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सिम्स के डॉक्टरों ने किया कमाल, बुजुर्ग के गले से निकाले एक साथ धारदार छह  ब्लेड

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

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बिलासपुर, 14 सितम्बर।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के डॉक्टरों ने रविवार को एक ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने सभी को हैरत में डाल दिया। 74 वर्षीय बुजुर्ग के गले में एक साथ छह सेविंग ब्लेड फंसे थे। स्थिति बेहद गंभीर थी, लेकिन चिकित्सकों ने महज एक घंटे से अधिक समय की जटिल एंडोस्कोपी के माध्यम से सर्जरी कर बुजुर्ग की जान बचा ली। फिलहाल मरीज को आईसीयू में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है और डॉक्टरों का दावा है कि उनके गले के स्वर तंत्र, आहार नली व अन्य हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों की जंगडीन और अधीक्षक की सक्रिय जोड़ीसिम्स की टीम जिनके प्रयास से बची जान गले में ब्लेड या धारदार वस्तु फंसने के खतरे सेवा का संकल्प

बिलासपुर, 14 सितम्बर।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के डॉक्टरों ने रविवार को एक ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने सभी को हैरत में डाल दिया। 74 वर्षीय बुजुर्ग के गले में एक साथ छह सेविंग ब्लेड फंसे थे। स्थिति बेहद गंभीर थी, लेकिन चिकित्सकों ने महज एक घंटे से अधिक समय की जटिल एंडोस्कोपी के माध्यम से सर्जरी कर बुजुर्ग की जान बचा ली। फिलहाल मरीज को आईसीयू में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है और डॉक्टरों का दावा है कि उनके गले के स्वर तंत्र, आहार नली व अन्य हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।


कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?

रविवार की सुबह केपी मिश्रा (74 वर्ष), निवासी उसलापुर को परिजन गंभीर हालत में लेकर सिम्स अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने बताया कि उन्होंने गलती से छह सेविंग ब्लेड निगल ली हैं। इस सूचना ने नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को भी चौंका दिया। तुरंत इसकी जानकारी सिम्स डीन प्रो. रमणेश मूर्ति को दी गई।

रविवार का अवकाश होने के बावजूद उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ENT विभाग, एनेस्थीसिया विभाग समेत सभी विशेषज्ञों को तत्काल बुलाया और मरीज के इलाज के निर्देश दिए।


ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों की जंग

  • ईएनटी विभाग प्रमुख डॉ. आरती पांडे,
  • डॉ. विद्या भूषण साहू,
  • एनेस्थीसिया विभाग प्रमुख डॉ. मधुमिता मूर्ति,
  • डॉ. शीतल दास

की अगुवाई में टीम ने इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में मरीज का ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली सर्जरी में बेहद सावधानीपूर्वक ब्लेड को गले से बाहर निकाला गया।


डीन और अधीक्षक की सक्रिय जोड़ी

सिम्स डीन प्रो. रमणेश मूर्ति और अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इस आपात स्थिति में जिस तरह तुरंत समन्वय स्थापित कर विभागों को सक्रिय किया, उसकी सराहना की जा रही है। अवकाश के दिन भी दोनों ने मौके की गंभीरता को समझते हुए पूरी टीम को मार्गदर्शन दिया और मरीज को जीवनदान दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।


सिम्स की टीम जिनके प्रयास से बची जान

  • ENT विभाग : डॉ. आरती पांडे, डॉ. विद्या भूषण साहू
  • एनेस्थीसिया विभाग : डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. शीतल दास
  • नर्सिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम : लगातार ऑपरेशन थिएटर में तैनात

गले में ब्लेड या धारदार वस्तु फंसने के खतरे

  • आहार नली (Esophagus) को छेदने का खतरा
  • स्वर तंत्र (Vocal cords) को स्थायी नुकसान
  • श्वसन नली (Trachea) में कटाव से तुरंत दम घुटने की स्थिति
  • संक्रमण और आंतरिक रक्तस्राव का बड़ा खतरा
  • ऐसे केस में समय पर सर्जरी न हो तो मौत की आशंका

सेवा का संकल्प

सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल लगातार जटिल से जटिल सर्जरी को सफलता से अंजाम दे रहा है। हाल ही में कई गम्भीर मरीजों का जीवन बचाने में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ की भूमिका अहम रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि “साइंस और सेवा का यह संयोजन ही हमें मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज देने के लिए प्रेरित करता है।

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