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जो दिल बचाता था, उसी का दिल फेल हो गया..39 साल के हार्ट सर्जन की अस्पताल में मौत!, जानिए क्या है पूरा मामला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, रायपुर,चेन्नई।— देश के युवा डॉक्टरों के लिए एक बड़ा झटका और स्वास्थ्य जगत के लिए चेतावनी साबित हुई। चेन्नई के सेवाथा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 39 वर्षीय कार्डियक सर्जन डॉ. ग्रैडलिन रॉय की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई।

शनिवार सुबह वह अस्पताल के वॉर्ड राउंड पर थे, तभी अचानक सीने में तेज दर्द से गिर पड़े। सहकर्मी डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें आपातकालीन इकाई में शिफ्ट किया और CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) से लेकर एंजियोप्लास्टी और ECMO (एक्स्ट्रा कॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) तक हर संभव चिकित्सा उपाय किए। लेकिन उनकी left main artery में 100% ब्लॉकेज था, जिसके कारण उनकी जान नहीं बच सकी।

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बिलासपुर, रायपुर,चेन्नई।— देश के युवा डॉक्टरों के लिए एक बड़ा झटका और स्वास्थ्य जगत के लिए चेतावनी साबित हुई। चेन्नई के सेवाथा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 39 वर्षीय कार्डियक सर्जन डॉ. ग्रैडलिन रॉय की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना से सदमे में मेडिकल जगत युवा डॉक्टरों में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा विशेषज्ञों की राय 1: क्यों बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले? 2: डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए “बचाव समिति” की सिफारिशें 3: हार्ट अटैक से बचाव के आसान उपाय (सभी के लिए उपयोगी)जनवरी में सबसे ज्यादा हार्ट अटैक!एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में 6 माह में 1000 मरीज भर्ती जनवरी में क्यों बढ़े केस?📊 डेटा फैक्ट्स (जनवरी–जून 2025) विशेषज्ञों की राय 1: हार्ट अटैक क्यों बढ़ रहे हैं? 2: बचाव कैसे करें? प्रदेश का एकमात्र सरकारी अस्पतालयुवा हो रहे बीमार

घटना से सदमे में मेडिकल जगत

डॉ. रॉय अपनी विशेषज्ञता और मिलनसार स्वभाव के कारण न केवल अस्पताल, बल्कि पूरे तमिलनाडु के मरीजों में लोकप्रिय थे। उनकी आकस्मिक मृत्यु से सहकर्मी स्तब्ध हैं।
एक सहकर्मी ने कहा— “वह अपने मरीजों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतने युवा और फिट दिखने वाले डॉक्टर को इस तरह हार्ट अटैक हो सकता है।”


युवा डॉक्टरों में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि डॉक्टरों सहित अन्य उच्च-तनाव वाले पेशों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

  • लंबे कार्य घंटे (अक्सर 12–18 घंटे की शिफ्टें)
  • नींद की कमी और अनियमित खानपान
  • मानसिक तनाव और थकान
  • शारीरिक गतिविधियों का अभाव
  • धूम्रपान / कैफीन का अत्यधिक सेवन
    ये सभी मिलकर दिल को कम उम्र में ही कमजोर कर रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 55 घंटे से अधिक काम करने वाले कर्मचारियों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा 17% अधिक होता है


विशेषज्ञों की राय

🩺 डॉ. सुधीर कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट, CMC वेल्लोर

“डॉक्टर दिन-रात दूसरों को बचाते हैं, लेकिन अपने स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। डॉ. ग्रैडलिन रॉय का निधन एक चेतावनी है। हमें समय पर स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त नींद और मानसिक संतुलन पर ध्यान देना होगा।”

🩺 डॉ. अंजलि मेनन, कार्डियोलॉजिस्ट, चेन्नई

“कई युवा पेशेवर मानते हैं कि हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों को होता है। यह गलत धारणा है। अब 30–40 वर्ष के लोग भी हार्ट डिज़ीज़ के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं।”


1: क्यों बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले?

