Mohammed israil
बिलासपुर। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि अब जिले की सभी दुकानों, शो-रूम, अस्पतालों, स्कूलों, बैंकों, एनजीओ और ट्रस्टों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए। यदि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले किसी भी संस्थान ने यह समिति गठित नहीं की तो उस पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

क्या है मामला?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी निजी संस्थानों का सर्वे शुरू करने की तैयारी कर ली है। सहायक श्रम आयुक्त, बिलासपुर ने बताया कि हर संस्थान को यह समिति बनानी होगी और उसकी जानकारी कार्यस्थल पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
समिति की संरचना
- अध्यक्ष: संस्थान में कार्यरत वरिष्ठ महिला कर्मचारी
- अन्य सदस्य: कम से कम 2 महिला कर्मचारी
- बाहरी सदस्य: किसी एनजीओ से जुड़ा प्रतिनिधि
समिति गठन का प्रारूप और विवरण व्हाट्सऐप नंबर 99075-65353 पर उपलब्ध है।
1 : कानून क्या कहता है?
महिला कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013
- 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति अनिवार्य।
- समिति का कार्य: महिला कर्मचारियों की शिकायत सुनना और कार्यवाही करना।
- समिति न होने की स्थिति में संस्थान पर ₹50,000 का जुर्माना।
- बार-बार उल्लंघन करने पर संस्था का लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन रद्द भी किया जा सकता है।
2 : सुप्रीम कोर्ट का आदेश
- सभी सरकारी और निजी संस्थानों को महिला सुरक्षा के लिए समिति गठित करना होगा।
- यदि समिति नहीं बनी तो संबंधित संस्था पर सीधे ₹50,000 का जुर्माना।
- यह आदेश पूरे देश में समान रूप से लागू होगा।
सहायक श्रम आयुक्त, बिलासपुर:
“यह आदेश महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है। हमने सभी संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे शीघ्र ही आंतरिक समिति गठित करें। जिन संस्थानों में समिति नहीं मिलेगी, उन पर कार्रवाई तय है।”
महिला सामाजिक कार्यकर्ता:
“कानून पहले से था, लेकिन इसका पालन ढीला था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब किसी भी संस्था को बहाना बनाने का अवसर नहीं बचेगा। महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल मिलना ही चाहिए।”



