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अस्पतालों में ताले, मरीज बेहाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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एनएचएम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल तेज, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु देखभाल कक्ष बंद

बिलासपुर। प्रदेशभर में एनएचएम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगी हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं, कई जगह ताले लटक गए हैं और प्रसव व आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। ओटी रूम से लेकर एमसीएच भवन तक बंद पड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


हड़ताल का असर

  • संस्थागत प्रसव सेवाएं ठप
  • ओपीडी बंद, मरीज इलाज से वंचित
  • पैथोलॉजी और टीबी, मलेरिया जांच रुकी
  • आपातकालीन सेवाएं प्रभावित
  • उप स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी इकाइयों में ताले

कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगें

  1. संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण/सविलियन
  2. लंबित 27% वेतन वृद्धि
  3. ग्रेड पे निर्धारण
  4. पदोन्नति नीति स्पष्ट करना
  5. पीएफ और पेंशन की व्यवस्था
  6. सेवा सुरक्षा गारंटी
  7. कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रावधान
  8. स्थानांतरण नीति
  9. अवकाश एवं चिकित्सीय लाभ
  10. समान कार्य के लिए समान वेतन

संख्या का पैमाना

  • प्रदेशभर में 16,000+ एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर
  • सूरजपुर से लेकर बिलासपुर तक हर जिला प्रभावित
  • सैकड़ों कर्मचारी प्रतिदिन धरना स्थल पर डटे

कर्मचारियों का आरोप

कर्मचारियों ने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र और “मोदी की गारंटी” में वादा किया था कि 100 दिनों में संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। लेकिन 20 महीने और 160 से अधिक ज्ञापन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।


सरकारी रुख

  • नियमित कर्मचारियों की छुट्टियाँ रद्द, ड्यूटी पर लौटने का आदेश
  • स्वास्थ्य विभाग ने आपात सेवाएं संभालने के लिए वैकल्पिक इंतजाम का दावा
  • लेकिन जमीनी हकीकत में अस्पतालों में मरीज बेहाल

👉 कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अब भी ठोस पहल नहीं की तो पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह पंगु हो जाएगी।


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