Mohammed israil
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के मस्तूरी रोड पर जन्मदिन पार्टी मनाने जा रहे युवकों की ओर से की गई खतरनाक स्टंटबाजी को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को “आंखों में धूल झोंकने” जैसा करार दिया और साफ निर्देश दिया कि जब तक कोर्ट अनुमति न दे, तब तक जब्त की गई 18 गाड़ियां छोड़ी नहीं जाएं।
मामला उस वक्त सामने आया जब 19 सितम्बर को मीडिया में यह खबर प्रकाशित हुई कि “फार्म हाउस में पार्टी करने जा रहे युवकों ने खिड़की व सनरूफ से निकलकर किया स्टंट, 18 कारें हुई जब्त।” रिपोर्ट के मुताबिक गांव लवार स्थित फार्म हाउस में जन्मदिन मनाने जा रहे युवक मस्तूरी रोड पर गाड़ियों की खिड़कियों और सनरूफ पर लटककर खतरनाक करतब दिखा रहे थे। इन कारों को लापरवाही और तेज गति से चलाया जा रहा था, जिससे राहगीरों की जान खतरे में पड़ी।
पुलिस पर तल्ख टिप्पणियां
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों पर पुलिस का शिकंजा कसता है, लेकिन जब आरोपी दबंग, पैसेवाले या राजनीतिक रसूखदार होते हैं, तो पुलिस “बिन दांत का शेर” साबित होती है। ऐसे लोगों को मामूली जुर्माना भरकर छोड़ दिया जाता है और वाहन भी लौटा दिए जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को चाहिए कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कठोर धाराओं में अपराध दर्ज करे, ताकि यह युवाओं के लिए सबक बने।
मुख्य सचिव को तलब
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई (23 सितम्बर 2025) तक शपथ-पत्र (एफिडेविट) दाखिल कर बताने का निर्देश दिया है कि इन वाहनों और युवकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।



