Mohammed israil
07 सितंबर 2025 | स्थान : राजपुर (बलरामपुर-रामानुजगंज)


➡️ ग्रामीणों ने अस्पताल का घेराव किया, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप➡️ स्वास्थ्य सेवाओं की पोल फिर खुली, लोगों ने कार्रवाई की मांग उठाई
00 नाचते-नाचते थम गई जिंदगी
बिलासपुर रायपुर ,छत्तीसगढ़। गणेश विसर्जन की खुशियों के बीच शुक्रवार को राजपुर में प्रवीण गुप्ता (15 वर्ष) अचानक जिंदगी की जंग हार गया। डीजे की तेज धुन पर थिरकते हुए अचानक वह गिर पड़ा और बेहोश हो गया। लोग उसे भागते-भागते सिविल अस्पताल राजपुर लेकर पहुंचे। लेकिन वहां न इलाज मिला, न डॉक्टर। कुछ देर बाद पहुंचे चिकित्सक ने जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल में हंगामा
बच्चे की मौत की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीणों में आक्रोश फूट पड़ा। उनका कहना था कि करीब 20 मिनट तक अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। यदि समय पर इलाज मिलता तो बच्चे की जान बच सकती थी। गुस्साए लोगों ने अस्पताल परिसर का घेराव कर दिया और जमकर नारेबाजी करते हुए डॉक्टर को हटाने की मांग पर अड़े रहे।
डीजे का अंधेरा पहलू
शरीर पर असर
- लगातार ऊंची ध्वनि से दिल की धड़कनें असामान्य
- युवाओं और बच्चों में अचानक हार्ट अटैक की आशंका
- सुनने की शक्ति धीरे-धीरे खत्म होना
⚡ सामाजिक खतरे
- डीजे की धुन पर अनियंत्रित भीड़ से हादसों का खतरा
- कई बार विवाद और हिंसा की घटनाएं
कानून की नजर में डीजे
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण एवं विनियमन) नियम, 2000 लागू
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक डीजे या लाउडस्पीकर बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित
- ध्वनि सीमा : 75 डेसीबल से अधिक नहीं
- उल्लंघन पर जुर्माना, उपकरण जब्ती और कारावास तक का प्रावधान
छत्तीसगढ़ में डीजे की स्थिति
- त्योहारों और शादियों में डीजे का चलन लगातार बढ़ता जा रहा
- पुलिस-प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई और जप्ती के बावजूद नियमों की अनदेखी
- उच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद ध्वनि प्रदूषण पर पूरी तरह अंकुश नहीं
- रायपुर, बिलासपुर और जशपुर में हाल ही में डीजे जप्त करने की बड़ी कार्रवाई



