


Mohammed israil
सरगुजा के बलरामपुर में 7 साल के मासूम की इंजेक्शन से मौत, सूरजपुर में गर्भवती महिला ने तड़पकर तोड़ा दम
बिलासपुर,सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में स्वास्थ्य सुविधाओं की लापरवाही लगातार मासूम और निर्दोष जानें ले रही है। डॉक्टरों और अस्पतालों की लापरवाही अब आम बात बनती जा रही है। ताज़ा घटनाओं में बलरामपुर में 7 साल के मासूम की इंजेक्शन लगने से मौत हो गई, जबकि सूरजपुर में गर्भवती महिला इलाज के इंतजार में तड़पते हुए दम तोड़ बैठी।
बलरामपुर: मेडिकल स्टोर की लापरवाही से मासूम की मौत
बलरामपुर जिले में 7 साल के बच्चे के पैर में मामूली घाव हुआ था।
परिजन केवल मरहम लेने मेडिकल स्टोर पहुंचे थे।
लेकिन स्टोर संचालक ने जबरन इंजेक्शन लगा दिया।
इंजेक्शन लगते ही बच्चे की हालत बिगड़ी और उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई।
परिजनों का आरोप:
“हम केवल मरहम मांगने गए थे, लेकिन बिना पूछे मेडिकल स्टोर वाले ने इंजेक्शन लगा दिया। उसी के बाद बच्चा बिगड़ा और मौत हो गई।”
सूरजपुर: गर्भवती महिला ने तड़पकर तोड़ा दम
सूरजपुर जिले में एक गर्भवती महिला को सही इलाज नहीं मिल पाया।
अस्पताल और चिकित्सा तंत्र की लापरवाही के चलते महिला ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया।
घटना की पुष्टि स्थानीय लोगों ने की है, लेकिन अभी आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है।
यह घटना उत्तर प्रदेश के भदोही की उस दर्दनाक वारदात से मिलती-जुलती है, जहां गलत इंजेक्शन से गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। उस मामले में अस्पताल को गैर-पंजीकृत पाया गया था और नकली डॉक्टर फरार हो गए थे।
छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य तंत्र सवालों के घेरे में
लगातार सामने आ रहे हादसे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं।
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में झोला-छाप और मेडिकल स्टोर संचालक ही “डॉक्टर” बने बैठे हैं।
जिला अस्पतालों से लेकर मेडिकल कॉलेज तक में अव्यवस्था।
जनता का भरोसा डगमगा चुका है, हर दिन मौत और लापरवाही की नई कहानी।
सरगुजा में क्यों बढ़ रही लापरवाही?
स्वास्थ्य विभाग का ढीला रवैया।
निजी क्लीनिक और मेडिकल स्टोर पर कोई नियंत्रण नहीं।
ग्रामीणों की मजबूरी—“जहां इलाज मिले, वहीं जाना पड़ता है।”



