Mohammed israil
00 ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान
बिलासपुर, बलरामपुर। बलरामपुर जिले के महावीरगंज ग्राम में रविवार को बस्ती के समीप एक नर हाथी मृत अवस्था में मिला। हाथी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने वन विभाग और प्रशासन की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी पर जब लगातार विभागीय निगरानी थी, तो आखिर उसकी मौत कैसे हो गई? क्या यह विभागीय लापरवाही का नतीजा है या इसके पीछे कोई और कारण छिपा है?
घटना पर मचा हड़कंप
सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। देर रात डीएफओ आलोक बाजपेई और एसडीएम अरविंद नेताम मौके पर पहुंचे। भारी संख्या में ग्रामीण भी वहां इकट्ठा हो गए और सवाल उठाए कि हाथी की मौत के बाद ही अफसर सक्रिय होते हैं, जबकि शुरुआती दौर में कोई ठोस पहल नहीं की जाती।
दिनभर निगरानी, फिर भी मौत
वन विभाग का दावा है कि यह नर हाथी वाड्रफनगर रजखेता से होते हुए रामानुजगंज क्षेत्र तक आया था और उस पर लगातार नजर रखी जा रही थी। रविवार को दिनभर हाथी को बसकटिया जंगल में देखा गया था। लेकिन रात 9 बजे के करीब अचानक उसकी मौत हो गई।
विभाग ने शव के आसपास सुरक्षा घेराव कर दिया है और पोस्टमॉर्टम की तैयारी शुरू कर दी गई है। मौत के कारण का खुलासा रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।
छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत : लापरवाही, शिकार और टकराव की कहानी
छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत अब लगातार चिंता का विषय बन गई है। पिछले एक दशक में दर्जनों हाथियों की मौत संदिग्ध हालात में हुई है। कई बार यह मामला शिकार, करंट, आपसी संघर्ष और विभागीय लापरवाही से जुड़ा सामने आया है।
हाल की घटनाएँ
- सूरजपुर, जशपुर और बलरामपुर जिलों में कई हाथियों की मौत करंट लगने या शिकार की वजह से हो चुकी है।
- बिलासपुर और रायगढ़ क्षेत्र में फसलों को बचाने के लिए बिछाए गए करंट तार हाथियों की जान ले रहे हैं।
- बीते साल भी बलरामपुर में 3 हाथियों की मौत हुई थी, जिनमें से 2 की वजह शिकार बताई गई थी।
ग्रामीणों और हाथियों के बीच टकराव
- हाथियों के झुंड गांव-गांव घूमते हैं और अक्सर फसलों व घरों को नुकसान पहुंचाते हैं।
- ग्रामीण कई बार आत्मरक्षा या फसल बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाते हैं।
- विभाग की देरी से कार्रवाई ग्रामीणों में असंतोष बढ़ाती है।
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि – “हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर और समय पर रेस्क्यू प्लान जरूरी है। बार-बार होने वाली मौतें केवल वन्यजीव संरक्षण की विफलता ही नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं।”
वन विभाग के रिकॉर्ड और स्वतंत्र सर्वेक्षणों पर आधारित अनुमानित संख्या)
जशपुर : 19 मौतें (करंट और शिकार प्रमुख कारण)
सूरजपुर : 14 मौतें (करंट और ट्रेन हादसे)
बलरामपुर : 12 मौतें (शिकार, करंट व रहस्यमयी हालात)
रायगढ़ : 15 मौतें (फसलों की सुरक्षा हेतु लगाए गए तार)
कोरबा व बिलासपुर : 9 मौतें (खनन क्षेत्र और करंट)
➡️ कुल : लगभग 69 हाथियों की मौत (2019 से 2024 के बीच)



