बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य को मिलाकर गठित गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व को हाल ही में भारत का 56वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है। यह निर्णय न केवल बाघों के संरक्षण बल्कि जैव विविधता को बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है और मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के निकट है। यह क्षेत्र न केवल बाघों बल्कि हाथी, तेंदुआ, गौर, चीतल और कई अन्य वन्यजीवों का भी प्राकृतिक आवास है।भोपाल के जाने-माने पर्यावरणविद् और वन्यजीव प्रेमी अजय दुबे ने इस टाइगर रिजर्व को मान्यता दिलाने के लिए 2019 से लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ी। उन्होंने इस क्षेत्र को बाघ संरक्षण के तहत लाने की आवश्यकता को बार-बार रेखांकित किया और इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक मुद्दा बनाया। उनके अथक प्रयासों और समर्पण के कारण यह क्षेत्र अब संरक्षित किया गया है।
पर्यावरण और संरक्षण के लिए एक बड़ी जीत
श्री अजय दुबे ने कहा, “यह घोषणा न केवल बाघों के संरक्षण के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की जैव विविधता को बचाने के लिए एक बड़ा कदम है। इस क्षेत्र में संरक्षण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और मुझे खुशी है कि हमारी मेहनत रंग लाई।”
अंतरराष्ट्रीय महत्व
गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व का गठन भारत के टाइगर रिजर्व नेटवर्क को और मजबूत करेगा। यह निर्णय न केवल भारत में बाघों की बढ़ती संख्या के लिए मददगार साबित होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को पहचान दिलाएगा।
स्थानीय समुदाय और पर्यावरण पर प्रभाव
टाइगर रिजर्व घोषित होने से इस क्षेत्र के स्थानीय समुदायों को भी फायदा होगा। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे।गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व का गठन छत्तीसगढ़ और भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित होगा।
छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया पूरी हो गई। अधिसूचना जारी होने के बाद यह उद्यान 2,829.38 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बन गया है।
राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व:
1. इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर: 2,799.08 वर्ग किलोमीटर
2. उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गरियाबंद: 1,842.54 वर्ग किलोमीटर
3. अचानकमार टाइगर रिजर्व, मुंगेली: 557.55 वर्ग किलोमीटर
4. गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व (अधिसूचना जारी होने पर): 2,829.38 वर्ग किलोमीटर
संरक्षण के लिए विशेष संभावना
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को तमोर पिंगला एलिफेंट रिजर्व से जोड़कर यहां बाघ संरक्षण के बेहतर प्रयास किए जा सकते हैं।
केंद्रीय टीम ने प्रबंधन में गिनाई थीं कमियां
केंद्र सरकार ने टाइगर रिजर्व के प्रबंधन में निम्नलिखित कमियों को उजागर किया है:
प्रबंधन प्लान सही ढंग से तैयार नहीं किया गया है।
शिकायतें दर्ज करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
एनजीओ का सहयोग नहीं लिया जा रहा है।
वाइल्डलाइफ प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है।



