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छत्तीसगढ़ में महतारी पर संकट, जानिए क्या है पूरा मामला….

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

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ड्राइवर के भरोसे महतारी एक्सप्रेस…सरकार ने महतारियों की जान से किया खिलवाड़बिलासपुर, रायपुर। छत्तीसगढ़ की जीवनरक्षक योजना महतारी एक्सप्रेस आज सरकार की लापरवाह नीतियों के कारण “खतरे का वाहन” बन गई है। ऑक्सीजन सिलेंडर और प्रशिक्षित मेडिकल टेक्नीशियन हटाने के बाद यह सेवा अब सिर्फ एक साधारण ट्रांसपोर्ट वाहन रह गई है। कभी जिसने हजारों माताओं और नवजातों को नई जिंदगी दी, वही आज उनकी जान पर खेल रही है।महतारी एक्सप्रेस को 2013 में तत्कालीन राज्य सरकार ने इस सोच के साथ शुरू किया था कि ग्रामीण अंचलों की महिलाएं समय पर अस्पताल पहुँचें और सुरक्षित प्रसव हो। 102 टोल-फ्री नंबर पर उपलब्ध यह सेवा गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए संजीवनी साबित हुई।1️⃣ कब शुरू हुई महतारी एक्सप्रेस?2️⃣ क्या सुविधाएँ थीं पहले?3️⃣ क्या बदल गया अब?4️⃣ खतरनाक हालात🔴 – महतारियों की पुकार🔴 आंकड़े बोलते हैं

ड्राइवर के भरोसे महतारी एक्सप्रेस…सरकार ने महतारियों की जान से किया खिलवाड़

ऑक्सीजन और मेडिकल स्टाफ हटाकर “महतारी एक्सप्रेस” को बना दिया साधारण वाहन


बिलासपुर, रायपुर। छत्तीसगढ़ की जीवनरक्षक योजना महतारी एक्सप्रेस आज सरकार की लापरवाह नीतियों के कारण “खतरे का वाहन” बन गई है। ऑक्सीजन सिलेंडर और प्रशिक्षित मेडिकल टेक्नीशियन हटाने के बाद यह सेवा अब सिर्फ एक साधारण ट्रांसपोर्ट वाहन रह गई है। कभी जिसने हजारों माताओं और नवजातों को नई जिंदगी दी, वही आज उनकी जान पर खेल रही है।


महतारी एक्सप्रेस को 2013 में तत्कालीन राज्य सरकार ने इस सोच के साथ शुरू किया था कि ग्रामीण अंचलों की महिलाएं समय पर अस्पताल पहुँचें और सुरक्षित प्रसव हो। 102 टोल-फ्री नंबर पर उपलब्ध यह सेवा गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए संजीवनी साबित हुई।

लेकिन अब हालात बदल गए हैं। नए टेंडर नियमों में बदलाव के बाद एंबुलेंस से ऑक्सीजन सपोर्ट, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT), नाइट सर्विस और जरूरी उपकरण तक हटा दिए गए। नतीजा यह कि रास्ते में प्रसव पीड़ा से गुजर रही महिलाओं की जिंदगी दांव पर लग गई है।

बालोद, कोरबा, मनेन्द्रगढ़ और कई जिलों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि रात में एंबुलेंस नहीं मिलती, न ही रास्ते में इलाज की सुविधा मिलती है। कई बार प्रसव वाहन के अंदर ही हो जाता है और नाल काटने के लिए कैंची का इस्तेमाल करना पड़ता है।


1️⃣ कब शुरू हुई महतारी एक्सप्रेस?

  • जनवरी 2013 – योजना का शुभारंभ
  • 324 एंबुलेंस – राज्यभर में तैनात
  • 24×7 सेवा – आपातकालीन कॉल पर तुरंत उपलब्ध
  • उद्देश्य – मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कम करना

2️⃣ क्या सुविधाएँ थीं पहले?

  • प्रशिक्षित EMT (मेडिकल टेक्नीशियन)
  • ऑक्सीजन सपोर्ट और बेसिक ट्रीटमेंट
  • रास्ते में आपातकालीन प्रसव की सुविधा
  • प्रसव के बाद घर वापसी का फ्री ट्रांसपोर्ट
  • कोविड समय में हजारों मरीजों को बचाया

3️⃣ क्या बदल गया अब?

  • ऑक्सीजन सिलेंडर हटाए गए
  • EMT पद खत्म कर दिए गए
  • एंबुलेंस की संख्या घटाकर 100
  • कई जिलों में रात की सेवा बंद
  • अब सिर्फ “ट्रांसपोर्ट” वाहन बन गई

4️⃣ खतरनाक हालात

  • कोरबा में महिला का वाहन में ही प्रसव, नाल काटने के लिए कैंची का इस्तेमाल
  • बालोद में गंभीर महिला मरीज की EMT न होने से हालत बिगड़ी
  • ग्रामीण इलाकों में कई महिलाएं अस्पताल पहुँचने से पहले दम तोड़ रहीं

🔴 – महतारियों की पुकार

“पहले रास्ते में ही दवा और ऑक्सीजन मिल जाती थी, अब गाड़ी खाली मिलती है। सरकार ने हमारी जिंदगी को खतरे में डाल दिया है।”
— ग्रामीण महिला, कोरबा


🔴 आंकड़े बोलते हैं

  • 9.54 लाख मरीजों को सेवा (2021-22)
  • 2.19 लाख गर्भवती अस्पताल पहुंचीं
  • 51,024 नवजात बच्चों को मदद मिली
  • 7,386 कोविड मरीज इस सेवा से अस्पताल पहुँचे

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