बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार ठप हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मियों की हड़ताल बुधवार को दसवें दिन में पहुंच गई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जिले के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ताले लटक गए हैं। मलेरिया, टीबी, टीकाकरण, महामारी जैसी राष्ट्रीय योजनाएं भी प्रभावित हो गई हैं। मरीजों को अब निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज महंगा होने से गरीब और ग्रामीण परिवार सबसे ज्यादा संकट में हैं।



खतरनाक स्थिति – आम जनता पर असर
- जिला अस्पताल, CIMS, 05 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी, शल्य क्रिया, आपातकालीन सेवाएं ठप।
- गांव-गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप स्वास्थ्य केंद्र) बंद।
- बरसात में फैल रही सर्दी-खांसी, बुखार, उल्टी-दस्त जैसी मौसमी बीमारियों से मरीजों की भीड़, लेकिन इलाज नहीं।
- राष्ट्रीय कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग बंद – मलेरिया, टीबी, टीकाकरण, महामारी नियंत्रण प्रभावित।
- जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का काम ठप – ग्रामीणों को प्रशासनिक दिक्कतें।
✍️ आंदोलन की रणनीति
- संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर नियमितीकरण की प्रार्थना की।
- मंत्रीयों के पुराने वादों का वीडियो दिखाकर सरकार पर ‘वादा खिलाफी’ का आरोप।
- संघ का ऐलान –
- पहले उपमुख्यमंत्री अरुण साव के निवास का घेराव।
- फिर क्रमशः केंद्रीय मंत्रियों के घरों का घेराव।
- अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो अनिश्चितकालीन उग्र आंदोलन।
प्रांतीय अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे –”सरकार ने अब तक सुध नहीं ली। नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और उग्र होगा। आम जनता को होने वाली परेशानी की जवाबदारी सिर्फ सरकार की होगी।”
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार ठप हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मियों की हड़ताल बुधवार को दसवें दिन में पहुंच गई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जिले के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ताले लटक गए हैं। मलेरिया, टीबी, टीकाकरण, महामारी जैसी राष्ट्रीय योजनाएं भी प्रभावित हो गई हैं। मरीजों को अब निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज महंगा होने से गरीब और ग्रामीण परिवार सबसे ज्यादा संकट में हैं। खतरनाक स्थिति – आम जनता पर असर✍️ आंदोलन की रणनीतिप्रांतीय अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे –”सरकार ने अब तक सुध नहीं ली। नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और उग्र होगा। आम जनता को होने वाली परेशानी की जवाबदारी सिर्फ सरकार की होगी।”



