छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में राज्य स्तरीय परामर्श : बालिका संरक्षण को लेकर न्यायपालिका, प्रशासन और समाज ने मिलाया कदम
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्पेशल सेल फॉर POCSO समिति एवं किशोर न्याय समिति की पहल पर रविवार को “बालिका संरक्षण : भारत में उसके लिए एक सुरक्षित एवं सक्षम वातावरण की ओर” विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित हुआ।
इस परामर्श में न्यायपालिका से लेकर प्रशासनिक विभागों, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, गैर-सरकारी संगठनों और यूनिसेफ तक ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि बालिकाओं के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना केवल विधिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।
मुख्य न्यायाधीश का संदेश
- बालिका की सुरक्षा सिर्फ अपराध से बचाने तक सीमित नहीं।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और समान अवसर जरूरी।
- सभी संस्थाओं का उद्देश्य सिर्फ अन्याय रोकना नहीं, बल्कि सशक्तिकरण होना चाहिए।
- समाज को अपनी सोच बदलनी होगी तभी हर बालिका निडर होकर आगे बढ़ सकेगी।
कार्यक्रम में उपस्थिति
- उद्घाटन : माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश
- विशिष्ट अतिथि :
- माननीय श्री न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल
- माननीय श्रीमती न्यायमूर्ति रजनी दुबे
- माननीय श्री न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी
- गरिमामय उपस्थिति : माननीय न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, सचिन सिंह राजपूत, संजय कुमार जायसवाल, रविन्द्र कुमार अग्रवाल एवं अमितेन्द्र किशोर प्रसाद।
तकनीकी सत्रों के प्रमुख विषय
- बेटियों के खिलाफ हिंसा और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की समीक्षा।
- स्कूलों में सुरक्षित वातावरण बनाने में शिक्षकों की भूमिका।
- गैर-सरकारी संस्थाओं का योगदान और नीति सुधार की वकालत।
- परिवार और समुदाय का सहयोग व लैंगिक संवेदनशीलता।
- बाल संरक्षण सेवाओं की चुनौतियाँ और सुधार।
- हिंसा का मनोवैज्ञानिक असर और स्वास्थ्य जागरूकता।
- जाँच प्रक्रिया और यूनिसेफ जैसी संस्थाओं के सहयोग से बाल हितैषी व्यवस्था।
- विधिक संरक्षण ढाँचे की समीक्षा और किशोर न्याय बोर्ड व विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका।
कार्यक्रम में POCSO अधिनियम से जुड़ी जानकारी पर आधारित जनजागरूकता लीफलेट (पंपलेट) का विमोचन।
- विमोचन किया : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा, न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल, न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी।
कौन-कौन रहे मौजूद
- हाईकोर्ट, न्यायिक अकादमी और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी
- विधि विभाग, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत व ग्रामीण विकास, समाज कल्याण विभाग
- बिलासपुर के कलेक्टर, एसपी और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
- राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष
- यूनिसेफ प्रतिनिधि
- फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों के जज और किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट



