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“चना के एक दाने ने बुझा दी मासूम की जिंदगी : रतनपुर में दर्दनाक हादसा”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

छोटी-सी असावधानी कभी-कभी बड़ी त्रासदी बन जाती है। रतनपुर में डेढ़ साल के मासूम शिवांश की चना खाते समय दम घुटने से मौत हो गई। यह घटना पूरे इलाके को गमगीन कर गई और एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर गई है।


बिलासपुर,रतनपुर। ग्राम बरपारा, निर्धि निवासी जय कुमार पोर्ते का बेटा डेढ़ साल का शिवांश मंगलवार को घर पर बिस्तर पर खेलते हुए चना खा रहा था। अचानक एक दाना उसके गले में फँस गया और बच्चा छटपटाने लगा। परिजन तत्काल उसे लेकर रतनपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुँचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने शिवांश को मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद पूरे मोहल्ले में मातम छा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

कोरबा  में हाल ही में ऐसा ही हादसा

  • 2 साल के दिव्यांश की मौत चना गले में फँसने से हुई।
  • परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
  • डॉक्टरों का कहना था कि बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचा था, इलाज तत्काल शुरू किया गया।

चिकित्सकीय पहलू

चिकित्सकों की चेतावनी

  • छोटे बच्चों को अकेले चना, मूंगफली, सूखे मेवे या कठोर खाद्य पदार्थ न दें।
  • इससे गले में फँसने और दम घुटने का खतरा अधिक रहता है।
  • बच्चों को हमेशा अभिभावकों की देखरेख में ही खिलाना-पिलाना चाहिए।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

🗣️ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीकांत गिरी

  • बच्चों में गले की नली बहुत संकरी होती है, इसलिए छोटे-से दाने से भी दम घुट सकता है।
  • यदि बच्चा अचानक खाँसने लगे या साँस रुक जाए तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाएँ।
  • घर पर फौरन पीठ थपथपाकर या Heimlich Maneuver (आपातकालीन तकनीक) आज़माना चाहिए।
  • परंतु विशेषज्ञ की निगरानी ही जीवन बचा सकती है।

शिवांश की मौत ने यह साबित कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा में छोटी सी चूक भी ज़िंदगी के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।

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