✔ तनाव और मानसिक दबाव
✔ 10–12 घंटे से अधिक काम
✔ नींद की कमी (5–6 घंटे से कम)
✔ अनियमित खानपान, जंक फूड
✔ व्यायाम की कमी
✔ हाइपरटेंशन और डायबिटीज़


2: डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए “बचाव समिति” की सिफारिशें

🔹 अस्पतालों में डॉक्टरों की अनिवार्य हेल्थ चेकअप
🔹 वर्क-लाइफ बैलेंस पॉलिसी लागू करना
🔹 12 घंटे से अधिक ड्यूटी पर रोक
🔹 शिफ्ट के बीच अनिवार्य आराम और छुट्टियां
🔹 डॉक्टरों के लिए योगा/फिटनेस प्रोग्राम
🔹 मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेंटर की स्थापना


3: हार्ट अटैक से बचाव के आसान उपाय (सभी के लिए उपयोगी)

✔ रोज़ाना 30 मिनट पैदल चलना / योग
✔ संतुलित आहार, जंक फूड और तैलीय भोजन से परहेज़
✔ धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी
✔ ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच
✔ तनाव प्रबंधन – ध्यान, संगीत, परिवार संग समय
✔ 7–8 घंटे की नींद


Mohammed israil

जनवरी में सबसे ज्यादा हार्ट अटैक!

एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में 6 माह में 1000 मरीज भर्ती

रायपुर, 31 अगस्त — पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है। जनवरी से जून तक के 6 माह में यहां 1,000 हार्ट अटैक मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें जनवरी का आंकड़ा सबसे ज्यादा—234 मरीज है। आमतौर पर कड़ाके की ठंड में केस बढ़ते हैं, लेकिन जनवरी में हल्की ठंड के बावजूद रिकॉर्ड मरीज सामने आना हैरान करने वाला है।

डॉक्टरों का मानना है कि दिसंबर के मौसम का प्रभाव जनवरी में ‘लेट इफेक्ट’ के रूप में देखने को मिला हो सकता है। इन मरीजों में अधेड़ उम्र से लेकर बुजुर्ग शामिल हैं, जबकि सबसे कम उम्र का मरीज 35 साल का रहा।


जनवरी में क्यों बढ़े केस?

विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के मामलों में मौसम की भूमिका अहम होती है। ठंड में रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।

  • दिसंबर की ठंड का असर जनवरी में देखने को मिला होगा।
  • त्योहारों के बाद अनियमित खानपान, नींद की कमी और तनाव का असर भी पड़ा।
  • दिन और रात के तापमान में अंतर (Diurnal Variation) ने भी हृदय पर दबाव डाला।

📊 डेटा फैक्ट्स (जनवरी–जून 2025)

माह मरीजों की संख्या जनवरी 234 फरवरी 178 मार्च 160 अप्रैल 145 मई 142 जून 141 कुल1,000

👉 जनवरी का आंकड़ा बाकी महीनों से लगभग 30% ज्यादा है।


विशेषज्ञों की राय

🩺 डॉ. एस तिवारी, कार्डियोलॉजिस्ट, ACI

“जनवरी में केस अधिक मिलने का कारण ठंड का लेट इफेक्ट हो सकता है। दिसंबर की ठंड से शरीर की धमनियों में सिकुड़न आई और उसका असर अगले माह ज्यादा दिखा। इस पर और अध्ययन की ज़रूरत है।”

🩺 डॉ. ए मेनन, कार्डियक रिसर्च

“जीवनशैली की खामियां जैसे तनाव, मोटापा, मधुमेह और धूम्रपान हार्ट अटैक की बड़ी वजह हैं। अब 30–40 की उम्र में भी मरीज बढ़ रहे हैं। ये आंकड़े अलार्मिंग हैं।”


1: हार्ट अटैक क्यों बढ़ रहे हैं?

✔ ठंड में धमनियों का सिकुड़ना
✔ ब्लड प्रेशर का अचानक बढ़ना
✔ ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन
✔ धूम्रपान और शराब
✔ अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी
✔ डायबिटीज और हाइपरटेंशन


2: बचाव कैसे करें?

🔹 रोज़ाना 30 मिनट व्यायाम या पैदल चलना
🔹 संतुलित और कम वसा वाला भोजन
🔹 ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच
🔹 ठंड में सुबह-शाम तेज ठंडक से बचाव
🔹 तनाव कम करने के लिए ध्यान और योग
🔹 7–8 घंटे की नींद अनिवार्य


प्रदेश का एकमात्र सरकारी अस्पताल

एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट प्रदेश का इकलौता सरकारी अस्पताल है जहां हार्ट अटैक के सभी आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं। ज्यादातर मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई। यहां प्रतिदिन औसतन 5–6 नए हार्ट अटैक मरीज पहुंच रहे हैं।


युवा हो रहे बीमार

ACI का यह आंकड़ा बताता है कि हार्ट अटैक अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही। 35–40 साल की उम्र में भी लोग शिकार हो रहे हैं। जनवरी का रिकॉर्ड यह चेतावनी है कि बदलती जीवनशैली, मौसम और तनाव—तीनों मिलकर दिल को खतरे में डाल रहे हैं।


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