Latest news

बिलासपुर में फर्जी EWS सर्टिफिकेट कांड से दलालों को ठेका देने वाले आवेदकों में हड़कंप, तीन नहीं बड़ी संख्या में उजागर हो सकती  है गड़बड़ी अगर हो जांच,जानिए क्या है पूरा मामला…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
4 Min Read

Mohammed israil


MBBS में दाखिले के लिए फर्जी प्रमाणपत्र, तहसीलदार का साइन भी नकली — पूरे छत्तीसगढ़ में मचा बवाल, बिलासपुर में अपने-अपने प्रमाण पत्रों की सच्चाई का पता करने भटक रहे आवेदक

बिलासपुर। फर्जी EWS सर्टिफिकेट से MBBS में दाखिले का मामला अब राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया है। जांच में तीन छात्राओं के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जिनमें तहसीलदार के हस्ताक्षर और सील तक अलग-अलग मिले। तहसील कार्यालय ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए आवेदकों से दोबारा दस्तावेज मांगे हैं। वहीं, इस कांड के उजागर होते ही फर्जीवाड़ा कराने वालों और सर्टिफिकेट बनवाने वालों में हड़कंप मच गया है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल का सख्त रुख


फर्जी EWS प्रमाणपत्र कांड को लेकर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद चाहे कार्यालयीन कर्मचारी हों, वकील हों या फिर किसी भी स्तर पर शामिल व्यक्ति, सभी पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि फर्जीवाड़ा करने वालों की वजह से योग्य छात्रों का हक छिन रहा है, इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज

  • चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने छात्राओं के EWS सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए तहसील कार्यालय भेजे।
  • जांच में तीनों प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।
  • सभी पर अलग-अलग सील और फर्जी तहसीलदार साइन।
  • तहसील रिकॉर्ड में कोई प्रविष्टि नहीं।

जांच में सामने आए नाम

फर्जी सर्टिफिकेट से MBBS में दाखिला लेने वालों में ये छात्राएं शामिल:

  • श्रेयांशी गुप्ता (सरकंडा)
  • सुहानी सिंह (लिंगियाडीह, सीपत रोड)
  • भाव्या मिश्रा (सरकंडा)

फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने वालों में मची खलबली

खुलासे के बाद अब कई आवेदक, जिन्होंने दलालों और बाबुओं को ठेका देकर EWS सर्टिफिकेट बनवाए थे, घबराए हुए हैं।

  • अपने प्रमाणपत्र असली या नकली हैं, यह पता लगाने के लिए अफसरों से लेकर वकीलों और बाबुओं तक के चक्कर लगा रहे हैं।
  • तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड गायब होने पर प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
  • इस मामले ने पूरे छत्तीसगढ़ में तहलका मचा दिया है।

आवेदकों से दोबारा मंगाए दस्तावेज

  • सोमवार को तहसील कार्यालय ने सभी आवेदकों से पुनः दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए।
  • परिजनों का कहना— “नियम के तहत ऑनलाइन आवेदन किया था, गड़बड़ी तहसील के भीतर हुई होगी।”
  • क्लर्क प्रहलाद सिंह नेताम को नोटिस जारी कर प्रभार से हटाया गया।

तहसील ऑफिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

  • ऑनलाइन आवेदन का रिकॉर्ड कहां गायब हुआ?
  • अलग-अलग सील और नकली हस्ताक्षर कैसे लगे?
  • दोषी केवल क्लर्क या पूरा तंत्र?

अब जांच के घेरे में एक वकील और दलाल
इस फर्जीवाड़े के बाद वकीलों और बाबुओं पर निगाह टिकी हुई है।

  • सर्टिफिकेट बनाने के लिए ठेका देने की चर्चाएं तेज।
  • कई आवेदक खुद आगे आकर अपने दस्तावेज की तस्दीक कराना चाह रहे हैं।

राज्य में बना हॉट टॉपिक

  • छात्रवृत्ति से लेकर MBBS प्रवेश तक पर उठे सवाल।
  • विपक्ष और आमजन सरकार व प्रशासन को घेरे में ले रहे हैं।
  • सोशल मीडिया से लेकर न्यायालय तक, हर जगह यही चर्चा – “बिलासपुर का फर्जी EWS कांड।”

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।