Mohammed israil
नौकरी और 1 करोड़ की मांग पर अड़े परिजन, बिलासपुर DRM ऑफिस के बाहर प्रदर्शन जारी


बिलासपुर। वंदे भारत ट्रेन के अतिरिक्त कोच की मरम्मत के दौरान करंट की चपेट में आकर ठेका श्रमिक प्रताप बर्मन की मौत के मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की। अदालत ने ठेकेदार को 6 हफ्ते के भीतर मृतक के परिजन को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया। रेलवे ने कोर्ट को बताया कि परिवार को 16 लाख 40 हजार रुपए पहले ही दिए जा चुके हैं। इस पर अदालत ने मामले को निराकृत मानते हुए सुनवाई समाप्त कर दी।
दूसरी ओर मृतक की पत्नी और परिजन एक करोड़ रुपए मुआवजा, पत्नी को नौकरी और बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका धरना-प्रदर्शन बीते 6 दिन से डीआरएम दफ्तर के बाहर जारी है।
क्या है मामला
23 अगस्त को कोचिंग डिपो, बिलासपुर में वंदे भारत के अतिरिक्त कोच की एसी सफाई और मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ निवासी प्रताप बर्मन (ठेका श्रमिक) हाईटेंशन ओएचई तार की चपेट में आ गया। हादसे में गंभीर रूप से झुलसे प्रताप को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान 28 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
⚡ रेलवे और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप
- हादसे के समय न तो रेलवे प्रशासन और न ही ठेकेदार ने उपचार में सहयोग किया।
- मौत के बाद भी रेलवे ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
- जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर शासन और रेल प्रशासन ने 21.50 लाख का प्रस्ताव दिया, लेकिन परिजनों ने इसे ठुकरा दिया।
हाईकोर्ट का रुख
- चीफ जस्टिस ने मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लिया।
- रेलवे के रवैए पर कड़ी नाराजगी जताई।
- जीएम को शपथपत्र के साथ जवाब देने को कहा।
- मंगलवार को सुनवाई में कोर्ट ने ठेकेदार को 5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।
🚨 धरना-प्रदर्शन की स्थिति
- परिजन और समाज के लोग डीआरएम ऑफिस के बाहर दिन-रात धरने पर बैठे हैं।
- पत्नी खुशबू बर्मन ने कहा कि जब तक 1 करोड़ मुआवजा, सरकारी नौकरी और बच्चे की पढ़ाई का खर्च सुनिश्चित नहीं किया जाता, धरना जारी रहेगा।
- शव बीते 4 दिन से मॉर्च्युरी के फ्रीजर में रखा है। डॉक्टरों का कहना है कि करंट और पोस्टमॉर्टम के बाद लाश खराब होने लगी है।
परिजनों की प्रमुख मांगें
- 1 करोड़ रुपए मुआवजा
- मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी
- बच्चे की शिक्षा का पूरा खर्च



