Mohammed israil
बिलासपुर। आमतौर पर पुलिस की छवि अपराधियों की धरपकड़ और कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित मानी जाती है, लेकिन बिलासपुर पुलिस ने इस सोच को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह (IPS) के नेतृत्व में चेतना अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे आओ संवारे कल अपना कार्यक्रम के तहत युवाओं को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण देकर रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बातें1पुलिस का बदलता किरदार 2‘चेतना अभियान’ की अब तक की उपलब्धियां (जून 2024 से) 3क्यों खास है यह पहल?
बिलासपुर। आमतौर पर पुलिस की छवि अपराधियों की धरपकड़ और कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित मानी जाती है, लेकिन बिलासपुर पुलिस ने इस सोच को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह (IPS) के नेतृत्व में चेतना अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे आओ संवारे कल अपना कार्यक्रम के तहत युवाओं को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण देकर रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।



प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बातें
- उद्घाटन : एसएसपी रजनेश सिंह (IPS) द्वारा
- स्थान : महारानी लक्ष्मीबाई कन्या शाला के पास, यूनिवर्सल बिल्डिंग
- तकनीकी सहयोग : NGO जीवधर्णी फाउंडेशन (अध्यक्ष – विकास वर्मा)
- प्रशिक्षण का विषय : कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर कोर्स
- पहला बैच : 73 युवाओं का पंजीकरण
- उद्देश्य : युवाओं का कौशल विकास और रोजगार से जोड़ना
1
पुलिस का बदलता किरदार
- पहले पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों की धरपकड़ तक सीमित माना जाता था।
- अब पुलिस युवाओं के भविष्य निर्माण, शिक्षा और कौशल विकास में भी साझेदार बन रही है।
- यह पहल दर्शाती है कि पुलिस सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास की जिम्मेदारी भी निभा रही है।
2
‘चेतना अभियान’ की अब तक की उपलब्धियां (जून 2024 से)
- यातायात जागरूकता अभियान
- साइबर अपराध नियंत्रण
- महिला एवं बाल अपराधों पर रोकथाम
- नशे के खिलाफ विशेष मुहिम
- ‘सियान चेतना’ – वरिष्ठ नागरिकों के लिए
- ‘आओ संवारे कल अपना’ – बच्चों और युवाओं के लिए
अब कंप्यूटर प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह मिल रही है।
3
क्यों खास है यह पहल?
- बिलासपुर जैसे अर्ध-शहरी जिले में तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित पहुंच।
- निःशुल्क प्रशिक्षण से आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को भी बराबरी का अवसर।
- पुलिस-जन सहयोग का अनोखा उदाहरण।
- रोजगार से जुड़ाव और अपराध से दूरी — दोनों की गारंटी।



