Mohammed israil
Bilaspur,रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। एक ओर 16,000 से ज्यादा एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार ने अनुपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए “काम नहीं तो वेतन नहीं” का आदेश लागू कर दिया है। अब हड़ताली कर्मियों को वेतन नहीं मिलेगा और सेवा से हटाने तक की कार्रवाई संभव है। इस टकराव ने आम जनता की चिकित्सा सेवाओं को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
राज्य शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि 18 अगस्त से लगातार अनुपस्थित एनएचएम अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन का आहरण नहीं किया जाएगा।
- कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश – अनुपस्थित कर्मचारियों से जवाब तलब किया जाएगा। यदि उपस्थिति नहीं दी गई तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
- सेवा से हटाने तक की चेतावनी – आदेश में यह भी स्पष्ट है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को सेवा से पृथक किया जा सकता है।
हड़ताल और मांगें
एनएचएम कर्मचारी संघ ने 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इनकी 10 सूत्रीय मांगें हैं –
- नियमितीकरण
- सार्वजनिक स्वास्थ्य कैडर की स्थापना
- वेतनमान एवं ग्रेड पे निर्धारण
- 27% वेतन वृद्धि
- स्थानांतरण नीति
- कैशलैस चिकित्सा बीमा योजना
- कार्य मूल्यांकन प्रणाली में सुधार
आदि।
हड़ताल के कारण जिला अस्पतालों से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक सेवाएं चरमराई हुई हैं। टीकाकरण, टीबी व मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम, प्रसूति सेवाएं और आपातकालीन इलाज गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासनिक रुख
सरकार ने इस स्थिति को “लोकहित के विरुद्ध और पूर्णतः अनुचित” ठहराते हुए दो टूक कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
असर
- मरीज़ों को छोटे-मोटे इलाज के लिए भी निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
- गरीब तबका सरकारी अस्पतालों में बदहाल व्यवस्था से जूझ रहा है।
- कर्मचारियों की हड़ताल और सरकार की सख्ती, दोनों ने मिलकर स्वास्थ्य तंत्र को संकट में डाल दिया है।



