कोरबा, कटघोरा पसान, रायगढ़,सरगुजा वह जशपुर में दहशत की स्थिति
Mohammed israil
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इस समय हाथियों के आतंक से कांप रहा है। कोरबा, रायगढ़, सरगुजा,सूरजपुर, जशपुर और कटघोरा जैसे जिलों में जंगली हाथियों ने खेत रौंद डाले, घरों को तोड़ दिया और चावल से लेकर अनाज तक खा गए। पिछले तीन दिनों से जारी कहर ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। किसान तबाह हैं, बच्चे डरे हुए हैं और गांव के गांव दहशत में जी रहे हैं।


पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरबा, कटघोरा, रायगढ़, सूरजपुर और जशपुर में हाथियों के झुंड फसलों को रौंद रहे हैं और रात होते ही गांवों में घुसकर अनाज चुरा ले जा रहे हैं।
रायगढ़ जिले के लैलूंगा वन परिक्षेत्र में हाल ही में हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। सरगुजा में भी अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों ने अपनी जान गंवाई। कोरबा और सूरजपुर में किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। कई घरों में हाथी घुसकर धान और चावल के भंडार तक उठाकर ले गए।
वन विभाग का कहना है कि बरसात के मौसम में जंगलों में भोजन और पानी की कमी हाथियों को गांव की ओर खींच लाती है। लगातार हो रहा जंगल कटाव, खेतों का जंगल तक फैलाव और मानव बस्तियों का विस्तार इस समस्या को और भयावह बना रहा है।
हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि वन विभाग ने “हाथी मित्र ऐप” के जरिए ग्रामीणों को अलर्ट भेजने की व्यवस्था शुरू की है। लेकिन इन कदमों के बावजूद जंगली हाथियों का आक्रामक होना और इंसानी बस्तियों तक पहुंचना रुक नहीं रहा है।
1 : जिलेवार हालात
- रायगढ़: लैलूंगा क्षेत्र में तीन मौतें, कई घर तबाह।
- सरगुजा: चार लोगों की मौत, खेत उजड़े।
- कोरबा: किसानों की फसलें चौपट, पशुधन पर हमले।
- सूरजपुर: हाथियों का झुंड कई गांवों में घुसा, ग्रामीण पलायन को मजबूर।
- जशपुर: धान व मक्का की फसलें रौंदी गईं।
2 : वन विभाग की कार्रवाई
- “हाथी मित्र ऐप” से 10 किमी. दायरे में अलर्ट जारी।
- मृतकों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता।
- फसल नुकसान पर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू।
- खेतों और बस्तियों के बीच प्राकृतिक बैरियर लगाने पर विचार।
- ग्रामीणों को हाथियों के व्यवहार और बचाव तरीकों की ट्रेनिंग।
3 : हाथियों के आक्रामक होने की वजहें
- जंगलों में भोजन और पानी की कमी।
- खेती और जंगल के बीच की सीमाओं का खत्म होना।
- बरसात में जंगलों में संसाधन सीमित हो जाना।
- अवैध बिजली तार और करंट से हाथियों की मौतें, जिसके कारण झुंड और ज्यादा उत्तेजित हो जाते हैं।
4 : शोध से मिले संकेत
- जंगल क्षेत्रों में जहां हाथियों की आवाजाही ज्यादा है, वहीं फसलों का नुकसान सबसे अधिक।
- बड़े और जुड़े हुए जंगल क्षेत्र जरूरी, ताकि हाथी इंसानी बस्तियों की ओर न बढ़ें।
- पारदर्शी और तेज़ मुआवजा नीति की सख्त आवश्यकता।
5 : भयावह आंकड़े
- पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में 300 से अधिक लोग हाथियों के हमलों में मारे गए।
- सैकड़ों एकड़ फसलें हर साल हाथियों द्वारा नष्ट।
- करंट लगने से हाथियों की दर्जनों मौतें दर्ज, जिससे झुंड और अधिक आक्रामक हुए।



