Mohammed israil
बिलासपुर। हाईकोर्ट की लगातार फटकार और चेतावनी के बाद भी शहर और जिले की सड़कों पर बेसहारा मवेशी मौत बांट रहे हैं। हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा। मजबूरी में अब कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह को मोर्चा संभालना पड़ा। सोमवार को समीक्षा बैठक में दोनों अधिकारियों ने आवारा मवेशी हटाने में लापरवाही बरतने वालों को फटकार लगाई और जिम्मेदार पशु मालिकों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने साफ कहा कि सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण रात 10 बजे से 2 बजे तक सड़क पर बैठने वाले मवेशी हैं। इस समय में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं। ऐसे में गश्त को और मजबूत करने, सड़कों पर झुंड में बैठे पशुओं को हटाने और जिम्मेदार मालिकों की पहचान कर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
अब तक एक दर्जन से ज्यादा पशु मालिकों के खिलाफ अपराध दर्ज किए जा चुके हैं। कलेक्टर ने हादसों में मरे मवेशियों को लेकर भी रिपोर्ट तलब की और अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्रामीणों, कोटवार और टैगिंग की मदद से पशु मालिकों की पहचान सुनिश्चित करें।
बैठक में गोधन स्थलों की स्थापना पर भी चर्चा हुई। अब तक केवल 5 पंचायतों से प्रस्ताव आए हैं। कलेक्टर ने सभी एसडीएम और जनपद पंचायत सीईओ को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक पंचायत प्रस्ताव भेजें, ताकि बेसहारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर वहां शिफ्ट किया जा सके।
1 : हाईकोर्ट की फटकार, फिर भी सड़क पर मवेशी
- हाईकोर्ट ने कई बार जताई नाराज़गी
- बार-बार आदेश: सड़क हादसों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें
- फिर भी हालात जस के तस
- हादसों में अब तक कई जानें जा चुकी हैं
2 : कलेक्टर के निर्देश
- रात 10 से सुबह 2 बजे तक सख्त गश्त
- झुंड में बैठे मवेशियों को तत्काल हटाएं
- जिम्मेदार मालिकों की पहचान कर FIR दर्ज करें
- ग्रामीणों और कोटवार की मदद से पहचान पुख्ता करें
3 : कार्रवाई का आंकड़ा
- अब तक दर्ज FIR – 1 दर्जन से अधिक
- पशु मालिकों पर अपराध पंजीबद्ध
- हादसों के जिम्मेदार पर सीधे कार्रवाई
4 : गोधन स्थापना में सुस्ती
- अब तक केवल 5 पंचायतों से प्रस्ताव
- कलेक्टर ने जताई नाराज़गी
- आदेश : सभी पंचायतें तुरंत प्रस्ताव भेजें
- लक्ष्य – बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय देना
5 : बैठक में शामिल अधिकारी
- नगर निगम आयुक्त अमित कुमार
- एडीएम शिवकुमार बनर्जी
- एडिशनल एसपी करियारे
- सभी एसडीएम, जनपद पंचायत सीईओ, सीएमओ
- पशु चिकित्सा विभाग, आरटीओ और पीडब्ल्यूडी अधिकारी



