायके चली गई और फिर कभी पति के साथ नहीं रही।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ

“प्रतिवादी और उसके परिवार के मौखिक बयान, जबरदस्ती और अपीलकर्ता द्वारा की गई आलोचनाएं सीधे तौर पर क्रूरता की कानूनी परिभाषा में आती हैं।” — डिविजन बेंच

“भारतीय संयुक्त परिवार की परंपराओं में, पति को माता-पिता से दूर करने के लिए मजबूर करना निर्दोष व्यवहार नहीं है, बल्कि मानसिक क्रूरता है।” — हाईकोर्ट


हाईकोर्ट का फैसला

  • फैमिली कोर्ट (2019) के तलाक आदेश को बरकरार रखा गया।
  • पत्नी की अपील खारिज की गई।
  • पति ने क्रूरता और परित्याग के आधार को साबित किया।
  • पत्नी वैवाहिक अधिकारों की बहाली का दावा सिद्ध नहीं कर सकी।

पत्नी के संदेश पर अदालत की टिप्पणी

पत्नी द्वारा भेजे गए संदेश में लिखा था —
“अगर आप अपने माता-पिता को छोड़कर मेरे साथ रहना चाहते हैं तो जवाब दें अन्यथा मत पूछो।”

अदालत ने कहा, यह स्पष्ट करता है कि पत्नी पति से लगातार माता-पिता से अलग होने की मांग कर रही थी।


बच्चे के लिए आदेश

  • पति को अपनी पत्नी को ₹5 लाख भरण-पोषण राशि देना होगा।
  • यह राशि 12 वर्षीय पुत्र की देखभाल और भरण-पोषण के मद्देनज़र दी जाएगी।

कानूनी आधार:

  • मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty)
  • परित्याग (Desertion)

📍 महत्व:

  • विवाह विच्छेद (Divorce) में पत्नी का आचरण मुख्य कारण साबित।
  • भारतीय संयुक्त परिवार की परंपरा को न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट की बेंच:

  • जस्टिस रजनी दुबे
  • जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद

फैसला वर्ष:

  • फैमिली कोर्ट: 2019
  • हाईकोर्ट: 2025

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